12 दिन से भूख हड़ताल पर JNU छात्र; जेंडर न्यूट्रल वॉशरूम, ट्रांसजेंडर्स के लिए हॉस्टल सहित NTA से दूरी भी है डिमांड लिस्ट में

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी है. 3 अक्टूबर से JNUSU प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा सहित 17 स्टूडेंट्स 'साबरमती टी पॉइंट' पर कई मांगों के साथ प्रोटेस्ट कर रहे हैं.

12 दिन से भूख हड़ताल पर JNU छात्र; जेंडर न्यूट्रल वॉशरूम, ट्रांसजेंडर्स के लिए हॉस्टल सहित NTA से दूरी भी है डिमांड लिस्ट में
जेएनयू के 17 छात्र 3 अक्टूबर से हंगर स्ट्राइक कर रहे हैं. (Photo: Sakib Mazeed/NDTV)

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में छात्रों का आंदोलन चल रहा है. 27 सितंबर से जेएनयू छात्रसंघ (JNUSU) के पदाधिकारियों और छात्रों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कैंपस के 'साबरमती टी पॉइंट' पर जारी है. JNUSU के मुताबिक, शुरुआत में 4 छात्रों ने हंगर स्ट्राइक शुरू की थी. वहीं, 3 अक्टूबर से 17 छात्र भूख हड़ताल पर हैं, जिनमें स्टूडेंट यूनियन की प्रेसिडेंट अदिति, वाइस प्रेसिडेंट गोपिका और जनरल सेक्रेटरी सुनील शामिल हैं. यह आंदोलन स्टूडेंट यूनियन के बैनर तले चल रहा है, लेकिन इसमें AISA, SFI, DSF, AISF, DISHA और PSA जैसे छात्र संगठन शामिल हैं. स्टूडेंट यूनियन ने कैंपस से जुड़े कई मुद्दों को लेकर यह आंदोलन शुरू किया था. इनमें हॉस्टल, लाइब्रेरी के इंफ्रास्ट्रक्चर, PhD में एडमिशन, कैंपस की सुरक्षा और JNUSU के पदाधिकारियों के सस्पेंशन से जुड़ी कई मांगें शामिल हैं.

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छात्रों का कहना है कि कुछ हॉस्टल करीब 50 साल पुराने हैं और उनकी कंडीशन खराब है. छात्रों के मुताबिक, पुरानी होती इमारतें, रुके हुए एडमिशन और असहमति के लिए कम होती जगह जेएनयू में बड़ी समस्याएं हैं.

प्रदर्शनकारी छात्र कहते हैं कि इन मुद्दों का सीधा असर उनकी पढ़ाई-लिखाई और कैंपस में बुनियादी सुविधाओं तक उनकी पहुंच पर पड़ता है. उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं देता, तब तक वे भूख हड़ताल जारी रखेंगे.

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हंगर स्ट्राइक पर बैठे स्टूडेंट्स की लिस्ट

हंगर स्ट्राइक पर बैठे स्टूडेंट्स की लिस्ट

आंदोलन कई मुद्दों को उठाने के लिए शुरू किया गया है. हमारी सभी मांगे बहुत ज्यादा जरूरी हैं. छात्रसंघ को चुने जाने के तीन महीने के अंदर ही बर्खास्त कर दिया गया और इल्जाम लगाया गया कि हमने लाइब्रेरी में तोड़फोड़ की.

दानिश अली

जॉइंट सेक्रेटरी, JNU छात्रसंघ 

छात्रों की क्या मांगें हैं?

  • CPO मैनुअल वापस लिया जाए. छात्रसंघ नेताओं का सस्पेंशन रद्द हो. JNU प्रशासन ने छात्रों पर अनुशासन के लिए एक नया नियम-कानून बनाया है. छात्रों के मुताबिक, ये बहुत सख्त है और वापस लिया जाना चाहिए.
  • यौन उत्पीड़न की शिकायतों के लिए पहले JNU में छात्रों-टीचरों वाली एक स्वतंत्र कमेटी (GSCASH) थी. उसे हटाकर अब एडमिन की कमेटी बना दी गई है. छात्र पुरानी कमेटी वापस चाहते हैं.
  • जेएनयू में अब एडमिशन NTA और CUET से होता है, जिसमें पेपर लीक और देरी होती है. छात्र चाहते हैं JNU में पहले की तरह खुद अपना एंट्रेंस एग्जाम सिस्टम शुरू किया जाए.
  • ट्रांसजेंडर छात्रों के लिए अलग हॉस्टल और सुविधाएं दी जाएं.
  • नए बराक हॉस्टल में अभी तक खाने और इंटरनेट की सुविधा ठीक से नहीं है, उसे तुरंत शुरू किया जाए.
  • कई हॉस्टल 50 साल पुराने हैं. लाइब्रेरी में जगह कम है. कावेरी, पेरियार, गोदावरी हॉस्टल की लिफ्ट खराब है. सड़कें टूटी हैं. Teflas बिल्डिंग, हेल्थ सेंटर की हालत खराब है. ये सब ठीक किए जाएं.और जेंडर-न्यूट्रल टॉयलेट बनाए जाएं.
  • मेस के बिल की जांच हो. गरीब छात्रों की स्कॉलरशिप (MCM) बढ़ाई जाए. PhD छात्रों की फेलोशिप (JRF) का काम एक जगह से न होकर हर सेंटर पर हो.
  • स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में पढ़ाने के लिए एक प्राइवेट कंपनी 'सिद्धांत नॉलेज फाउंडेशन' को लाया गया है, जो रिकॉर्डेड वीडियो से पढ़ाती है. छात्र कह रहे हैं इसे हटाया जाना चाहिए.
  • JNUSU का फंड रोक दिया गया है और मीटिंग्स में छात्रों को नहीं बुलाया जाता, पहले जैसी व्यवस्था लागू हो.
  • जब तक छात्र अपना PhD पूरा नहीं कर लेते, उसे हॉस्टल से न निकाला जाए.
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JNUSU का कहना है कि ये मुद्दे लंबे वक्त से स्टूडेंट कम्युनिटी की चिंता का विषय रहे हैं और एडमिनिस्ट्रेशन को इन पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.
JNUSU प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा

