यह उस लड़के की कहानी है, जिसकी जिंदगी की जिम्मेदारियां तब शुरू हो गई थीं, जब वह खुद बच्चा था. कम उम्र में शादी, कमजोर आर्थिक हालात और पढ़ाई छोड़ देने का दबाव, सब कुछ उनके सामने था. लेकिन इन हालात के बीच भी उन्होंने पढ़ाई का रास्ता नहीं छोड़ा. ये कहानी है राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के घोसुंडा गांव के रामलाल भोई की.
छठी क्लास में हुई शादी
रामलाल जब कक्षा 6 में था, तभी परिवार ने उनकी शादी करा दी. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 11 साल थी. उन्हें ठीक से समझ भी नहीं था कि क्या हो रहा है, लेकिन जिंदगी की दिशा वहीं बदल गई. घर की आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर थी. पिता चाहते थे कि रामलाल पढ़ाई छोड़कर कमाने में हाथ बंटाए. उसी समय रामलाल ने कक्षा 10 में 74 प्रतिशत अंक हासिल किए.
20 की उम्र में बने पिता
इधर रामलाल की जिम्मेदारियां भी लगातार बढ़ती जा रहीं थी. 20 साल की उम्र तक आते आते वह पति के साथ साथ पिता भी बन चुके थे. इतनी कम उम्र में परिवार और पढ़ाई दोनों संभालना आसान नहीं था. रामलाल को भले उस समय अपने लक्ष्य की पूरी तस्वीर साफ नहीं थी, लेकिन वह इतना जरूर जानते थे कि उन्हें गांव की सीमाओं में नहीं रुकना है.
कक्षा 10 के बाद जब उन्होंने आगे पढ़ने की जिद की, तो घर में विवाद बढ़ गया. पिता इतने नाराज हुए कि बात मार-पिटाई तक पहुंच गई. परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि आगे पढ़ना मुमकिन नहीं लग रहा था. तभी एक पारिवारिक मित्र ने उनकी मदद की. कुछ स्थानीय शिक्षकों ने भी पिता को समझाया कि लड़का पढ़ना चाहता है और उसमें क्षमता है. आखिरकार पिता मान गए और कोचिंग के लिए कर्ज तक लिया.
रामलाल ने 11वीं और 12वीं में साइंस चुनी. दिलचस्प बात यह रही कि शुरुआत में उन्हें NEET के बारे में पता ही नहीं था. बाद में दोस्तों और शिक्षकों से उन्हें इस मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम की जानकारी मिली.
इसके बाद शुरू हुआ लंबा संघर्ष. 2019 में पहले प्रयास में उन्हें 350 अंक मिले. यह पर्याप्त नहीं था. 2020 में उनका स्कोर करीब 320 रहा. यह पहले से भी कम था और काफी निराशाजनक भी. 2021 में उन्होंने लगभग 362 अंक हासिल किए. हल्का सुधार जरूर हुआ, लेकिन मेडिकल सीट अभी भी दूर थी. तैयारी मजबूत करने के लिए उन्होंने कोटा के एक कोचिंग सेंटर का रुख किया. यहां की ट्रेनिंग से उन्हें फायदा मिला. 2022 में उनका स्कोर बढ़कर 490 पहुंच गया. सुधार साफ था, लेकिन एडमिशन के लिए यह भी कम पड़ा.
पांचवें प्रयास में पास की NEET
लगातार पांच साल तक एक ही परीक्षा की तैयारी, परिवार की जिम्मेदारियां, कर्ज का दबाव और बार-बार नाकामी. हालात ऐसे थे कि ज्यादातर लोग यहां हार मान लेते. लेकिन रामलाल भोई डटे रहे. साल 2023 में पांचवें प्रयास में उन्होंने आखिरकार NEET UG क्वालिफाई कर लिया. उस समय उनकी उम्र 21 साल थी और इस बार उन्होंने 632 अंक हासिल किए.
यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि रामलाल ने यह मुकाम ऐसे गांव से हासिल किया जहां कई घरों में ठीक से शौचालय तक नहीं हैं, कंप्यूटर और इंटरनेट तो दूर की कौड़ी है. आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. वही पिता, जो कभी पढ़ाई की जिद पर नाराज होकर बेटे को मार बैठे थे, अब गर्व से लोगों को अपने बेटे की कहानी सुनाते हैं और कहते हैं कि उनका बेटा डॉक्टर बनेगा.
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