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तिहाड़ जेल में पढ़ाई कर रहा श्रद्धा का कातिल आफताब, कैदियों के लिए क्या हैं परीक्षा देने के नियम?

भारत में कैदियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाता है. कई जेलों में कैदी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं.

तिहाड़ जेल में पढ़ाई कर रहा श्रद्धा का कातिल आफताब, कैदियों के लिए क्या हैं परीक्षा देने के नियम?

श्रद्धा वालकर हत्याकांड का आरोपी आफताब अमीन पूनावाला एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह कोर्ट की सुनवाई नहीं, बल्कि उसकी पढ़ाई है.  दिल्ली की एक अदालत ने 20 जुलाई को होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी, क्योंकि उसी दिन आफताब इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से एमए (समाजशास्त्र) की अंतिम परीक्षा देने वाला है. परीक्षा तिहाड़ जेल के सेंट्रल जेल नंबर-3 स्थित IGNOU परीक्षा केंद्र में होगी, जहां वह विचाराधीन कैदी के रूप में बंद है. 

कोर्ट ने क्यों टाली सुनवाई

आफताब ने अदालत में आवेदन देकर कहा था कि उसकी अंतिम MA Sociology परीक्षा 20 जुलाई को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक है. इस कारण वह उस दिन अदालत में पेश नहीं हो सकेगा. अदालत ने आवेदन स्वीकार करते हुए 20 जुलाई की कार्यवाही रद्द कर दी और निर्देश दिया कि मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य 21 जुलाई से दर्ज किए जाएं. 

क्या जेल में कैदी पढ़ाई कर सकते हैं?

भारत में कैदियों को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर दिया जाता है. कई जेलों में कैदी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU), राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) और अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से पढ़ाई कर सकते हैं. इसका उद्देश्य कैदियों के सुधार (Reformation) और पुनर्वास (Rehabilitation) को बढ़ावा देना है. 

कैदी परीक्षा कैसे देते हैं?

परीक्षा की व्यवस्था संबंधित राज्य की जेल नियमावली, जेल प्रशासन और शैक्षणिक संस्थान के नियमों के अनुसार की जाती है. सामान्य तौर पर कैदी का किसी मान्यता प्राप्त संस्थान में विधिवत नामांकन होना चाहिए. परीक्षा देने के लिए जेल प्रशासन की अनुमति आवश्यक होती है. 

ज्‍यादातर परीक्षा जेल परिसर में बनाए गए अधिकृत परीक्षा केंद्र पर कराई जाती है. परीक्षा विश्वविद्यालय या बोर्ड के निर्धारित नियमों और निगरानी व्यवस्था के तहत आयोजित होती है. 

यदि परीक्षा और अदालत में पेशी की तारीख एक ही दिन हो, तो अदालत परिस्थितियों के अनुसार सुनवाई की तारीख बदल सकती है, जैसा कि आफताब के मामले में हुआ है. 

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जेल में शिक्षा का उद्देश्य

जेलों में शिक्षा का मकसद केवल डिग्री दिलाना नहीं, बल्कि कैदियों को नई शुरुआत का अवसर देना भी है. शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों के जरिए उन्हें रिहाई के बाद समाज में दोबारा बेहतर तरीके से शामिल होने के लिए तैयार किया जाता है. 
 

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