सूरत रेलवे स्टेशन पर भगदड़-लाठीचार्ज का मामला, प्रवासी नेता बोले- 15 लाख प्रवासियों के लिए सिर्फ 2–3 ट्रेनें

सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर भगदड़ और लाठीचार्ज की घटना ने रेलवे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रवासी नेताओं का कहना है कि 15 लाख से अधिक प्रवासियों के लिए सिर्फ 2–3 ट्रेनें नाकाफी हैं. ट्रेनों की कमी और अव्यवस्थित सूचना के कारण हालात बेकाबू हो गए.

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Surat Railway Station Chaos Incident: सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर रविवार को जो कुछ हुआ, उसने रेलवे व्यवस्था और प्रशासन की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. घर लौटने की उम्मीद में स्टेशन पहुंचे हजारों प्रवासी श्रमिकों की भीड़ अचानक बेकाबू हो गई. हालात ऐसे बने कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और लाठीचार्ज तक की नौबत आ गई. यह घटना सिर्फ अव्यवस्था की नहीं, बल्कि उस पीड़ा की भी है, जो लंबे समय से पर्याप्त साधनों के अभाव में प्रवासी मजदूर झेलते आ रहे हैं.

स्टेशन पर अचानक उमड़ी भारी भीड़

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उधना रेलवे स्टेशन पर अचानक बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए थे. सभी अपने घर जाने की कोशिश में थे. ट्रेनें सीमित थीं और सही तरीके से सूचना नहीं दी गई थी. इसी भ्रम और जल्दबाजी के कारण लोग प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा होते चले गए और देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई.

पुलिस को उठाना पड़ा सख्त कदम

जब हालात बिगड़ने लगे तो पुलिस को मौके पर उतरना पड़ा. भीड़ को काबू में करने की कोशिश के दौरान लाठीचार्ज की घटना भी सामने आई. इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया. कई प्रवासी श्रमिकों का कहना है कि वे सिर्फ अपने घर जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें अव्यवस्था और सख्ती का सामना करना पड़ा.

प्रवासी नेता ने रेलवे पर लगाए गंभीर आरोप

इस पूरे मामले को लेकर बिहार विकास परिषद के धर्मेश कुमार सिंह ने रेलवे प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि सूरत से उत्तर भारत के लिए रोजाना केवल दो नियमित ट्रेनें चलती हैं. एक स्पेशल ट्रेन जरूर है, लेकिन वह भी तय समय पर नहीं चलती. जब अचानक स्पेशल ट्रेन की खबर फैलती है, तो हजारों लोग एक साथ स्टेशन पहुंच जाते हैं और भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है.

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15 लाख प्रवासियों के लिए सिर्फ 2–3 ट्रेनें

उन्होंने आंकड़े रखते हुए बताया कि सूरत और आसपास के इलाकों में उत्तर प्रदेश और बिहार के करीब 15 लाख लोग रहते हैं, जिनमें लगभग 12 लाख श्रमिक और मजदूर हैं. इतनी बड़ी आबादी के लिए रोजाना सिर्फ 2 से 3 ट्रेनों की व्यवस्था होना नाकाफी है. उन्होंने रेलवे मंत्री से मांग की कि यूपी और बिहार के लिए कम से कम 5 से 6 ट्रेनें प्रतिदिन चलाई जाएं.

10 साल पुरानी मांग, अब तक समाधान नहीं 

धर्मेश कुमार सिंह ने बताया कि उधना–दानापुर ट्रेन को प्रतिदिन चलाने की मांग पिछले 10 वर्षों से की जा रही है. उन्होंने याद दिलाया कि तत्कालीन रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने कभी इस ट्रेन को रोजाना चलाने और जयनगर तक बढ़ाने का आश्वासन दिया था. लेकिन एक दशक बीत जाने के बाद भी यह वादा पूरा नहीं हुआ. उनका कहना है कि इस मांग को लेकर हर महीने रेलवे मंत्रालय को पत्र भेजे गए, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.

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लाठीचार्ज को बताया अमानवीय

धर्मेश कुमार सिंह ने श्रमिकों पर लाठीचार्ज की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा कि ये प्रवासी मजदूर अपने घर‑परिवार से दूर रहकर सूरत के उद्योगों को चलाते हैं और शहर की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाते हैं. ऐसे लोगों के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी तरह गलत है और यह प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है.

भविष्य में हादसे रोकने की मांग

प्रवासी नेताओं का कहना है कि अगर समय रहते ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई और व्यवस्था नहीं सुधारी गई, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं. उनका जोर इस बात पर है कि समाधान केवल लाठी और सख्ती नहीं, बल्कि सही प्लानिंग और पर्याप्त सुविधाएं हैं, ताकि प्रवासी श्रमिक सुरक्षित और सम्मान के साथ अपने घर लौट सकें.

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