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कैंसर से लड़ते हुए पास किया UPSC एग्जाम, युवाओं के लिए मिसाल है संजय डहरिया की कहानी

साल 2012 तक सब सही चल रहा था. हालांकि इस दौरान ही संजय को पता चला कि उन्हें लार ग्रंथियों में कैंसर है. उनकी पूरी दुनिया ही पलट गई.  संजय कहते हैं कि जब उन्हें जानकारी मिली कि उन्हें जानलेवा बीमारी है तब वह निराश तो हुए. लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी

कैंसर से लड़ते हुए पास किया UPSC एग्जाम, युवाओं के लिए मिसाल है संजय डहरिया की कहानी
तीसरे चरण में मिली कामयाबी

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के निवासी संजय डहरिया ने यूपीएससी परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल की है. संजय डहरिया ने कैंसर से लड़ते हुए संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी की और  अपने तीसरे प्रयास में कामायाबी हासिल कर ली. छोटे से गांव से आने वाले संजय ते जीवन की कहानी युवाओं के लिए काफी प्ररेणादायक है.  हिम्मत, लगन और पक्के इरादे होने पर हर चीजों को जीवन में हासिल किया जा सकता है. महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के रहने वाले संजय डहरिया अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं. उन्हें देखने में भी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ता है. संजय के पिता लखनलाल डहरिया किसान हैं और माता रेशम डहरिया गृहणी हैं. तीन भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे, संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की.

संजय ने बताया कि जब वह गांव के स्कूल में पांचवी कक्षा में पढ़ते थे तब उनका चयन जवाहर नवोदय विद्यालय, माना (रायपुर) में हुआ, उन्होंने वहां 12वीं तक की पढ़ाई की. फिर महासमुंद के वल्लभाचार्य शासकीय महाविद्यालय से अर्थशास्त्र में बीए की. इस दौरान यूपीएसएसी और अन्य परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी. भारतीय स्टेट बैंक की परीक्षा में संजय को सफल मिलती और 2009 से 2011 तक पश्चिम बंगाल की एक शाखा में काम किया. लेकिन उनका सपना था. UPSC एग्जाम को पास करने का, तो क्या बड़ा लक्ष्य पाने के इरादे से उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया. 

लार ग्रंथियों में हुआ कैंसर

साल 2012 तक सब सही चल रहा था. हालांकि इस दौरान ही संजय को पता चला कि उन्हें लार ग्रंथियों में कैंसर है. उनकी पूरी दुनिया ही पलट गई.  संजय कहते हैं कि जब उन्हें जानकारी मिली कि उन्हें जानलेवा बीमारी है तब वह निराश तो हुए. लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी. 2012 से 2018 के बीच मुंबई में इलाज के दौरान, उन्होंने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोशिश करना जारी रखा. इस दौरान, उन्होंने 2013 से 2017 तक रायपुर में आईडीबीआई बैंक में भी काम किया. बाद में, वह महासमुंद डाकघर के बैंकिंग शाखा में शामिल हो गए और 2017 से 2018 तक वहां काम किया.

उन्होंने बताया कि आखिरकार यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित करने के इरादे से उन्होंने अपनी तीसरी सरकारी नौकरी से इस्तीफा दे दिया. संजय ने बताया कि उन्होंने 2022 में यूपीएससी की परीक्षा देना शुरू किया. अपने पहले दो प्रयासों में निराशा का सामना करने के बाद, उन्होंने अपनी कमजोरियों का विश्लेषण किया और गुरुओं के मार्गदर्शन में अपनी तैयारी जारी रखी. उनकी लगन का फल तब मिला जब यूपीएससी 2025 के नतीजे घोषित हुए, जिसमें उन्होंने 946वीं रैंक हासिल की.

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