Nitin Naveen Student life : किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे माता-पिता, स्कूली शिक्षा और वहां से मिले संस्कारों की बड़ी भूमिका होती है. जब बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन अपने पुराने स्कूल CSKM पब्लिक स्कूल, छतरपुर पहुंचे तो यादों का एक पूरा संसार उनके सामने खुल गया. इस दौरान उन्होंने टीचर्स और स्टूडेंट्स से बातचीत की. वह अपनी क्लास में गए और अपने टीचर्स के पैर छूकर आशीर्वाद भी लिया. उन्होंने अपनी स्टूडेंट लाइफ के कई किस्सों को भी याद किया. इसी को लेकर एनडीटीवी ने CSKM पब्लिक स्कूल की चेयरपर्सन शकुंतला एस. जैमन से बातचीत की. शकुंतला जैमन ने नितिन नवीन की स्टूडेंट लाइफ से जुड़े कई मजेदार किस्से शेयर किए हैं. तो चलिए आपको आगे आर्टिकल में उनके टीचर की जुबानी जानते हैं कि नितिन नवीन कैसे स्टूडेंट थे, उनका फेवरेट सब्जेक्ट क्या था और वे शांत थे या फिर बदमाश...

शांत, गंभीर और संस्कारी थे
नितिन नवीन के स्कूली दिनों को याद करते हुए चेयरपर्सन शकुंतला बताती हैं कि नितिन शांत, गंभीर और समझदार छात्र थे. उस उम्र में बच्चों में थोड़ी बहुत चंचलता होना स्वाभाविक है, लेकिन वे संयमित और बेहद संस्कारी थे. उन्हें सही और गलत की पूरी पहचान थी. वे इधर-उधर भटकने के बजाय हमेशा अपनी पढ़ाई और ध्येय का पूरा ख्याल रखते थे.
साइकोलॉजी था फेवरेट सब्जेक्ट
शकुंतला आगे बताती हैं कि हालांकि नितिन साइंस स्ट्रीम के छात्र थे, लेकिन स्कूल में कई बच्चे साइंस के साथ साइकोलॉजी का कॉम्बिनेशन चुनते थे. जिसमें वो बहुत अच्छे थे और इसमें उनके अच्छे नंबर भी (80 नंबर) आए. यह उनका फेवरेट सब्जेक्ट भी था.

वॉलंटियर करना था पसंद
नितिन में लीडरशिप क्वालिटीज थी, लेकिन वो दिखावे से दूर रहते थे. जब भी स्कूल में कोई प्रोग्राम या एनुअल डे होता था, वो स्टेज के सामने आने की बजाय ऑर्गनाइज कराने और वॉलिंटियरिंग करने में दिलचस्पी रखते थे, जैस बच्चों के बैठने की व्यवस्था देखना और कार्यक्रम का संचालन संभालना.
राजनीतिक पृष्ठभूमि का कभी नहीं दिखाया घमंड
नितिन नवीन के पिता जाने-माने पॉलिटिशियन थे. बावजूद इसके नितिन ने अपने नेचर से कभी भी स्कूल में इस बात का अहसास नहीं होने दिया. शकुंतला बताती हैं कि कई बच्चे ऐसे होते हैं जो अपने फैमिली बैकग्राउंड या प्रभाव को दिखाने की कोशिश करते हैं, लेकिन नितिन के अंदर यह बिल्कुल भी नहीं थी. वे एकदम आम स्टूडेंट की तरह रहते थे.

तीजनबाई का कार्यक्रम और 'टॉर्च की रोशनी'
चेयरपर्सन शकुंतला ने बताया कि दौरे के दौरान नितिन नवीन ने पांडवानी गायिका तीजनबाई के कार्यक्रम की यादें साझा कीं. उन्होंने बताया कि एक कार्यक्रम में पांडवानी गायिका तीजनबाई आई थीं जिसका नितिन के जीवन पर गहरा असर पड़ा था.
इसके साथ ही हॉस्टल का एक मजेदार किस्सा याद करते हुए टीचर ने बताया कि एक बार हॉस्टल में रात को लाइट चली गई. अंधेरे में कुछ बच्चे शोर मचाने लगे. मैं हाथ में टॉर्च लाइट लेकर हॉस्टल की तरफ गई. मैंने जैसे ही पहली मंजिल की तरफ रोशनी डाली, देखा कि नितिन अपने दो दोस्तों क्षितिज और विश्वजीत के साथ कमरे के बाहर खड़े थे. मैंने उन्हें नीचे बुलाया. नितिन की सूरत बहुत भोली लगती थी, लेकिन बदमाश हो. जब नितिन इस बार स्कूल आए तो हमने हंसते हुए उस किस्से को भी याद किया.
सेकंड बेंच पर बैठते थे
चेयरपर्सन ने नितिन के दौरे को याद करते हुए बताया कि कैंपस का चक्कर लगाते हुए नितिन अपनी पुरानी क्लास में गए और अपनी उस बेंच पर बैठे जहां वे तब बैठा करत थे. अपने बच्चों को भी साथ लेकर आए थे. उन्होंने बच्चों को बताया-"मैं हमेशा सेकंड बेंच पर बैठता था. क्योंकि सबसे आगे बैठने पर स्ट्रेस रहता है और ज्यादा पीछे बैठने से ध्यान भटकता है."

उन्होंने यह भी याद किया कि कैसे शाम की सेल्फ-स्टडी के दौरान इंचार्ज (निशा ठाकुर) खिड़की से बच्चों की हरकतों पर नजर रखते थे और अगले दिन क्लास में उन बच्चों की जमकर खिंचाई होती थी.
स्कूल मेस में खाया बचपन का नाश्ता और दिया खास संदेश
शंकुतला बताती हैं कि नितिन नवीन ने इस दौरे को पूरी तरह निजी रखा. उन्होंने पहले ही स्कूल मैनेजमेंट से रिक्वेस्ट किया था कि उनके आने की खबर किसी को न दी जाए.

इस दौरान उन्होंने मेंस में सुबह का नाश्ता भी किया जिसमें दलिया, ब्रेड, उबले अंडे, केला शामिल था.
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