Are Recurring Leg Cramps Normal: पैरों में बार-बार होने वाली ऐंठन को मामूली समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. दिमित्री यारानोव के मुताबिक यह सिर्फ थकान या पानी की कमी नहीं है बल्कि शरीर का एक बड़ा इशारा है. अक्सर लोग इसे धूप में ज्यादा घूमने या काम की थकान समझ लेते है लेकिन असल में यह दिल और खून की धमनियों से जुड़ी बीमारी हो सकती है. अगर चलने पर पैरों में दर्द या ऐंठन होती है और आराम करने पर ठीक हो जाती है तो यह पेरिफेरल आर्टरी डिजीज का संकेत हो सकता है. इसका मतलब है कि पैरों तक खून पहुंचाने वाली नलियां ब्लॉक हो रही है.
अगर इसे समय पर नहीं दिखाया गया तो यह पैरों के लिए खतरनाक हो सकता है. इसके अलावा वेंस में खराबी की वजह से भी पैरों में भारी-पन और रात में ऐंठन होती है. इसलिए अपने पैरों की बात सुनना बहुत जरूरी है.
पैरों में ऐंठन होने की कई और वजह भी हो सकती है जो हमारे खान-पान और लाइफस्टाइल से जुड़ी है. जब शरीर में मैग्नीशियम, पोटेशियम या कैल्शियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है तो मांसपेशियां ठीक से काम नहीं करती और उनमें खिंचाव होने लगता है. डॉ. यारानोव के मुताबिक थायराइड की समस्या, एनीमिया यानी खून की कमी और विटामिन डी की कमी से भी पैरों में जल्दी थकान और ऐंठन होने लगती है.
कई बार कुछ नई मेडिसिन या दवाइयां शुरू करने के बाद भी यह समस्या हो सकती है. अगर आप बहुत ज्यादा वर्कआउट करते है या ठीक से नींद नहीं लेते तो भी पैरों की मांसपेशियां बगावत कर सकती है. शरीर की केमिस्ट्री बिगड़ने पर मांसपेशियां मिसफायर करती है जिससे दर्द होता है. इसलिए ऐंठन के पैटर्न और वक्त पर ध्यान देना चाहिए ताकि सही वजह पता चल सके.
हर बार पैरों की ऐंठन खतरनाक नहीं होती लेकिन फर्क समझना बहुत जरूरी है. डॉ. जगदीश चट्टनल्ली के मुताबिक अगर ऐंठन कभी-कभी भारी काम, पानी की कमी या देर तक बैठने के बाद होती है तो यह आम बात है. यह दर्द थोड़ी देर में अपने आप ठीक हो जाता है और इससे कोई कमजोरी नहीं आती. लेकिन अगर ऐंठन बार-बार हो रही है खास कर आराम करते वक्त या सोते समय तो यह चिंता का विषय है.
अगर दर्द के साथ पैरों में सुन्न-पन, झनझनाहट, मांसपेशियों में कमजोरी या पैरों का पतला होना दिखे तो यह नसों या नर्व की समस्या हो सकती है. नसों से जुड़ी ऐंठन में दर्द पैरों से ऊपर की तरफ जाता है जबकि सर्कुलेशन से जुड़ी ऐंठन चलने पर बढ़ती है. ऐसे संकेतों को रूटीन समझकर टालना नहीं चाहिए.
सवाल यह है कि डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए. अगर आपको हफ्ते में कई बार ऐंठन होती है, नींद खराब होती है या यह समस्या कई हफ्तों से चल रही है तो तुरंत चेकअप करवाएं. बुजुर्ग लोग और डायबिटीज, थायराइड या किडनी के मरीजों को इसमें बिल्कुल देरी नहीं करनी चाहिए. डॉक्टर शुरुआत में इलेक्ट्रोलाइट लेवल, शुगर, किडनी और थायराइड की जांच के लिए ब्लड टेस्ट करवाते है.
अगर नसों की दिक्कत लगती है तो नर्व कंडक्शन स्टडी या ईएमजी की सलाह दी जाती है. वही खून के बहाव की जांच के लिए डॉप्लर स्टडी या वैस्कुलर इमेजिंग की जाती है. समय पर टेस्ट करवाने से किसी बड़ी कॉम्प्लिकेशन यानी जटिलता से बचा जा सकता है. पैरों में सूजन या रंग बदलना भी खतरे की निशानी है जिसे तुरंत दिखाना चाहिए.
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)














