राजस्थान में पैरामेडिकल एग्जाम में नकल कराने वाली बड़ी गैंग का भंडाफोड़ हुआ है. जयपुर में पेपर गड़बड़ी की बड़ी साजिश को एग्जाम से ठीक पहले बेनकाब कर दिया गया. इस रैकेट में 40 से ज्यादा छात्रों को पास कराने की तैयारी थी. एग्जाम सेंटर को मैनेज किया जा रहा था और दो कॉलेजों ने मिलकर पूरी साजिश रची थी. इस मामले में जयपुर के प्रभादेवी मेमोरियल कॉलेज का मालिक और उसका भतीजा गिरफ्तार हो चुका है, वहीं झुंझुनू के एस करण कॉलेज मुकुंदगड का HOD और लेक्चरर गिरफ्तार हुआ है. आइए जानते हैं कि इस पूरे मामले का खुलासा कैसे हुआ और कैसे छात्रों को पास कराने की पूरी प्लानिंग की गई.
27 जून को मिली सूचना
राजस्थान में पैरामेडिकल परीक्षा से पहले पुलिस कंट्रोल रूम के जरिए 27 जून को सब इंस्पेक्टर अभिषेक को सूचना मिली कि परीक्षा में गड़बड़ी की जाएगी. इसमें बताया गया कि कैसे एग्जाम सेंटर्स को मैनेज किया गया है. सूचना मिलने के बाद 28 जून को मुकदमा दर्ज कर देर रात तक गिरफ्तारियां शुरू हो गईं. जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज में नकल करवाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी. हालांकि खोरा बीसल थाना पुलिस को मिली गुप्त सूचना के बाद इसे नाकाम कर दिया गया.
पांच लाख में तय हुई थी डील
जांच में सामने आया है कि करीब 5.5 लाख रुपये में डील तय हुई थी और 40 से 45 छात्रों को परीक्षा में पास कराने की योजना बनाई गई थी. झुंझुनू के एस करण कॉलेज मुकुंदगढ़ के HOD कृष्ण कुमार और लेक्चरर शंकर ने ये पूरी साजिश रची थी. आरोप है कि प्रथम वर्ष के बैक लगे छात्रों को पास कराने के लिए जयपुर के परीक्षा केंद्र से संपर्क किया गया.
कैसे कराई जानी थी नकल?
इस पूरे रैकेट के जरिए पैरामेडिकल छात्रों को इनविजिलेटर की मदद से नकल करवाने की तैयारी थी. पुलिस को एक पर्ची भी मिली है, जिसमें उन तमाम छात्रों के नाम और उनके आगे पेमेंट रिसीव लिखा हुआ है. प्रताप नगर इलाके से कृष्ण कुमार और शंकर की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूछताछ में जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल कॉलेज से जुड़े राम कृष्ण मंडीवाल और देव कृष्ण का नाम भी सामने आया, जिन्हें बाद में गिरफ्तार किया गया. पुलिस अब पिछली परीक्षाओं की भी जांच कर रही है.
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