- भारत में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है और अब यह गांवों में भी गंभीर चिंता का विषय बन चुका है
- आर्थिक सर्वेक्षण में अनहेल्दी खान-पान और जंक फूड के बढ़ते चलन को मोटापे का मुख्य कारण बताया गया
- NFHS के आंकड़ों के हवाले से कहा गया कि देश में लगभग एक चौथाई महिला-पुरुष मोटापे की श्रेणी में आते हैं
भारत में मोटापा बहुत तेजी से खतरनाक ढंग से बढ़ रहा है और ये देश में लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) 2025-26 में भारत में बढ़ते मोटापे की समस्या को लेकर गंभीर चिंता जताई गई.
शहर ही नहीं, गांवों में भी बढ़ रहा मोटापा
इस चिंताजनक ट्रेंड के पीछे मुख्य कारण अनहेल्दी खान-पान, अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों में कमी और बदलती लाइफस्टाइल को बताया गया है. सर्वे में कहा गया है कि मोटापा अब सिर्फ शहरों में रहने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी ये तेजी से फैल रहा है. यह हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर रहा है. इसकी वजह से डायबिटीज, हृदय रोग और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है.
करीब एक-चौथाई महिला-पुरुष मोटापे के शिकार
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों का हवाला देते हुए आर्थिक सर्वे में बताया गया कि भारत में 24 फीसदी महिलाएं और 23 प्रतिशत पुरुष अब ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आते हैं. सबसे डरावने आंकड़े बच्चों से जुड़े हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में भारत में 3.3 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे का शिकार थे. 2035 तक इनकी संख्या बढ़कर 8.3 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
5 साल से छोटे बच्चों पर भी मंडरा रहा खतरा
बताया गया कि 15 से 49 साल की 6.4 फीसदी महिलाएं मोटापे की शिकार हैं. पुरुषों में देखें तो 4 फीसदी भारतीय पुरुष इस बीमारी की चपेट में हैं. 2015-16 में 5 साल से कम उम्र के 2.1 प्रतिशत बच्चे अधिक वजन की समस्या सके शिकार थे, जिनकी संख्या 2019-21 में बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई. ये आंकड़ा देश में मोटापे की बढ़ती बीमारी को लेकर बड़ा सवालिया निशान लगाता है.
जंक फूड की बढ़ती लत जिम्मेदार
देश में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते बाजार की तस्वीर भी आर्थिक सर्वेक्षण में पेश की गई है. कहा गया कि इस मामले में भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है. 2009 से 2023 के बीच इसमें 150 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. साल 2006 में जहां इन वस्तुओं का कारोबार महज 0.9 अरब डॉलर था, जो 2019 तक बढ़कर 38 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस अवधि में पुरुषों और महिलाओं में मोटापे की दर भी लगभग दोगुनी हो गई, जो सीधे तौर पर खान-पान में आए बदलाव की तरफ इशारा करती है.
सरकार ने क्या कदम उठाए?
सरकार ने इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं. रिपोर्ट में पोषण अभियान 2.0, फिट इंडिया मूवमेंट, खेलो इंडिया, ईट राइट इंडिया और 'आज से थोड़ा कम' जैसे जागरूकता अभियानों का जिक्र किया गया है. इन अभियानों का उद्देश्य स्वास्थ्य, पोषण और शारीरिक गतिविधियों को एक साथ जोड़कर एक स्वस्थ और मोटापा मुक्त भारत का निर्माण करना है.
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