MBBS Admission Without NEET: भारत में हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET परीक्षा देते हैं. इस एग्जाम में अच्छा स्कोर हासिल करने वाले छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन मिलता है. हालांकि, इस साल पेपर लीक के आरोपों के चलते परीक्षा रद्द होने से छात्रों और पैरेंट्स की चिंता बढ़ गई है. मगर उन्हें निराश होने की जरूरत नहीं है. विदेश में कई सारी यूनिवर्सिटीज ऐसी हैं, जहां बिना नीट स्कोर के साथ-साथ बहुत कम पैसों में MBBS की पढ़ाई की जा सकती है. पिछले कुछ सालों के दौरान भारतीय छात्रों ने बड़ी संख्या में मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश का रुख किया है. अगर आप भी बिना NEET स्कोर के 2025 में MBBS करना चाहते हैं, तो यहां हम आपको विदेश में मेडिकल पढ़ाई से जुड़े सभी जरूरी ऑप्शंस, फीस, एडमिशन प्रोसेस और अहम नियमों की जानकारी देंगे.
किर्गिस्तान
किर्गिस्तान भारतीय छात्रों के बीच सबसे सस्ता मेडिकल डेस्टिनेशन माना जाता है. यहां 5 से 6 साल के MBBS कोर्स की फीस लगभग 15 से 25 लाख रुपये तक होती है. यहां एडमिशन के लिए 12वीं में PCB के साथ कम से कम 50 प्रतिशत मार्क्स जरूरी हैं. ओश स्टेट यूनिवर्सिटी यहां की प्रमुख मेडिकल यूनिवर्सिटी मानी जाती है.
उज्बेकिस्तान
उज्बेकिस्तान तेजी से भारतीय छात्रों की पसंद बनता जा रहा है. यहां मेडिकल पढ़ाई की फीस लगभग 14 से 20 लाख रुपये तक होती है. ताशकंद मेडिकल एकेडमी और बुखारा स्टेट मेडिकल इंस्टीट्यूट यहां की प्रमुख यूनिवर्सिटीज हैं.
कजाकिस्तान
कजाकिस्तान में आधुनिक मेडिकल शिक्षा और रहने का कम खर्चा छात्रों को आकर्षित करता है. यहां MBBS की फीस करीब 18 से 30 लाख रुपये तक हो सकती है.
रूस
रूस लंबे समय से भारतीय छात्रों के लिए भरोसेमंद मेडिकल डेस्टिनेशन बना हुआ है. रूस से मेडिकल की पढ़ाई करने का खर्चा लगभग 18 से 35 लाख रुपये तक हो सकता है. इसकी प्रमुख मेडिकल यूनिवर्सिटीज में क्रीमिया फेडरल यूनिवर्सिटी और कजान फेडरल यूनिवर्सिटी शामिल हैं.
फिलीपींस
फिलीपींस में अमेरिकी एजुकेशन सिस्टम के आधार पर मेडिकल पढ़ाई कराई जाती है, जहां 1.5 साल का BS और 4 साल का MD कोर्स होता है. फिलीपींस में फीस लगभग 20 से 40 लाख रुपये तक होती है.
जॉर्जिया
जॉर्जिया यूरोपियन लेवल की मेडिकल शिक्षा के लिए जाना जाता है, जहां MBBS की पढ़ाई पर खर्च करीब 25 से 40 लाख रुपये तक आ सकता है.
लेकिन भारत में प्रैक्टिस करने के लिए करना होगा ये काम
विदेश से मेडिकल डिग्री लेने वाले छात्र भारत में सीधे प्रैक्टिस शुरू नहीं कर सकते हैं. देश में डॉक्टरी करने के लिए यह जरूरी है कि संबंधित यूनिवर्सिटी नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के नियमों के अनुसार मान्यता प्राप्त हो. इसके अलावा छात्रों को फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) या नेशनल एग्जिट टेस्ट (NExT) पास करना होता है. इसके साथ ही 12 महीने की अनिवार्य सुपरवाइज्ड इंटर्नशिप भी पूरी करनी पड़ती है.
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