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NEET-JEE का नया फॉर्मूला छात्रों के लिए दो धारी तलवार, एक्सपर्ट ने बताया कोचिंग माफिया का असली इलाज

NEET-JEE Reform News: एजुकेशन एक्सपर्ट ने बताया कि अगर सरकार की तरफ से वाकई 12वीं के नंबरों को वेटेज दिया जाता है तो ये कैसे छात्रों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. एक्सपर्ट ने कोचिंग माफिया का असली इलाज भी बता दिया.

NEET-JEE का नया फॉर्मूला छात्रों के लिए दो धारी तलवार, एक्सपर्ट ने बताया कोचिंग माफिया का असली इलाज
NEET-JEE के लिए क्या होना चाहिए फॉर्मूला, एजुकेशन एक्सपर्ट ने बताया

हर साल NEET और JEE की तैयारी करने वाले लाखों छात्र कोचिंग सेंटर्स में मोटी फीस देकर पढ़ाई करते हैं. बोर्ड एग्जाम से ज्यादा प्रेशर इन एंट्रेंस एग्जाम का होता है, यही वजह है कि हर साल दोनों परीक्षाओं में 35 लाख से ज्यादा छात्र हिस्सा लेते हैं. इसी बीच न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सरकार इन परीक्षाओं में बड़ा बदलाव कर सकती है, जिसमें 12वीं के नंबरों को 50 प्रतिशत वेटेज देने की बात भी शामिल है. इस पूरे मामले को लेकर हमने एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा से बात की, जिन्होंने बताया कि कैसे इस फैसले का असर मेधावी छात्रों पर पड़ सकता है और सरकार को क्या करना चाहिए. 

मेधावी छात्रों के लिए हो सकता है खतरनाक

एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया, मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) में पेपर लीक की समस्या को रोकने के नाम पर अब कुछ ऐसे नए प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है. इन बेतुके प्रयोगों का सीधा नुकसान सिर्फ होनहार छात्रों को उठाना पड़ेगा और उनके साथ बड़ा अन्याय होगा.

अगर 12वीं के नंबरों का वेटेज दिया जाता है तो छात्रों का दोहरा शोषण होना तय है. एक तरफ स्कूल वाले प्रैक्टिकल और इंटरनल असेसमेंट के नंबरों के नाम पर मनमानी करेंगे, तो दूसरी तरफ कोचिंग संस्थान नीट की तैयारी के नाम पर फीस वसूलते रहेंगे. ऐसे में पिसना सिर्फ एक आम और मेधावी छात्र को ही पड़ेगा. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और शिक्षा मंत्रालय को ऐसा कोई कदम उठाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है.

कोचिंग माफिया पर ऐसे हो सकता है कंट्रोल

इस खबर के सामने आने के बाद कहा जा रहा है कि 12वीं के नंबरों को आधार बनाया जाता है तो कोचिंग माफिया का असर खत्म हो जाएगा. हालांकि एजुकेशन एक्सपर्ट इससे सहमत नहीं दिखाई दिए. उन्होंने कहा, अगर नीट-यूजी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों की कोचिंग पर निर्भरता खत्म करनी है, तो स्कूलों की पढ़ाई को मजबूत करना सबसे जरूरी है.

स्कूलों में पढ़ाई और परीक्षा का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे छात्र बोर्ड के साथ-साथ कॉम्पिटिशन की तैयारी भी कर सकें. स्कूल की पढ़ाई में रट्टा मारने के बजाय लॉजिकल सोच और गहरे विश्लेषण पर जोर देना होगा. थ्योरी के साथ-साथ ऑब्जेक्टिव (MCQ) सवालों की तैयारी भी स्कूल में ही करानी होगी.

11वीं में भी होनी चाहिए बोर्ड परीक्षा 

एक्सपर्ट ने सुधारों को लेकर बताते हुए ये भी कहा कि डमी स्कूल कल्चर को रोकने के लिए 11वीं में भी बोर्ड परीक्षा जरूरी होनी चाहिए. ऐसा करने से वो छात्र पकड़ में आ जाएंगे, जो सिर्फ नाम के लिए एडमिशन लेते हैं और स्कूल नहीं जाते, यानी डमी स्कूल कल्चर अपने आप बंद हो जाएगा. छात्रों का पढ़ाई से मन हटने की बड़ी वजह 11वीं में बोर्ड परीक्षा न होना है. नीट-यूजी में 11वीं और 12वीं दोनों का सिलेबस आता है.

11वीं में बोर्ड परीक्षा न होने से छात्र इसे गंभीरता से नहीं लेते और उनकी पकड़ कमजोर हो जाती है. इसी कमजोरी को दूर करने के लिए छात्र 10वीं के तुरंत बाद कोचिंग का सहारा लेते हैं और स्कूल जाना औपचारिकता बनकर रह जाता है.

NEET में तय होनी चाहिए अटेंप्ट की संख्या

एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा के मुताबिक नीट में अगर वाकई कुछ बदलाव करना है तो इसमें भी जेईई की तरह अटेंप्ट की सीमा तय की जाए. फिलहाल इस परीक्षा के लिए कोई आयुसीमा या फिर परीक्षा देने की लिमिट नहीं है. अगर अटेंप्ट की संख्या और उम्र तय हो जाए, तो आधी समस्याएं वहीं खत्म हो जाएंगी. इसके अलावा जेईई की तरह दो स्तर में परीक्षा कराई जानी चाहिए, जिससे योग्य छात्रों की ही सीट मिल पाएगी और फर्जीवाड़ा करने वाले दूसरे चरण में बाहर हो जाएंगे. 

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