Delhi News: देश के अलग-अलग हिस्सों से खबर आती है कि ऐसे कॉलेज और यूनवर्सिटीज चल रही हैं, जिनकी कोई मान्यता भी नहीं है और फिर भी उन्हें चलाया जा रहा है और एडमिशन भी लिए जा रहे हैं. इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने केन्द्र सरकार और यूजीसी से इस मामले में तुरंत एक्शन लेने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने कहा कि इन फर्जी कॉलेजों के चक्कर से छात्रों को बचना चाहिए और कहा ये छात्र अक्सर छोटे शहरों से आते हैं, जो अपनी सीमित आर्थिक क्षमता के बावजूद बड़े सपने लेकर शहरों में पढ़ने आते हैं, लेकिन फर्जी यूनिवर्सिटीज के चक्कर में फंस जाते हैं और अंत में उन्हें ऐसी डिग्रियां मिलती हैं, जिनसे उन्हें कहीं पर कोई जॉब नहीं मिल पाती है. अब इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त के महीने में होगी.
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने वकील शशांक देव सुधी की तरफ से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की थी, जिस पर कोर्ट ने कहा कि छात्र ऐसे संस्थानों की तरफ आकर्षित होने के बाद पढ़ाई पूरी कर लेते हैं, लेकिन अंत में उनका समय, पैसा और ऊर्जा की ही बर्बादी होती है. हाईकोर्ट ने केंद्न सरकार, विश्वविघालय अनुदान आयोग(यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद(एआइसीटीई) को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है.
सरकार ने क्या एक्शन लिया?
केंद्र और यूजी को अब इस पर बताना होगा कि उन्होंने ऐसे फर्जी संस्थानों को रोकने के लिए क्या एक्शन लिया है. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से भी जवाब मांगा है कि सरकार ने फर्जी विश्वविघालय की जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी, कोर्ट ने पूछा है, कि इस कमेटी ने अब तक क्या जानकारी जुटाई है और ऐसे विश्वविघालय को बंद करने के लिए क्या कारवाई की गई. इन सब की जानकारी देनी होगी. इस पर देखना होगा कि अगली सुनवाई में कोर्ट के द्वारा क्या आदेश दिया जाता है.
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