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पैदा होते ही शुरू हो गई नंबरों की रेस! क्लास-1 टॉपर्स की लिस्ट आई सामने, नंबर के साथ छपी फोटो

Viral Class Ist Topper List : कर्नाटक के एक प्राइमरी स्कूल की Ist क्लास की टॉपर्स लिस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. इस देखकर यूजर्स हैरान हैं. उनका कहना है कि छोटी उम्र में बच्चों पर पढ़ाई और परफॉरमेंस का गैर-जरूरी दबाव डाला जा रहा है.

पैदा होते ही शुरू हो गई नंबरों की रेस! क्लास-1 टॉपर्स की लिस्ट आई सामने, नंबर के साथ छपी फोटो
पहली क्लास में पढ़ने वाले बच्चों की टॉपर लिस्ट

Viral Class Ist Topper List: आज के दौर में बच्चों का बचपन किताबों, टेस्ट और नंबरों के बोझ तले कहीं दबता नजर आ रहा है. जिस उम्र में बच्चों को खेलना, नई चीजें सीखना और खुलकर जीना चाहिए, उस उम्र में उन्हें रैंक और प्रतिशत की दौड़ में उतार दिया जाता है. कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के एक प्राइमरी स्कूल की Ist क्लास की टॉपर्स लिस्ट ने इसी बहस को फिर हवा दे दी है. वायरल लिस्ट में छोटे बच्चों के बहुत ज्यादा मार्क्स देखकर लोग हैरान हैं. कुछ इसे प्रतिभा बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि छोटी उम्र में बच्चों पर पढ़ाई और परफॉरमेंस का गैर-जरूरी दबाव डाला जा रहा है.

कई छात्रों ने हासिल किए पूरे मार्क्स 

वायरल फोटो के अनुसार, एस. यज्ञसूर्या ऐटल और खुशिका वी ने 200 में 200 मार्क्स हासिल किए हैं. वहीं निशांत एम को 199, मोहम्मद हरमैन को 198 और यश्मिथ नाइक जे.के. को 197 मार्क्स मिले हैं. इतने छोटे बच्चों के इतने ज्यादा मार्क्स देखकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कई लोगों ने इसे बच्चों की लगन और स्कूल की अच्छी शिक्षा व्यवस्था का परिणाम बताया, जबकि अन्य ने इसे बच्चों पर गैर-जरूरी कॉम्पीटीशन का दबाव माना.

सोशल मीडिया पर उठे सवाल

वायरल पोस्ट पर कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि आखिर Ist क्लास के बच्चों को इतनी कम उम्र में रैंक और प्रतिशत की दौड़ में क्यों शामिल किया जा रहा है. लोगों का कहना है कि परीक्षा और तुलना की बजाय बचपन का समय खेलने, सीखने और क्रिएटिव डेवलपमेंट के लिए होना चाहिए. इस दौरान एक यूजर ने लिखा, “बच्चों को उनका बचपन जीने दीजिए.” जबकि दूसरे ने कहा, “इतनी छोटी उम्र में इतना दबाव सही नहीं है.” वहीं एक अन्य यूजर ने एजुकेशन सिस्टम में बदलाव की मांग करते हुए लिखा,“हमें शिक्षा व्यवस्था बदलने की जरूरत है.”

मार्क्स की दौड़ पर फिर छिड़ी बहस

इस वायरल फोटो के बाद भारत के मार्क्स बेस्ड एजुकेशन सिस्टम पर भी चर्चा तेज हो गई है. कई लोगों का मानना है कि बच्चों की तुलना बचपन से ही शुरू हो जाती है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर असर पड़ सकता है. कुछ यूजर्स ने कहा कि बहुत ज्यादा कॉम्पीटीशन बच्चों में तनाव, ईर्ष्या और असफलता का डर पैदा करता है. लोगों ने सहयोग, क्रिएटिविटी और इमोशनल डेवलपमेंट को ज्यादा तवज्जो देने की बात कही.

NEP 2020 पर भी हुई चर्चा 

इस मामले के बाद नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 (NEP 2020) भी चर्चा में आ गई. इस पॉलिसी में छोटे बच्चों के लिए खेल और एक्टिविटी-बेस्ड एजुकेशन पर जोर दिया गया है. पॉलिसी का मकसद बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम करना और उनकी क्रिएटिव सोच को बढ़ावा देना है. हालांकि, सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि जमीनी स्तर पर आज भी स्कूलों में मार्क्स और रैंक की होड़ जारी है. यही वजह है कि यह वायरल टॉपर्स लिस्ट अब पूरे देश में एजुकेशन और बचपन को लेकर एक बड़ी बहस का कारण बन गई है.

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