इस साल दिवाली रविवार यानी 8 नवंबर को मनाई जाएगी. इससे एक दिन पहले यानी आज छोटी दिवाली है. इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है. ये पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है. इसे काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है. चतुर्दशी तिथि 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर शुरू हो चुकी है और 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी. छोटी दिवाली के दिन शाम को दीपक जलाए जाते हैं. चलिए आपको बताते हैं छोटी दिवाली पर कितने दीये जलाए जाते हैं और पूजा करने का सही समय क्या है?
छोटी दिवाली पर दीये कब जलाएं
आज छोटी दिवाली है और शाम को दीपक जलाए जाते हैं. छोटी दिवाली पर दीये जलाने का शुभ समय 7 नवंबर 2026 की शाम 5.32 से शुरू होकर रात 8.09 बजे तक रहेगा.
छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली के दिन 14 दीये जलाने चाहिए. मान्यता है कि इस दिन 14 दीये जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. इस दिन घर के अलग-अलग कोनों, रसोई, नल के पास, बालकनी या छत पर दीये रखे जाते हैं. हालांकि, कई जगहों पर अपनी पारिवारिक परंपरा या श्रद्धा के अनुसार 1, 4, 11 या अपनी क्षमता के अनुसार भी दीये जलाए जाते हैं.
नरक चतुर्दशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण अपनी पत्नियों के साथ द्वारिका में रहते थे. एक दिन देवराज इंद्र भगवान कृष्ण के पास आए और कहा कि हे कृष्ण दैत्यराज भौमासुर के अत्याचार की वजह से देवतागण त्राहि त्राहि कर रहे हैं. भौमासुर को ही नरकासुर कहा जाता है. क्रूर भौमासुर ने वरुण का छत्र, अदिति के कुंडल और देवताओं से मणि छीन ली है और वो तीनों लोकों का राजा बन गया है. भौमासुर ने पृथ्वी के कई राजाओं और आमजन की कन्याओं का भी हरण कर लिया है और उनको बंदीगृह में डाल दिया है, कृपया करके इन तीनों लोकों को उस क्रूर राक्षस से बचाइए.
देवराज इंद्र की बात सुनकर भगवान कृष्ण अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ गरूड़ पर सवार होकर प्रागज्योतषपुर पहुंचे, जहां क्रूर भौमासुर रहता था. भगवान कृष्ण ने पहले अपनी पत्नी की मदद से मुर नामक दैत्य के साथ उसके 6 पुत्रों का वध कर दिया. मुर दैत्य का वध हो जाने का समाचार सुनकर भौमासुर अपनी सेना के साथ युद्ध के लिए निकला. भौमासुर को शाप था कि वो स्त्री के हाथों मारा जाएगा. इसलिए भगवान कृष्ण ने पत्नी सत्यभामा को सारथी बनाया और युद्ध के अंत में सत्यभामा की मदद से भौमासुर का अंत कर दिया. इसके बाद भौमासुर के पुत्र भगदत्त को अभय का वरदान देकर प्रागज्योतिष का राजा बना दिया.
भगवान कृष्ण ने जिस दिन भौमासुर का वध किया था, उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी इसलिए इस तिथि को नरक चतुर्दशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण ने ना सिर्फ नरकासुर का वध किया बल्कि उसकी कैद से लगभग 16 हजार महिलाओं को मुक्त भी करवाया था. इसी खुशी के कारण उस दिन दीपक जलाए गए और चारों तरफ दीपदान भी किया गया. नरकासुर की मृत्यु के बाद भगवान श्रीकृष्ण के शरीर पर पड़े रक्त के छींट को साफ करने के लिए उन्होंने स्वयं तेल से स्नान किया था. यही वजह है कि तब ये इस हमेशा से शरीर पर तेल लगाकर स्नान करते हैं और उबटन भी लगाते हैं.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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