आज के दौर में किसी फिल्म का कुछ हफ्तों तक सिनेमाघरों में टिके रहना बड़ी बात मानी जाती है. सोशल मीडिया के जमाने में हर शुक्रवार नई फिल्म आती है और कुछ ही दिनों में लोगों का ध्यान दूसरी फिल्मों की तरफ चला जाता है. लेकिन हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में एक ऐसी फिल्म आई थी, जिसने दर्शकों को इस कदर दीवाना बना दिया कि लोग महीनों नहीं, बल्कि सालों तक उसे देखने थिएटर पहुंचते रहे. इस फिल्म ने सफलता का ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो 61 साल बाद भी कायम है. दिलचस्प बात ये है कि उस दौर की कई बड़ी फिल्मों के रिकॉर्ड टूट गए, लेकिन इस फिल्म की उपलब्धि आज भी लोगों को हैरान कर देती है.
आखिर कौन सी थी वो फिल्म
अगर आप अब तक सोच रहे हैं कि आखिर वो कौन सी फिल्म थी जिसने 61 साल पहले ऐसा इतिहास रच दिया था, तो इसका जवाब है 'आरजू'. साल 1965 में रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाया, बल्कि ऐसा रिकॉर्ड भी बना दिया जिसे आज तक कोई फिल्म नहीं तोड़ सकी. राजेंद्र कुमार की इस सुपरहिट फिल्म ने उन्हें स्टारडम की नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया और हिंदी सिनेमा के इतिहास में अपना नाम हमेशा के लिए दर्ज करा लिया.
525 दिनों तक सिनेमाघरों में चला था जादू

आज जब फिल्में कुछ हफ्तों में ओटीटी पर पहुंच जाती हैं, तब 'आरजू' की सफलता और भी खास लगती है. आईएमडीबी की रिपोर्ट के मुताबिक, ये फिल्म करीब 75 हफ्तों यानी 525 दिनों तक सिनेमाघरों में चलती रही थी. उस दौर में दर्शकों का उत्साह ऐसा था कि थिएटरों के बाहर टिकट के लिए लंबी कतारें लगती थीं. इसी शानदार प्रदर्शन की वजह से फिल्म को प्लेटिनम जुबली का दर्जा मिला.
राजेंद्र कुमार के करियर की सबसे बड़ी हिट्स में शामिल
1960 का दशक राजेंद्र कुमार के लिए बेहद शानदार रहा था. उनकी कई फिल्में सुपरहिट साबित हुई थीं, लेकिन 'आरजू' ने जो मुकाम हासिल किया, वो सबसे अलग था. फिल्म की सफलता ने उन्हें उस दौर के सबसे भरोसेमंद सितारों में शामिल कर दिया. दर्शक सिर्फ उनका नाम देखकर ही टिकट खरीद लिया करते थे.
दमदार स्टारकास्ट ने जीता दिल

फिल्म में राजेंद्र कुमार के साथ साधना शिवदासानी मुख्य भूमिका में थीं. दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया. इसके अलावा फिरोज खान, नाजिमा और नाजिर हुसैन जैसे कलाकारों ने भी अपनी शानदार अदाकारी से फिल्म को और मजबूत बनाया. कहानी के साथ कलाकारों की परफॉर्मेंस ने दर्शकों को आखिर तक बांधे रखा.
गाने भी बन गए थे सुपरहिट
'आरजू' की सफलता के पीछे इसके गानों का भी बड़ा योगदान था. 'बेदर्दी बालमा' और 'ऐ फूलों की रानी' जैसे गीत उस समय हर किसी की जुबान पर थे. रेडियो से लेकर शादी-ब्याह और महफिलों तक ये गाने खूब सुनाई देते थे. आज भी पुराने संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट में ये गानें शामिल रहते हैं.
61 साल बाद भी कायम है रिकॉर्ड

समय के साथ सिनेमा का अंदाज बदल गया, तकनीक बदल गई और दर्शकों की पसंद भी बदलती रही. लेकिन 'आरजू' का 525 दिनों तक सिनेमाघरों में चलने का रिकॉर्ड आज भी बरकरार है. यही वजह है कि इस फिल्म का नाम हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार और सफल फिल्मों में लिया जाता है.
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