NCERT New Syllabus: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की तरफ से नई किताबें जारी होने वाली हैं. बताया गया है कि मार्च में कक्षा 9 के लिए सामाजिक विज्ञान की नई किताबें जारी की जाएंगीं. इन किताबों के ड्राफ्ट सिलेबस के अनुसार, इस बार मुख्य फोकस भारत के अपने बौद्धिक और सांस्कृतिक योगदान पर होगा. आइए जानते हैं कि NCERT की नई किताबों में क्या-क्या नया होगा और अब छात्रों को क्या पढ़ाया जाएगा.
किताबों में क्या होगा खास?
एनसीआरटी की इन नई किताबों का मकसद छात्रों को रट्टा मारने के बजाय सोचने और समझने के लिए प्रेरित करना है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत ये बदलाव किए जा रहे हैं, जिनमें छात्रों को रटने की बजाय क्रिएटिव चीजें सीखने को मिलेंगीं. यानी पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगी. बताया गया है कि इसमें भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर जोर दिया जाएगा, जिससे छात्र अपनी संस्कृति और जमीनी हकीकत से जुड़ाव महसूस कर सकें.
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आधुनिक भारत का उदय
NCERT के सिलेबस में भारतीय उपमहाद्वीप के समृद्ध इतिहास और आधुनिक भारत के उदय को एक साथ दिखाया जाएगा. इसमें प्राचीन भारत के तमाम हिस्सों में प्रचलित लोकतांत्रिक परंपराओं का भी जिक्र होगा, जिससे छात्र 'अनेकता में एकता' के दर्शन को समझ सकें. इसके अलावा सिलेबस में उपनिवेशवाद (British Rule) और तमाम कारणों से पैदा हुई असमानता, अन्याय और भेदभाव पर भी चर्चा की जाएगी. साथ ही, समाज में समानता और न्याय लाने के लिए हुए आंदोलनों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
इस नए सिलेबस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछला सिलेबस ज्यादातर घटनाओं और तारीखों पर आधारित था, जिससे रट्टा मारने की आदत ज्यादा थी. अब नए सिलेबस से छात्रों को नई चीजें सीखने के लिए मिलेंगीं. मॉडर्न पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. अलका कपूर के मुताबिक यह सिलेबस रटने वाली आदत से हटकर एक समग्र दृष्टिकोण अपनाता है. यह भारत की विरासत और आधुनिक राष्ट्र को एक साथ जोड़कर पेश करता है. वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. मिथुराज धूसिया ने सुझाव दिया कि सिलेबस में समाज में आज भी मौजूद जाति, धर्म और जेंडर के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकने के तरीकों पर और अधिक जोर दिया जाना चाहिए.
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