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Higher education के लिए 2026 में भी भारतीय छात्रों की पहली पसंद क्यों है कनाडा? ये 5 बड़ी वजहें जान हो जाएंगे हैरान

2024 में ही 4,27,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों ने कनाडा में एडमिशन लिया. कनाडा की कई यूनिवर्सिटीज की डिग्री दुनिया भर में वैल्यू रखती है, जिससे स्टूडेंट्स के लिए इंटरनेशनल करियर के रास्ते खुलते हैं. यही वजह है कि कनाडा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता, आगे की लाइफ प्लानिंग में भी फिट बैठता है.

Higher education के लिए 2026 में भी भारतीय छात्रों की पहली पसंद क्यों है कनाडा? ये 5 बड़ी वजहें जान हो जाएंगे हैरान
कनाडा को खास बनाता है उसका Post Graduation Work Permit यानी PGWP प्रोग्राम.

विदेशों में हायर एज्युकेशन पाना कई युवाओं का सपना होता है. फॉरेन यूनिवर्सिटीज में पढ़ने की इच्छा रखने वाले युवाओं के सामने वैसे तो कई ऑप्शन होते हैं. इन्हीं ऑप्शन्स में से कनाडा अक्सर एक अहम और स्वाभाविक विकल्प होता है. 2026 में भी भारतीय छात्रों के बीच कनाडा की डिमांड कम नहीं हुई है. वजह न सिर्फ अच्छी पढ़ाई, बल्कि पढ़ाई के साथ और उसके बाद मिलने वाले मौके हैं, जो बहुत कम देशों में देखने को मिलते हैं.

हर साल हजारों भारतीय छात्र कनाडा की यूनिवर्सिटीज का रुख करते हैं. 2024 में ही 4,27,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों ने कनाडा में एडमिशन लिया. कनाडा की कई यूनिवर्सिटीज की डिग्री दुनिया भर में वैल्यू रखती है, जिससे स्टूडेंट्स के लिए इंटरनेशनल करियर के रास्ते खुलते हैं. यही वजह है कि कनाडा सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रहता, आगे की लाइफ प्लानिंग में भी फिट बैठता है.

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एडमिशन प्रोसेस में ज्यादा फ्लैसिबिलिटी

अब कनाडा की यूनिवर्सिटीज इंटरनेशनल छात्रों की जरूरतों को पहले से बेहतर समझ रही हैं. एडमिशन प्रोसेस को ज्यादा फ्लैसिबल बनाया गया है. इंग्लिश प्रोफिशिएंसी के लिए Duolingo English Test जैसे मॉडर्न टेस्ट को भी स्वीकार किया जा रहा है.

कनाडा की U15 ग्रुप से जुड़ी कई यूनिवर्सिटीज अंडरग्रेजुएट एडमिशन के लिए इस टेस्ट स्कोर को मान रही हैं. इसका फायदा यह है कि छात्रों को टेस्ट सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ती, खर्च कम होता है और रिजल्ट भी जल्दी मिल जाता है. इससे एप्लिकेशन प्रोसेस काफी आसान हो गया है.

पढ़ाई के बाद काम करने का मजबूत ऑप्शन

कनाडा को खास बनाता है उसका Post Graduation Work Permit यानी PGWP प्रोग्राम. इसके तहत योग्य छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद तीन साल तक कनाडा में काम कर सकते हैं. इस दौरान छात्र इंटरनेशनल वर्क एक्सपीरियंस लेते हैं, अपनी CV को मजबूत बनाते हैं, पढ़ाई का खर्च निकालते हैं और आगे चलकर करियर या रेजिडेंसी के ऑप्शन भी देख पाते हैं. बहुत कम देश ऐसे हैं जहां क्वालिटी एजुकेशन और जॉब अपॉर्च्युनिटी का ऐसा बैलेंस देखने को मिलता है.

कनाडा की रेप्यूटेट यूनिवर्सिटीज

कनाडा की पहचान उसकी U15 रिसर्च यूनिवर्सिटीज से भी बनती है. इनमें 

  • University of Toronto
  • McGill University
  • University of British Columbia
  • University of Waterloo
  • McMaster University
  • University of Alberta
  • Queen's University शामिल हैं.

इन यूनिवर्सिटीज में पढ़ने का मतलब है ग्लोबली रिकॉग्नाइज्ड डिग्री, एडवांस रिसर्च और लैब्स की सुविधा, इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स से कनेक्शन, इंटरनेशनल क्लासरूम और दुनिया भर में करियर के मौके.

भारत और कनाडा के रिश्तों से भी बढ़ी उम्मीद

हाल के समय में भारत और कनाडा के रिश्तों में भी पॉजिटिव संकेत मिले हैं. जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कनाडा के कनानास्किस में हुए G7 Summit में शामिल हुए. यहां उनकी मुलाकात कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से हुई.

बैठक में एनर्जी सिक्योरिटी, टेक्नोलॉजी, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और हायर एजुकेशन में सहयोग जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई. दोनों देशों ने सीनियर लेवल बातचीत और ट्रेड नेगोशिएशन दोबारा शुरू करने पर भी सहमति जताई. इससे साफ है कि आने वाले समय में भारत और कनाडा के रिश्ते और मजबूत हो सकते हैं.

इन्हीं वजहों से 2026 में भी कनाडा भारतीय छात्रों के लिए सिर्फ पढ़ाई की जगह नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की एक मजबूत तैयारी के तौर पर सामने आता है.

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