दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पिछले 17 दिनों से चल रहा छात्रों का अनशन आखिरकार खत्म हो चुका है. जेएनयू छात्र संघ नेताओं ने अपनी तमाम मांगों को लेकर ये धरना शुरू किया था, जिसके बाद अब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों की ज्यादातर मांगों को मान लिया है. इसमें छात्र नेताओं को निष्कासित करने और छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) वापस लेने पर सहमति बनी है. इस भूख हड़ताल को खत्म करने के बाद जेएनयू छात्र संघ की तरफ से भी एक बयान जारी किया गया है.
छात्रों के साथ हुआ समझौता
स्कूल ऑफ सोशल साइंस के डीन विवेक कुमार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच हुए समझौते में कई बड़े फैसले लिए गए हैं. इसमें चीफ प्रॉक्टर ऑफिस (CPO) के मैनुअल की समीक्षा, प्रॉक्टरियल जांच को वापस लेना और अन्य मुद्दों की जांच के लिए कमेटियां गठित करना शामिल है.19 अक्टूबर को जारी एक अलग नोटिस में यूनिवर्सिटी ने बताया कि कुलपति (VC) शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के निर्देश पर 5 छात्रों का निष्कासन तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है. हालांकि, इन छात्रों को अपने ऊपर लगे जुर्माने का भुगतान तुरंत करने की सलाह दी गई है. दोनों पक्षों के बीच अब आगे की मांगों और उनके लागू होने के तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए 14 दिन के बाद फिर से बैठक होगी.

इन छात्रों की सजा हुई रद्द
जेएनयू के जिन 5 छात्रों की सजा रद्द की गई है, उनके नाम अदिति मिश्रा, के गोतिका बाबू, सुनील यादव, दानिश अली और नीतीश कुमार हैं. इनमें से पहले चार वर्तमान जेएनयूएसयू पदाधिकारी हैं और पांचवें पूर्व JNUSU अध्यक्ष हैं.
छात्रों की कौन सी मांगें मानी गईं
- छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी.
- विरोध प्रदर्शनों के दौरान शुरू की गई प्रॉक्टरियल जांच भी वापस ली जाएगी.
- CPO मैनुअल के विवादित नियमों की समीक्षा और उन्हें हटाने के लिए एक कमेटी बनेगी, जिसमें छात्र संघ का प्रतिनिधि भी शामिल होगा.
- जेएनयू प्रवेश परीक्षा (JNUEE) की जांच के लिए भी एक कमेटी बनाई जाएगी.
- मेधा-सह-साधन (MCM) स्कॉलरशिप में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी पर विचार किया जाएगा.
- हॉस्टलों की बुनियादी सुविधाओं जैसे- दो हफ्ते के भीतर सभी हॉस्टलों में गीजर चालू करना, लाइब्रेरी का समय रात 9 बजे तक बढ़ाना और CSLG में कैंटीन खोलना शामिल है.

JNUSU ने क्या कहा?
तमाम मांगों पर समझौता होने के बाद जेएनयू छात्र संघ की तरफ से भी बयान जारी किया गया है. इसमें कहा गया है कि छात्र एकता ने प्रशासन को एक न्यायसंगत, समतावादी और सुलभ परिसर की हमारी मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर कर दिया है. जब तक हर एक वादे को लागू नहीं किया जाता, तब तक ये संघर्ष जारी रहेगा. छात्रों ने कहा है कि प्रशासन की तरफ से किए गए इन वादों को खोखले वादों और बैठकों में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा.
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