- अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सेला झील में दो केरल के पर्यटक डूब गए.
- जमी हुई झील की सतह पर चलने पर बर्फ टूट गई, जिससे दो युवक बर्फ के नीचे फंस गए. एक का शव मिल गया है.
- पुलिस, एसएसबी, SDRF और सेना की संयुक्त टीम ने बचाव अभियान शुरू किया है और दूसरे की तलाश की जा रही है.
Arunachal Pradesh Sela Lake Tragedy: अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां बेहद ऊंचाई पर स्थित एक जमी हुई सेला झील में दो केरल के पर्यटकों की डूबकर मौत हो गई. इनमें से एक का शव बरामद कर लिया गया है, वहीं दूसरे की तलाश की जा रही है. यह घटना शुक्रवार दोपहर की है, जब सात सदस्यों वाले पर्यटकों का एक समूह झील के पास घूमने के लिए पहुंचा था. यह झील समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और इस समय क्षेत्र में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है.
घटना के मुताबिक, केरल से अरुणाचल पहुंचे पर्यटकों में से एक सदस्य जब झील की जमी सतह पर आगे बढ़ा तो अचानक बर्फ टूटने लगी और वह पानी में गिरकर डूबने लगा. उसे बचाने के लिए उसके साथी दिनु (26) और महादेव (24) तुरंत झील में कूद पड़े. हालांकि, जिस पर्यटक को बचाया जा रहा था, वह किसी तरह सुरक्षित रूप से बाहर निकल आया. हालांकि बचाने के लिए पहुंचे दोनों युवक बर्फ की नाजुक परत के नीचे फंस गए और बाहर नहीं निकल सके.
कल रोकना पड़ा था बचाव अभियान
तवांग के पुलिस अधीक्षक डी डब्ल्यू थुंगोन के अनुसार, दोपहर करीब 3 बजे पुलिस को घटना की सूचना मिली. इसके बाद स्थानीय पुलिस, सशस्त्र सीमा बल (SSB) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की संयुक्त टीम ने तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया. बेहद ठंड, फिसलन और बर्फीली सतह के बावजूद बचावकर्मियों ने दिनु के शव को बरामद कर लिया, लेकिन खराब मौसम और अंधेरा होने के कारण महादेव की तलाश को रोकना पड़ा.
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सुबह 8 बजे से जारी है तलाश
एसडीआरएफ बोमडिला, सेना, एसएसबी, आईटीबीपी और पुलिस का संयुक्त तलाशी अभियान शनिवार सुबह 8 बजे से फिर से शुरू किया गया. एसडीआरएफ और सेना के 4 गोताखोरों को तैनात किया गया है. हालांकि पानी के नीचे कम दृश्यता के कारण गोताखोर अभी तक महादेव का पता नहीं लगा सके हैं. वहीं दिनु के शव को कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में पोस्टमॉर्टम के लिए रखा गया है.
कई बार सुरक्षा की अनदेखी पड़ती है भारी
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सेला झील और आसपास के इलाकों में कई चेतावनी बोर्ड लगे हैं, जिनमें जमी हुई झील की सतह पर जाने को स्पष्ट रूप से मना किया गया है. इसके बावजूद पर्यटक अक्सर सुरक्षा निर्देशों की अनदेखी कर देते हैं. प्रशासन ने 17 दिसंबर को विशेष पर्यटक परामर्श जारी कर चेतावनी दी थी कि झील की बर्फ अस्थिर होती है और वजन नहीं झेल पाती है.
सिला झील सालभर पर्यटकों को आकर्षित करती है, लेकिन सर्दियों में इसका खतरा कई गुना बढ़ जाता है. अचानक टूटती बर्फ यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है. इस घटना ने एक बार फिर ऐसे इलाकों में सुरक्षा सावधानियों के महत्व को उजागर किया है.














