Kylian Mbappé's inspirational story: इंग्लैंड और भारत के लिए एजबस्टन में खेले जा रहे वनडे मुकाबले के बीच आज रात खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup 2026) में करोड़ों फुटबॉलप्रेमियों की नजरें डलास के स्टेडियम में भारतीय समय के हिसाब से 12:30 बजे फ्रांस और स्पेन के बीच खेले जाने वाले मुकाबले पर टिकी होंगी. और इसमें भी सबसे ज्यादा नजरें तलाश रही होंगी उस खिलाड़ी को, जिसने करीब 5 साल पहले बहुत बड़ा खलनायक बना दिया गया था. दुनिया ने उसे न जाने क्या-क्या कहा. और इसके बाद कायले एम्बाप्पे ने फ्रांस टीम को छोड़ने का मन लगभग बना लिया था. लेकिन यही एम्बाप्पे खेले जा रहे मेगा टूर्नामेंट के सबसे बड़े स्टार है. वह मेस्सी के साथ गोल्डन बूट जीतने के प्रबल दावेदार हैं, लेकिन समय की सुई कुछ साल पहले साल 2021 की ओर लेकर चलते हैं, जब एम्बाप्पे दुनिया में एकदम अंधेरा छा गया. और वजह बनी एक पेनल्टी की चूक.
पेनल्टी चूक और भयावह नफरत
यह साल 2020 का यूरो कप था. और इसका फाइनल मुकाबला 2021 में खेला गया. और इस फाइनल के पल आज भी एम्बाप्पे के सीने में किसी घाव से बसे हुए हैं. फ्रांस यूरो 2020 का प्रबल दावेदार था. स्विट्जरलैंड के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल 3-3 से बराबर होकर पेनल्टी शूटआउट में जा पहुंचा. एम्बाप्पेटीम के सबसे बड़े सितारे थे. वह 5वीं और निर्णायक पेनल्टी लेने आए
मानो समय ठहर गया
एम्बाप्पे पेनल्टी स्पॉट की ओर बढ़ रहे थे और पूरा स्टेडियम और दुनिया भर के करोड़ों प्रशंसक सांसें थामे हुए थे. एम्बाप्पे पर न केवल मैच जीतने का, बल्कि फ्रांस की पूरी उम्मीदों का बोझ था. एम्बाप्पे की शॉट की दिशा गोलकीपर यान सोमर ने भांप ली थी पेनल्टी रुकते ही एम्बाप्पे के चेहरे पर जो भाव थे, वे किसी हार के नहीं, बल्कि एक 'शून्य' के थे. वह क्षण उनके लिए ऐसा था जैसे वे पूरी दुनिया से कट गए हों. फ़्रांस टूर्नामेंट से बाहर हो गया. स्टेडियम में सन्नाटा था, लेकिन एम्बाप्पे के अंदर एक तूफान चल रहा था. और तूफान पूरे फ्रांस, उसके फैंस और तमाम लोगों के बीच था, जो एम्बाप्पे के लिए नफरत में तब्दील हो गया.
सोशल मीडिया पर नफरत ने की हदें पार
पेनल्टी मिस करने के बाद, एम्बाप्पे को सोशल मीडिया पर जिस स्तर की नफरत और नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा, वह अकल्पनीय था. लोगों ने उन्हें 'अहंकारी' और 'टीम का दुश्मन' तक करार दिया. उन्हें अपमानजनक टिप्पणियों और नस्लभेदी गालियों का निशाना बनाया गया. उस दौरान एम्बाप्पे ने खुद को पूरी तरह से बंद कर लिया था. यहां उन्हें एहसास हुआ कि फ़ुटबॉल की दुनिया कितनी बेरहम हो सकती है. एक पल में आप हीरो होते हैं और अगले ही पल आप सबसे बड़े 'अपराधी' बन जाते हैं.
टीम छोड़ने' का गंभीर विचार
पेनल्टी चूकने की बेरुखी एम्बाप्पे ने फ्रांस फुटबॉल के चेयरमैन तक से महसूस की. एम्बाप्पे ने बाद में फ्रेंच फुटबॉल फेडरेशन (FFF) के अध्यक्ष नोल ले ग्रेट के साथ अपने मतभेदों का खुलासा किया था. इस स्टार ने कहा कि उन्हें फेडरेशन की तरफ से उस नस्लवादी हमले के खिलाफ पर्याप्त समर्थन नहीं मिला. उन्हें ऐसा लगा कि फ़्रांस के लिए उनकी कड़ी मेहनत और बलिदान को लोग भूल गए हैं.
इसके बाद एम्बाप्पे इस मनोदशा में पहुंच गए कि उन्हें यह तक सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि उन्हें फ्रांस के लिए खेलना जारी रखना चाहिए या नहीं. यह उनके करियर का न्यूनमत प्वाइंट था. एम्बाप्पे ने महसूस किया कि वे एक ऐसे सिस्टम के लिए खेल रहे हैं जो उन्हें तब ढाल नहीं बनाता जब उन्हें इसकी सबसे ज्यादा ज़रूरत होती है. बहरहाल, अगले साल ही एम्बाप्पे ने एक साल पहले हुई पेनल्टी चूक का आलोचकों को करारा जवाब दिया
पेनल्टी बनाम 'करारा जवाब'
यूरो कप में पेनल्टी चूकने के बाद अगले ही साल विश्व कप आया, तो एम्बाप्पे ने अर्जेंटीना के खिलाफ फाइनल में तीन पेनल्टी लीं. और उन्होंने इन तीनों ही पेनल्टियों को गोल में तब्दील कर जोरदार वापसी करते और जवाब देकर आलोचकों को शांत कर दिया. यह उनकी उसी यूरो 2020 की नाकामी का सबसे बड़ा 'जवाब' था. उन्होंने दिखाया कि वे पेनल्टी लेने से नहीं डरते, बल्कि उन्होंने उससे सीखा है. एम्बाप्पे ने बाद में स्वीकार किया कि यूरो 2020 की वह पेनल्टी मिस ही वह 'ईंधन' थी जिसने उन्हें 2022 वर्ल्ड कप में और अधिक आक्रामक और सटीक बनाया.