दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग किसी न किसी मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम के साथ अपना जीवन जी रहे हैं, लेकिन इनमें से बहुत से लोगों को अक्सर सही इलाज नहीं मिल पाता है. इसके मद्देनजर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने देशों की सरकारों और संगठनों को साइकोलॉजिकल सेल्फ हेल्प यानी मनोवैज्ञानिक स्व-सहायता (self-help) उपायों में समर्थन देने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि अधिक संख्या में लोगों को एविडेंस बेस्ड मेंटल हेल्थ एसिस्टेंस मिल सके. इसके पीछे डब्ल्यूएचओ का लक्ष्य दुनिया भर में लोगों की मानसिक स्थिति सुधारना है.
WHO की गाइड में ऐसे कार्यक्रमों को तैयार करने, स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढालने और लागू करने के आसान तौर-तरीके़ बताए गए हैं, जिन्हें प्रशिक्षित गै़र-विशेषज्ञों की मदद से या उनके बिना भी चलाया जा सकता है. यूएन हेल्थ एजेंसी के अनुसार, साइकोलॉजिकल सेल्फ हेल्प प्रोग्राम मेंटल हेल्थ केयर सर्विस की कमी को दूर करने का एक अहम तरीका है. इस प्रोग्राम में कुछ ऐसी तकनीकें इस्तेमाल की गई हैं, जिसमें लोग खुद भी ट्राई कर सकते हैं, इसके लिए किसी ट्रेनर की जरूरत नहीं होगी.
क्या है नई तकनीकें
WHO की नई गाइड में दो ऐसे मेंटल हेल्थ प्रोग्राम्स के बारे में बताया गया है जिन्हें पहले ही कई देशों में परीक्षण किया जा चुका है और वहां लोगों पर इसका असर दिखा है. इनके तहत, लोगों को 5 सप्ताहों तक हर हफ्ते लगभग 15 मिनट का सपोर्ट प्रोग्राम मुहैया कराया जाता है. इनमें एक है ‘स्टेप बाय स्टेप' टूल है, जो ऐसे वयस्कों के लिए है, जो डिप्रेशन से जूझ रहे है.
दूसरा उपाय तनाव में कमी लाने के लिए ऐसे प्रैक्टिकल तौर-तरीकों को अपनाना है, जिन्हें अकेले या फिर ऑडियो एक्सरसाइज के जरिए भी किया जा सकता है.
इन देशों में पहले से जारी हैं ये सेवाएं
इनका इस्तेमाल पहले से लेबनान और थाईलैंड की स्वास्थ्य सेवाओं में किया जा रहा है, जिससे यह साबित होता है कि कम संसाधनों में भी इन्हें बड़े स्तर पर लोगों तक इस प्रोग्राम को पहुंचाया जा सकता है. यह नई गाइड WHO के उन प्रयासों का हिस्सा है जिनका लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को आसानी से मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध कराना है.
कैसे फायदा पहुंचा रहा ये प्रोग्राम?
साक्ष्य बताते हैं कि ये तरीके, डिप्रेशन और एंजाइटी के मामलों में विशेष रूप से असरदार हैं और इन्हें पहले ही WHO के कई गाइडलाइंस में मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियों के लिए सुझाया जा चुका है.
यह नई गाइड WHO और साझीदार संगठनों की तरफ से कई देशों में किए गए अनुभवों और काम पर आधारित है.
इनकी विशेषता यह है कि ये कम संसाधनों में और संकट से प्रभावित क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं.
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