JEE Main Result 2026: कल जारी हुए जेईई मेन सेशन-1 (JEE Main Session 1 Result 2026) के नतीजों में भुवनेश्वर के रहने वाले महरूफ और मसरूर अहमद खान दो जुड़वा भाइयों ने तो कमाल ही कर दिया. दोनों भाइयों ने जेईई मेन में एक जैसा परसेंटाइल हासिल कर सबको चौका दिया है. इन दोनों भाइयों की सफलता की कहानी जितनी दिलचस्प है, उतनी ही मोटिवेशनल भी है. ऐसे में आइए आगे आर्टिकल में जानते हैं दोनों भाइयों के जेईई मेन में एक जैसे नंबर लाने के पीछे की पूरी कहानी...
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साथ पढ़ो और साथ बढ़ो फार्मूला
महरूफ और मसरूर ने बताया कि उनकी तैयारी का तरीका बहुत ही सीधा था 'साथ पढ़ो और साथ बढ़ो'. आपको बता दें कि 10वीं क्लास के बाद से ही दोनों भाई कोटा में तैयारी कर रहे हैं. मसरूर के मुताबिक, वे दोनों एक ही समय पर पढ़ने बैठते थे और एक ही शेड्यूल फॉलो करते थे. महरूफ का कहना है, "हम दोनों के बीच हमेशा एक हेल्दी कॉम्पिटिशन रहा. हम साथ में डाउट क्लियर करते थे और अगर कभी किसी के कम नंबर आते, तो दूसरा उसे मोटिवेट करता था. शायद यही वजह है कि हमारे नंबर एक जैसे आए हैं."
वहीं, मसरूर ने कहा, "हम Class 10 से कोटा में हैं और पिछले तीन सालों से अपने टीचर्स की गाइडेंस में कोचिंग मटीरियल का इस्तेमाल करके तैयारी कर रहे हूैं.
#WATCH | Kota, Rajasthan: Mahroof Ahmad Khan says, "Since the start, we studied together, clearing doubts together... We used to motivate each other when the results did not go well... This led to healthy competition and improved performance... We belonged to Bhubaneshwar,… pic.twitter.com/l6ShSQyXXK
— ANI (@ANI) February 17, 2026
इंजीनियरिंग के बाद देश सेवा करने का है सपना
जेईई मेन में शानदार प्रदर्शन के बाद अब इन दोनों भाइयों की नजर जेईई एडवांस (JEE Advanced) पर है. महरूफ का सपना है कि वह IIT बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग करें. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. महरूफ का असली मकसद इंजीनियरिंग के बाद देश की सेवा करना है, यानी वह आगे चलकर एक IAS ऑफिसर बनना चाहते हैं.
मां ने बच्चों के लिए छोड़ दी नौकरी
आपको बता दें कि इन दोनों भाइयों की इस बड़ी जीत के पीछे उनकी मां का बहुत बड़ा बलिदान है. जब महरूफ और मसरूर ने इंजीनियरिंग की तैयारी करने का फैसला किया, तो उनकी मां ने अपनी नौकरी छोड़ दी. वह अपने बच्चों के साथ ओडिशा से राजस्थान के कोटा शिफ्ट हो गईं, ताकि उनकी पढ़ाई और खान-पान का पूरा ख्याल रख सकें. आखिर में मां का बलिदान और बच्चों की मेहनत रंग लाई और दोनों बच्चों ने जेईई मेन का एग्जाम अच्छे पर्सेंटाइल के साथ पास कर लिया है.
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