NEET पेपर लीक मामले को लेकर सीबीआई ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और अब इनकी जमानत याचिका का विरोध कर रही है. सीबीआई ने दिल्ली की एक अदालत में पेपर लीक मामले के आरोपी डॉ. मनोज भगवानराव शिरूरे की जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया. इस दौरान CBI ने कहा कि ये कोई छोटा अपराध नहीं है, ये अपराध 'देश के खिलाफ' है, जिसने देश की छवि को नुकसान पहुंचाया है और लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है. सीबीआई की तरफ से इस दौरान ये भी बताया गया कि इस अपराध यानी पेपर लीक के चलते कई छात्रों ने सुसाइड जैसा कदम भी उठा लिया.
देश और विदेश के छात्रों पर बड़ा असर
सीबीआई की सीनियर पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नीतू सिंह ने कोर्ट में कहा कि नीट-यूजी पेपर लीक कोई साधारण या किसी एक व्यक्ति के खिलाफ किया गया अपराध नहीं है. यह एक गंभीर अपराध है, जिसने भारत और विदेश में पढ़ रहे लाखों छात्रों को प्रभावित किया है.
600 करोड़ का नुकसान और छात्रों का सुसाइड
सीबीआई की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि पेपर लीक होने की वजह से परीक्षा रद्द करनी पड़ी, जिससे छात्रों को भारी परेशानी उठानी पड़ी. इस घटना के कारण सरकारी खजाने को करीब 600 करोड़ रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. एजेंसी ने यह भी कहा कि इस विवाद के बाद कई छात्रों ने तनाव में आकर आत्महत्या भी कर ली थी.
देश की इमेज हुई खराब
सीबीआई ने कोर्ट में ये भी कहा कि नीट परीक्षा के केंद्र पूरे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी बनाए गए थे. इस लीक ने पूरी दुनिया में देश की छवि पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. सीबीआई ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि शिरूरे को पेपर लीक से जो पैसा मिला था, उसने उसे अपनी बहन के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया था. इसके अलावा बाकी सबूत ऐसे हैं, जिनसे साफ होता है कि उसकी पेपर लीक में बड़ी भूमिका थी. एजेंसी ने ये भी बताया कि शिरूरे के जेल में रहने पर उसके परिवार को कोई असर नहीं पड़ रहा है, उसकी पत्नी जो खुद एक डॉक्टर हैं, वो उनके अस्पताल को अच्छी तरह से चला रही हैं.
आरोपी के वकील ने दिए ये तर्क
आरोपी मनोज भगवानराव शिरूरे के वकील ने तर्क देते हुए कहा कि उनके क्लाइंट पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से आरोपी प्रहलाद कुलकर्णी के बयान पर आधारित हैं. उन्होंने दलील दी कि सिर्फ किसी दूसरे आरोपी के कहने भर से किसी की भूमिका तय नहीं की जा सकती. डिफेंस काउंसिल ने कहा कि शिरूरे के खिलाफ कोई पुख्ता या आपत्तिजनक सबूत नहीं मिला है और उनके देश छोड़कर भागने का भी कोई खतरा नहीं है.
वहीं सीबीआई ने अपराध की गंभीरता और उसकी प्रकृति का हवाला देते हुए अदालत से आरोपी की जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज करने की मांग की है. सीबीआई के स्पेशल जज अजय गुप्ता ने आरोपी के वकील और सीबीआई दोनों की दलीलें सुनने के बाद जमानत याचिका पर अपना फैसला 22 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया है.
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