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फोर्ब्स की ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में आया नाम, जानें कौन हैं 4500 रुपये कमाने वालीं मतिल्दा कुल्लू

ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में रहने वाली मतिल्दा कुल्लू भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं. जिनकी कहानी पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन रही है.

फोर्ब्स की ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में आया नाम, जानें कौन हैं 4500 रुपये कमाने वालीं मतिल्दा कुल्लू
matilda kullu Success story

किसी भी एंट्रप्रेन्योर का नाम फोर्ब्स की लिस्ट में आना उसके लिए गर्व की बात होती है. इस लिस्ट में अक्सर बिजनेस फैमिली के या हाईली एजुकेटेड लोगों के नाम नजर आते हैं. पर, कभी कभी कुछ लोग बिना किसी सपोर्ट या सुविधा के ऐसे मुकाम तक पहुंचते हैं कि खुद फोर्ब्स उन्हें ढूंढकर अपनी लिस्ट में जगह देती है और फिर दुनियाभर में उनके नाम के चर्चे होते हैं. ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में रहने वाली मतिल्दा कुल्लू भी ऐसे ही लोगों में से एक हैं. जिनकी कहानी पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन रही है.

कौन हैं मतिल्दा कुल्लू?

ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले के एक छोटे से गांव गर्गडबहल में रहती हैं 45 साल की मतिल्दा कुल्लू. जिनका नाम फोर्ब्स इंडिया की वूमेन पावर लिस्ट 2021 में शामिल किया गया.  महज 4,500 रुपये मासिक आय पाने वाली एक आशा वर्कर का इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाना अपने आप में बड़ी बात है. मतिल्दा पिछले 15 सालों से आशा वर्कर के रूप में काम कर रही हैं. वो अपने गांव के 964 लोगों की स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी संभालती हैं. गांव की ज्यादातर आबादी आदिवासी समुदाय से है. सीमित संसाधनों के बावजूद मतिल्दा ने स्वास्थ्य सेवाओं को घर घर तक पहुंचाया. जिसकी वजह से उन्हें ये मुकाम मिला है. ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी उन्हें तब बधाई दी थी.

कैसे बदली गांव की सोच?

जब मतिल्दा ने काम शुरू किया, तब गांव के लोग बीमारी में अस्पताल जाने से कतराते थे. झाड़ फूंक और परंपरागत तरीकों पर ज्यादा भरोसा था. मतिल्दा ने पेशेंस और मेहनत से लोगों को समझाया कि मेडिकल साइंस ही सही इलाज है. इस दौरान उन्हें नस्लवाद और छुआछूत का भी सामना करना पड़ा, क्योंकि वो निचली जनजाति से आती हैं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और धीरे धीरे लोगों का भरोसा जीत लिया.

कोरोना काल में बनीं सच्ची वॉरियर

कोविड लॉकडाउन के दौरान वे रोज 50-60 घरों में जाकर हेल्थ चेकअप करती थीं. लोगों को कोविड टेस्ट और वैक्सीन के लिए तैयार करना आसान नहीं था. लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी. दूसरी लहर में वो खुद कोरोना से पीड़ित हुईं. फिर ठीक होकर दो हफ्ते बाद दोबारा काम पर लौट आईं.

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