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राजस्थान के 2921 स्कूलों में कुएं से पानी पी रहे बच्चे, बिना छात्रों के चल रहे 140 स्कूल

Rajasthan School Report: राजस्थान के स्कूलों में किन मूलभूत सुविधाओं की कमी है, इसकी पूरी जानकारी सरकारी रिपोर्ट में सामने आई है. राजस्थान में स्कूलों से ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है, वहीं कई स्कूल बिना छात्रों के चल रहे हैं.

राजस्थान के 2921 स्कूलों में कुएं से पानी पी रहे बच्चे, बिना छात्रों के चल रहे 140 स्कूल
सरकारी रिपोर्ट ने खोली राजस्थान के स्कूलों की पोल

UDISE की ओर से देश के स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, शैक्षणिक व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों की स्थिति पर सत्र 2025-26 की रिपोर्ट जारी की गई है. रिपोर्ट में कई आंकड़े चौंकाने वाले हैं, जो धरातल पर शिक्षा व्यवस्था की सच्चाइयों को बयां करते हैं. रिपोर्ट में बताया गया है कि राजस्थान में शिक्षक छात्र अनुपात 20 है. प्रदेश में 1 लाख 6 हजार 445 स्कूल है. इन स्कूलों में 1 करोड़ 59 लाख विद्यार्थियों पर 7 लाख 93 हजार 158 शिक्षक हैं.  सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश में 140 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी विद्यार्थी नहीं है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए 189 शिक्षक हैं. वहीं, 7200 ऐसे स्कूल है जहां 1 लाख 78 हजार 531 विद्यार्थी पढ़ते हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक है. 

ड्रॉपआउट दर भी ज्यादा

राजस्थान में स्कूलों से ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है. प्रदेश में कक्षा 8 के बाद विद्यार्थियों का ड्रॉपआउट रेट सबसे ज्यादा है, यानी बदलते दौर में भी कक्षा 8 के बाद विद्यार्थी अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख रहे हैं. प्रदेश में प्रारंभिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 3.6% है. मिडिल स्तर पर 4.6% और माध्यमिक स्तर पर 7.5% हो जाती है. हालांकि कक्षा 8 के बाद लड़के ज्यादा पढ़ाई छोड़ रहे हैं. माध्यमिक स्तर पर लड़कों की ड्रॉपआउट दर 8.4% है, जबकि लड़कियों की 6.5% है.

मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो प्रदेश की 69 हजार 983 सरकारी स्कूलों में से 63 हजार 117 में चालू बिजली की सुविधा है. यानी करीब 10 प्रतिशत विद्यालयों में बिजली की सुविधा नहीं है. 1475 सरकारी स्कूलों में आज भी पीने के साफ पानी की व्यवस्था नहीं है. 

पीने के पानी और टॉयलेट की कमी

प्रदेश के 2 हजार 921 स्कूलों में कुएं,  30 हजार 3 स्कूलों में हैंडपंप पीने के पानी का स्रोत हैं. 62 हजार 445 स्कूलों में नल का पानी पेयजल का स्रोत है. 1047 स्कूलों के विद्यार्थियों का पानी का स्रोत स्कूल नहीं बल्कि स्कूल के बाहर है. 10 हजार 927 सरकारी स्कूलों में लड़कों के और 9 हजार 703 स्कूलों में लड़कियों के लिए सुचारू टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है. प्रदेश के करीब 11.7 प्रतिशत स्कूलों में सुचारू टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है. 10 हजार 439 सरकारी विद्यालयों में लाइब्रेरी और पढ़ने के लिए व्यवस्था नहीं है. 

डिजिटल शिक्षा की बात करें तो हालात और चिंताजनक है. प्रदेश में जहां 84.5 प्रतिशत प्राइवेट स्कूलों में कंप्यूटर और 84.7 प्रतिशत स्कूलों में इंटरनेट है. वहीं सरकारी स्कूलों में हालात ये है कि महज 41.9 प्रतिशत स्कूलों में ही कंप्यूटर है. इंटरनेट केवल 65.1 प्रतिशत स्कूलों में है. प्रदेश के 40 हजार 692 सरकारी विद्यालयों में कंप्यूटर नहीं है और 24 हजार 439 स्कूलों में इंटरनेट नहीं है.

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