ऑपरेशन सिंदूर से डरा पाकिस्तान, बॉर्डर पार करने वाले BSF जवान पीके साहू को वापस सौंपा

BSF के जवान पूर्णम साहू 20 दिन से अधिक पाकिस्तान के कब्जे में रहने के बाद अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत वापस आ गए हैं.

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BSF के जवान पूर्णम साहू के बाद अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत वापस आ गए हैं.

भारत के एक्शन के सामने पाकिस्तान बैकफुट पर आ गया है. पाकिस्तान ने अपनी हिरासत में लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के जवान पूर्णम साहू को वापस कर दिया है. 20 दिन से अधिक पाकिस्तान के कब्जे में रहने के बाद पूर्णम साहू अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत वापस आ गए हैं. पाकिस्तान ने पहलगाम आतंकावादी हमले के एक दिन बाद उन्हें हिरासत में लिया था और उसके बाद से दोनों देशों में तनाव चरम पर था. भारत ने पाकिस्तान के आतंकवाद के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. इन सबके बीच पूर्णम साहू का परिवार उनकी वापसी की राह देख रहा था. 

BSF ने एक बयान में कहा, "आज BSF जवान पूर्णम कुमार साह, जो 23 अप्रैल 2025 से पाकिस्तान रेंजर्स की हिरासत में थे, को संयुक्त चेक पोस्ट अटारी, अमृतसर के माध्यम से लगभग 10.30 बजे भारत को सौंप दिया गया. हैंडओवर शांतिपूर्ण और स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया."

40 साल के पूर्णम साहू 23 अप्रैल को अनजाने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर गए थे और बाद में उन्हें ‘पाकिस्तान रेंजर्स' ने हिरासत में ले लिया था. पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में बीएसएफ की 182वीं बटालियन में तैनात पूर्णम साहू वर्दी में थे और उनके पास उनका सर्विस राइफल भी था. बीएसएफ अधिकारियों के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब साहू सीमा के पास किसानों के एक समूह की रक्षा के लिए उनके साथ थे. वह एक पेड़ के नीचे आराम करने के लिए चले गए और अनजाने में पाकिस्तानी क्षेत्र में प्रवेश कर गए. उन्हें तुरंत पाकिस्तान रेंजर्स ने हिरासत में ले लिया.

  • BSF जवान पीके साहू ने फिरोजपुर बॉर्डर गलती से पार कर लिया था. 
  • 23 अप्रैल को पाकिस्तान रेंजर्स ने उनको हिरासत में लिया था
  • 14 मई को पाकिस्तान ने भारतीय जवान को वापस सौंप दिया है.
  • भारत के ऑपरेशन सिंदूर से डरकर बैकफुट पर आया पाकिस्तान
  • पाकिस्तानी रेंजर्स खुद BSF जवान साहू को सीमा पर सौंपने आए. 
  • सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत के दवाब में झुका पाक

पूर्णम साहू का परिवार पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिशरा में रहता है और उनके हिरासत में जाने के बाद से ही वो चिंतित और व्याकुल था. उनका सात वर्षीय बेटा, स्थिति की गंभीरता से अनजान, लगातार पूछ रहा था कि उसके पिता कब लौटेंगे. अब उनके लौटने के बाद परिवार ने राहत की सांस ली है.

गौरतलब है कि BSF को जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक 3,323 किलोमीटर लंबी भारत-पाकिस्तान सीमा की सुरक्षा का काम सौंपा गया है. गश्त के दौरान BSF जवानों के गलती से सीमा पार करने की घटनाएं आम हैं और इन्हें आमतौर पर फ्लैग मीटिंग के जरिए सुलझा लिया जाता है.

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