बिहार में 2016 में लागू शराबबंदी राज्य की प्रमुख और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण नीति बनी हुई है. शराबबंदी से राज्य को सालाना लगभग चार से पांच हजार करोड़ रुपये के राजस्व में भारी कमी आई है. शराबबंदी लागू रखने में सरकार को हर साल एक से डेढ़ हजार करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च का सामना करना पड़ता है.