बैंक घोटाले मामले में ED का बड़ा एक्शन, लंदन में जब्त की 7.5 करोड़ की संपत्ति

ED ने 307 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी मामले में लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट के पास स्थित 7.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. यह कार्रवाई निओ कॉर्पोरेशन और पोली लॉजिक इंटरनेशनल के प्रमोटर्स के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है.

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  • ED ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट के पास 7.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की
  • ED की जांच निओ कॉर्परेशन इंटरनेशनल लिमिटेड और उसके प्रमोटर्स के खिलाफ बैंक घोटालों पर आधारित है
  • कुल 307.44 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप लगाए गए हैं, जिसमें कई फर्जी कंपनियां शामिल हैं
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े बैंक फ्रॉड मामले में करीब 7.5 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त कर लिया है. यह संपत्ति  लंदन में हीथ्रो एयरपोर्ट के पास स्थित है. ED की इंदौर सब जोनल ऑफिस ने 24 मार्च 2026 को यह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया. यह कार्रवाई निओ कॉर्परेशन इंटरनेशनल लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स और प्रमोटर्स के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है.

CBI ने दर्ज किए मामले ED ने जांच बढ़ाई आगे

दरअसल, ED ने यह जांच PMLA के तहत शुरू की थी, जो CBI द्वारा दर्ज दो अलग-अलग मामलों के आधार पर आगे बढ़ाई गई. पहला मामला पोली लॉजिक इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें कंपनी के डायरेक्टर उत्कर्ष त्रिवेदी और अन्य पर पंजाब नेशनल बैंक के साथ करीब 57.47 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है. वहीं दूसरा मामला निओ कॉर्परेशन इंटरनेशनल लिमिटेडसे जुड़ा है, जिसमें कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुमार त्रिवेदी और अन्य पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को करीब 249.97 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप है. दोनों मामलों को मिलाकर कुल घोटाला करीब 307.44 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है.

कई डमी कंपनियों से बिछाया जाल

ED की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कंपनियों के एक पूरे नेटवर्क का इस्तेमाल किया, जिसमें कई डमी यानी फर्जी कंपनियां शामिल थीं. ये कंपनियां कर्मचारियों और करीबी लोगों के नाम पर बनाई गई थीं. इनके जरिए पैसे को इधर-उधर घुमाया गया, लेयरिंग की गई और असली सोर्स को छुपाने की कोशिश की गई. इस पूरे खेल का मकसद था अवैध कमाई को वैध दिखाना और बैंक से निकाले गए पैसों को गायब करना.

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कैसे किया करोड़ों का घोटाला?

जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले की रकम को विदेशों में निवेश के नाम पर भेजा गया. यानी भारत से पैसा निकालकर विदेशी ठिकानों पर लगाया गया ताकि जांच एजेंसियों से बचा जा सके. इसी कड़ी में लंदन की यह प्रॉपर्टी भी सामने आई, जिसे अब ED ने जब्त कर लिया है.

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इससे पहले, 26 फरवरी 2026 को ED ने आरोपियों के घरों पर छापेमारी की थी. इस दौरान कई अहम डिजिटल डिवाइस और दस्तावेज बरामद किए गए थे, जिनसे इस पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलती जा रही हैं. फिलहाल ED इस मामले में आगे की जांच कर रही है और संभावना है कि आने वाले समय में और भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है.

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