सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती की जिंदगी जैसे पूरी तरह बदल गई थी. एक तरफ जांच, गिरफ्तारी और जेल का दौर आया, तो दूसरी तरफ मीडिया ट्रायल और लोगों के सवालों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं. अब इस मामले में CBI से क्लीन चिट मिलने के बाद रिया खुलकर अपने उस दौर के बारे में बात कर रही हैं. उन्होंने बताया कि जेल में बिताया वक्त जितना मुश्किल था. उससे कहीं ज्यादा चुभने वाला एक्सपीरियंस जेल से बाहर आने के बाद हुआ. यहां तक कि इंडस्ट्री के लोगों का बदला रवैया भी उन्हें काफी परेशान करता था.
जेल में सब बराबर
रिया चक्रवर्ती ने मुंबई की बायकुला जेल में करीब एक महीना अंडरट्रायल कैदी के तौर पर बिताया था. सितंबर 2020 में NCB ने उन्हें गिरफ्तार किया था और अक्टूबर में बॉम्बे हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी. अब रिया ने बताया कि जेल की जिंदगी को लेकर लोगों की जो धारणा है, उनका एक्सपीरियंस उससे थोड़ा अलग रहा. ‘तनमय रिएक्ट्स' शो में रिया ने कहा कि उन्हें लगता है कि जेल के अंदर के लोग बाहर के लोगों से बेहतर होते हैं.
उनके मुताबिक अंडरट्रायल जेल में रहने वाली ज्यादातर महिलाएं खुद को निर्दोष मानती थीं और वहां किसी के बीच ऊंच-नीच नहीं थी. सभी बराबर थे. किसी का नाम नहीं बल्कि एक नंबर था. रिया ने ये भी बताया कि जेल में महिलाएं गाने, डांस करने और खाना बनाने जैसे कामों में अपना समय बिताती थीं. उन्होंने मजाकिया अंदाज में यहां तक कहा कि अगर कभी जेल के एक्सपीरियंस पर किताब लिखी, तो उसका नाम ‘चुड़ैल का बदला' हो सकता है.
बाहर बदला लोगों का रवैया
रिया के मुताबिक, असली अजीब अनुभव जेल से बाहर आने के बाद हुआ. उन्होंने बताया कि जब वो इंडस्ट्री के लोगों के बीच जाती थीं. तब कई लोगों का बिहेवियर अचानक बदल जाता था. जिस कमरे में लोग हंस-बोल रहे होते, उनके पहुंचते ही माहौल टेंस हो जाता. रिया ने बताया कि लोग अचानक कहते, ओह, हाय रिया… कैसी हो? जैसे कुछ सेकंड पहले तक वहां हो रही मस्ती से उनका कोई लेना-देना ही न हो. CBI से क्लीन चिट मिलने के बाद रिया को पासपोर्ट भी वापस मिल गया. उन्होंने बताया कि विदेश जाते वक्त इमिग्रेशन पर उन्हें रोका तक नहीं गया.
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