JNUSU प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा

छात्रसंघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा NDTV.in के साथ बातचीत में कहती हैं, "हम चांद-सितारे नहीं मांग रहे हैं. हम बेसिक चीजों की मांग कर रहे हैं, जो जेएनयू में हमेशा से रही है और सस्ते में रही हैं. प्रशासन हमें जितना परेशान करेगा, छात्रों की यूनिटी उतनी ही बढ़ेगी, जैसे पूरे देश का मौसम बदला है."

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JNU छात्रों क्यों पसंद नहीं NTA?

छात्रों का कहना है कि पीएचडी एडमिशन में बार-बार हो रही देरी से एकेडमिक कैलेंडर गड़बड़ा गया है. वे चाहते हैं कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के जरिए एडमिशन के बजाय JNU एंट्रेंस एग्जाम (JNUEE) को फिर से शुरू किया जाए, क्योंकि NTA के साथ पेपर लीक जैसे विवाद जुड़े रहे हैं.

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पीएचडी स्कॉलर धनंजय कहते हैं, "हम चाहते हैं कि जेएनयू की परीक्षाएं CUET के तहत होने के बजाय, विश्वविद्यालय में पहले के प्रोसेस JNUEE हो. इसके पीछे की वजह यह है कि जून से अक्टूबर आ गया और अभी तक पीएचडी का एडमिशन नहीं हुआ है क्योंकि एनटीए के तहत हुए एग्जाम में भारी धांधली हुई थी और कुछ सब्जेक्ट रिजल्ट रोक दिए गए थे. NTA की वजह से अभी तक लेट-लतीफी हो रही है और छात्र परेशान हैं."

प्रदर्शनकारी छात्र धनंजय

प्रदर्शनकारी छात्र धनंजय

'निजीकरण के खिलाफ भूख हड़ताल...'

स्कूल ऑफ लैंग्वेजेस के कन्वीनर और आंदोलनकारी छात्र गुलाम वारिस कहते हैं, "जेएनयू अपने उच्च दक्षता रखने वाले प्रोफेसर और कक्षाओं में होने वाले संवाद के लिए जाना जाता है लेकिन नई शिक्षा नीति के तहत स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज में एक निजी संस्था सिद्धांत फाउंडेशन को जेएनयू में जगह दी जा रही है, जो छात्रों को ऑनलाइन रिकॉर्डेड लेक्चर के जरिए पढ़ने को मजबूर कर रही है. हम इस निजीकरण और नई शिक्षा नीति के खिलाफ और जेएनयू की स्वायत्तता के लिए भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं."

प्रदर्शनकारी छात्र ग़ुलाम वारिस

प्रदर्शनकारी छात्र ग़ुलाम वारिस

कैंपस में सर्विलांस के खिलाफ पिछले साल हुए आंदोलन के दौरान शुरू हुई एक जांच के बाद, प्रेसिडेंट अदिति मिश्रा सहित यूनियन के चारों पदाधिकारियों को सस्पेंड कर दिया गया.

दानिश अली कहती हैं कि जेएनयू में आज के दौर में हर छोटी चीज के लिए हमें लड़ना पड़ता है. प्रोटेस्ट के लिए टेंट, गद्दे और पोस्टर लगाने के लिए भी हमें लड़ाई लड़नी पड़ती है. गार्ड्स आकर हमें मना करते हैं कि आप ये नहीं कर सकते हैं. हंगर स्ट्राइक पर बैठे हमारे तीन साथियों का मेडिकल चेक-अप नहीं किया जा रहा है.

मौजूदा वक्त में हंगर स्ट्राइक पर बैठे पीएचडी छात्र तनुज कहते हैं, "जेएनयू एक ऐसे मॉडल पर बनाया गया था कि जब आप किसी भी अथॉरिटी से सवाल पूछें, तो मुस्कान भरी निगाह के साथ मुद्दे को हल कर दे. जेएनयू इसलिए अलग था क्योंकि यहां पर प्रशासन और छात्रों के बीच दूरी नहीं हुआ करती थी. परस्पर संबंध रहता था."

मौजूदा जेएनयू प्रशासन के व्यवहार से ऐसा लगता है कि सरकार का ब्यूरोक्रेट बैठा हुआ और मिलने के लिए अपॉइंटमेंट लेना पड़ेगा. मिलने का वक्त न देकर वीसी साहिबा अपने नुमाइंदे भेज कर हमें डरा रही हैं, हमें धमकी दी जा रही है, जिससे हम प्रोटेस्ट खत्म कर दें.

तनुज

पीएचडी छात्र, जेएनयू

जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष अदिति मिश्रा हंसी वाले लहजे में कहती हैं, "जेएनयू में कुछ प्रोफेसर्स ऐसे हैं, जो एक दौर में प्रोग्रेसिव हुआ करते थे और आज के दौर में समझौता करके बैठे हैं. वे कहते हैं कि तुम्हारी क्रांति चप्पल से उतार देंगे. कॉमन छात्रों को प्रोफेसर्स के द्वारा यूनियन के सदस्यों के पास बैठने और घूमने से मना किया जाता है."