भोजन और स्वास्थ्य: कैसे बार-बार की आदतें हमारे शरीर को करती हैं प्रभावित

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि सिर्फ एक बार ज्यादा फैट या ज्यादा चीनी वाला भोजन खाने से कुछ ही घंटों में सूजन संबंधी जीन सक्रिय हो जाते हैं और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है, चाहे व्यक्ति कितना भी स्वस्थ क्यों न हो.

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खाने पर टिकी है हमारी सेहत, समझें पूरा गणित.

सेहत दशकों में नहीं, बल्कि हर खाने के साथ बनती और बिगड़ती है. ज्यादातर लोग मानते हैं कि स्वास्थ्य लंबे समय में बनता है, लेकिन जीव विज्ञान (बायोलॉजी) इससे सहमत नहीं है. बार-बार की आदतें ही सेहत बनाती हैं. खाना शरीर को सिग्नल देता है.  सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा के अनुसार, खाना खाने के कुछ मिनटों से घंटों के अंदर ही शरीर में बड़े बदलाव आ जाते हैं. खाना पूरे शरीर को झट से प्रभावित करता है. भोजन इंसुलिन और कोर्टिसोल जैसे हार्मोन्स की सिग्नलिंग को प्रभावित करता है, सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को बदलता है, सूजन से जुड़े जीनों की अभिव्यक्ति को सक्रिय करता है, और खाने के बाद इम्यून सेल्स के व्यवहार को भी प्रभावित करता है.

कई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि सिर्फ एक बार ज्यादा फैट या ज्यादा चीनी वाला भोजन खाने से कुछ ही घंटों में सूजन संबंधी जीन सक्रिय हो जाते हैं और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है, चाहे व्यक्ति कितना भी स्वस्थ क्यों न हो. हालांकि, एक बार का खाना आपको पूरी तरह परिभाषित नहीं करता, बल्कि बार-बार दोहराई जाने वाली आदतें ऐसा करती हैं. शरीर उसी पैटर्न के अनुसार खुद को ढाल लेता है जो वह लगातार अनुभव करता है, इसलिए पोषण में पूर्णता की जरूरत नहीं है, बल्कि सही और लगातार पैटर्न की जरूरत है.

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एक्सपर्ट के अनुसार, भोजन केवल पेट भरने की चीज नहीं, बल्कि शरीर को दी जाने वाली जानकारी और निर्देश है. यह रोजाना भेजे जाने वाले सिग्नल की तरह काम करता है. अगर इन सिग्नलों को लगातार सकारात्मक और स्वस्थ रखते हैं तो शरीर की बायोलॉजी भी उसी के अनुरूप बदल जाएगी. एक्सपर्ट संतुलित आहार को दिनचर्या में शामिल करने की सलाह देते हैं.

न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, रोजाना अपनी थाली में विविधता रखें. अनाज जैसे ब्राउन राइस, साबुत गेहूं की रोटी, ओट्स या बाजरा शामिल करें, जो कार्बोहाइड्रेट और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं. प्रोटीन के लिए दालें, छोले, राजमा, पनीर, अंडे, चिकन, मछली या सोया उत्पाद लें. ये मांसपेशियों के विकास और मरम्मत में मदद करते हैं.

हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और मेथी के साथ रंग-बिरंगी सब्जियां (गाजर, टमाटर, शिमला मिर्च) खाएं, जो विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होती हैं. मौसमी फल जैसे सेब, केला, संतरा या अमरूद रोज लें. ये प्राकृतिक मिठास और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं. डेयरी उत्पादों में दूध, दही या छाछ शामिल करें, जो कैल्शियम और प्रोटीन प्रदान करते हैं. स्वस्थ वसा के लिए मुट्ठी भर नट्स, बादाम, अखरोट या सीमित घी-तेल का उपयोग करें. दिन भर खूब पानी पिएं, नमक और चीनी की मात्रा कम रखें.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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