बे सिर पैर की बात करते हैं... राहुल गांधी पर जमकर बरसे निशिकांत दुबे, जान लीजिए और क्या कुछ कहा

निशिकांत दुबे ने कई किताबों का जिक्र भी किया है. उन्होंने कहा राहुल गांधी उस किताब की बात कर रहे हैं जो छपी ही नहीं है. लेकिन वो उन किताबों का जिक्र नहीं करते जिन्हें भारत में बैन किया गया है.

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निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी को लेकर दिया बड़ा बयान
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  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने संसद को बंधक बना दिया है और कामकाज प्रभावित हो रहा है
  • निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के उस किताब के जिक्र को निराधार बताया जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है
  • उन्होंने बताया कि आर्मी एक्ट के तहत रक्षा मंत्रालय की अनुमति के बिना कोई किताब नहीं लिखी जा सकती है
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नई दिल्ली:

भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने संसद को बीते कुछ दिनों से बंधक सा बना लिया है. उनकी वजह से संसद में कोई भी काम नहीं हो पा रहा है. निशिकांत दुबे ने आगे कहा कि राहुल गांधी ने लोकसभा में ऐसी किताब का जिक्र किया है जो आज तक छपी ही नहीं है. उनकी बातें बे सिर पैर की हैं जिसका कोई मतबल नहीं है. BJP सांसद ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वो तो उस किताब का जिक्र कर रहे हैं जो अभी तक छपा ही नहीं लेकिन मैं ऐसी किताबें ले कर आया हूं जो छपी हैं लेकिन भारत में प्रतिबंधित है. 

निशिकांत दुबे ने इस दौरान कई किताबों का जिक्र भी किया है. इन किताबों में इंडिया इंडिपेंडेंट, एडवीना एंड नेहरू, द लाइफ ऑफ़ इंदिरा एंड नेहरू, नेहरू - ए पॉलिटिकल बायोग्राफ़ी, सीजफ़ायर, द हर्ट ऑफ़ इंडिया नेपाल जैसी शामिल हैं. कुछ और किताबें और भी हैं जिनका जिक्र किया जाना चाहिए. इनमें रेड साड़ी, बोफोर्स गेट, एक्सीडेंट्सल प्राइम मिनिस्टर , इमरजेंसी रिटोल्ड.

उन्होंने कहा कि आर्मी एक्ट के तहत किताब लिखने से पहले रक्षा मंत्रालय की इजाजत लेनी होती है.मनोज मुकुंद नरवणे ख़ुद कह चुके हैं कि एक इंच जमीन नहीं गई.छोटी सी बात को लेकर संसद को बंधक बनाया गया है. इसीलिए मैं चाह रहा हूं कि इन किताबों का भी जिक्र हो.

निशिकांत दुबे ने एक दिन पहले ही राहुल गांधी को लेकर एक सोशल मीडिया पोस्ट भी किया था. इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि राहुल गांधी अपने नाना नेहरु जी का तत्कालीन सेनाध्यक्ष जेनरल करियप्पा जी के बारे मे विचार पढ़ लीजिए . जेनरल थिमय्या का पत्र,फील्ड मार्शल मानेकशॉ का पत्र तथा मथाई जी की किताब बहुत ख़तरनाक है. राष्ट्रीय सुरक्षा का कुछ तो लिहाज़ करिए.

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