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स्कूलों में सुविधाओं के मामले में कौन सा राज्य सबसे पिछड़ा? छापेमारी के बीच देख लें सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े

UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट में स्कूलों की सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर सामने आई है. कंप्यूटर, इंटरनेट और CWSN सुविधाओं के मामले में मेघालय सबसे कमजोर राज्यों में दिखाई देता है.

स्कूलों में सुविधाओं के मामले में कौन सा राज्य सबसे पिछड़ा? छापेमारी के बीच देख लें सरकारी रिपोर्ट के आंकड़े
तुलनात्मक रूप से दिल्ली, चंडीगढ़ और दमन एवं दीव-दादरा एवं नगर हवेली जैसे क्षेत्र इस मामले में कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हैं.

Worst State for School Facilities : देशभर में स्कूलों की सुविधाओं को लेकर चल रही छापेमारी की खबरों के बीच एक बड़ा सवाल लोगों के दिमाग में उठ रहा है कि आखिर बुनियादी सुविधाओं के मामले में कौन सा राज्य सबसे ज्यादा पिछड़ा है? बता दें कि आपके इस सवाल का जवाब शिक्षा मंत्रालय के UDISE+ 2025-26 आंकड़ों में आसानी से मिल जाएगा. तो चलिए जानते हैं देश के किस राज्य की स्कूल की स्थिति चिंताजनक है और क्यों...

मेघालय के स्कूल सबसे कमजोर

शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, मेघालय में कुल 11,462 स्कूल हैं, लेकिन इनमें से केवल 2,235 स्कूलों में ही कंप्यूटर की सुविधा है. यही नहीं  इंटरनेट सुविधा वाले स्कूलों की संख्या भी सिर्फ 4,174 है. ऐसे समय में जब डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है, मेघालय के यह आंकड़े चौंकाने वाले और चिंताजनक स्थिति बयां करते हैं. वहीं, बुनियादी सुविधाओं की बात करें तो राज्य के 8,784 स्कूलों में पेयजल सुविधा है, जबकि हैंडवॉश सुविधा सिर्फ 5,253 स्कूलों में ही है.

खेल मैदान और लाइब्रेरी की सुविधाओं की कमी

और तो और खेल और पढ़ाई से जुड़ी अन्य सुविधाओं में भी तस्वीर बहुत अच्छी नहीं है. क्योंकि केवल 6,536 स्कूलों में खेल का मैदान और 7,318 स्कूलों में लाइब्रेरी या रीडिंग कॉर्नर हैं.

दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाओं की भारी कमी

सबसे गंभीर स्थिति दिव्यांग छात्रों (CWSN) को लेकर है. रिपोर्ट के अनुसार मेघालय में सिर्फ 720 स्कूलों में CWSN फ्रेंडली टॉयलेट हैं. एक अन्य विश्लेषण में यह भी सामने आया कि केवल 6.3 फीसदी स्कूलों में ऐसे शौचालय मौजूद हैं और कार्यशील CWSN फ्रेंडली टॉयलेट वाले स्कूलों की हिस्सेदारी मात्र 5.6 फीसदी है. यह राष्ट्रीय औसत 40.1 फीसदी और 38.1 फीसदी से काफी कम है.

तुलनात्मक रूप से दिल्ली, चंडीगढ़ और दमन एवं दीव-दादरा एवं नगर हवेली जैसे क्षेत्र इस मामले में कहीं बेहतर प्रदर्शन करते हैं. वहीं तमिलनाडु और ओडिशा जैसे राज्यों में भी दिव्यांग छात्रों के लिए सुविधाओं का स्तर अधिक मजबूत पाया गया है.

क्या कहती है रिपोर्ट?

सरकारी रिपोर्ट यह साफ संकेत देती है कि स्कूलों में सिर्फ स्कूल की इमारत खड़ी कर देना काफी नहीं है. इंटरनेट, कंप्यूटर, दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाएं भी शिक्षा को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं. ऐसे में इन मानकों पर मेघालय राज्य को अभी लंबा सफर तय करना है.

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