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भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बसे गांव में रहने वाली हर्षिता ने किया कमाल, CBSE 10वीं में हासिल किए 99.8%

अपनी बेटी के कामयाबी पर हर्षिता के पिता ओमकार वर्मा बिलावर ने कहा, "हमारा घर बॉर्डर से ठीक उस पार है. पहले बहुत दिक्कतें होती थीं. हर रोज गोलीबारी होती थी. सीजफायर के बाद हालात में काफी सुधार आया है. शांति होने से बच्चों आसानी से पढ़ाई कर पा रहे हैं.

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर बसे गांव में रहने वाली हर्षिता ने किया कमाल, CBSE 10वीं में हासिल किए 99.8%
हर्षिता ने बताया कि वो स्कूल से घर आने के बाद लगातार छह घंटे पढ़ाई करती थीं.

सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में कई सारे छात्रों ने कमाल करके दिखाया है. इन छात्रों ने अच्छे अंक हासिल कर अपने परिवार के साथ-साथ गांव और जिले का नाम भी रोशन किया है. 16 साल की हर्षिता वर्मा ने भी इस साल सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा दी थी और बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. सबसे खास बता ये है कि  हर्षिता वर्मा का घर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से महज 500 मीटर से 1 किलोमीटर दूर स्थित हीरानगर सब-डिवीजन के गांव गुज्जर चक में बै साईं इंटरनेशनल स्कूल, हीरानगर की छात्रा हर्षिता जम्मू-कश्मीर में टॉपर रही हैं, जबकि पूरे देश में उनका दूसरा स्थान है. जीरो लाइन से सटे इस गांव में रहने वाली हर्षिता की सफलता ने पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ा दी है.

रिजल्ट जारी होने के बाद हर्षिता वर्मा के परिवार में खुशी ही लहर दौड़ी हुई है. हर्षिता ने आईएएनएस से बात करते हुए बताया, "मैंने सीबीएसई में 99.8 प्रतिशत स्कोर किया है. मैं जम्मू-कश्मीर में टॉपर हूं और ऑल इंडिया में मेरी दूसरी रैंक है." उन्होंने अपने स्कूल के शिक्षकों की खूब तारीफ की और कहा, "यहां के टीचर बहुत अच्छे हैं. उन्होंने मुझे बहुत अच्छे से गाइड किया. इसका पूरा श्रेय उन्हें जाता है."

हर्षिता के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं. पिता ओमकार वर्मा बिलावर के हायर सेकेंडरी स्कूल दुनेरा में और माता कडियाला में तैनात हैं. हर्षिता ने बताया कि उन्होंने पूरे साल नियमित पढ़ाई पर ध्यान दिया. स्कूल से घर पहुंचने के बाद दो घंटे आराम लेकर वह लगातार छह घंटे पढ़ाई करती थीं. नोट्स बनाती थीं और डाउट होने पर ऑनलाइन समाधान ढूंढ लेती थीं. उन्होंने कभी ट्यूशन भी नहीं लिया.

डॉक्टर बनने का है सपना

हर्षिता ने बताया कि वो आगे जाकर डॉक्टर बनना चाहती हैं. हर्षिता ने कहा, उनका सपना डॉक्टर बनने का है. वह वर्तमान में 'नीट' की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने कहा, "मैं नीट की तैयारी शुरू कर चुकी हूं और डॉक्टर बनना चाहती हूं. डॉक्टर बनना एक नेक पेशा है. इसमें हम दूसरों की जान बचा सकते हैं. डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है. मैं दूसरों की जान बचाना और उन्हें खुश रखना चाहती हूं."

छात्रा के पिता ओमकार वर्मा ने अपनी बेटी की सफलता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, "मुझे शब्दों में बयान नहीं कर सकता कि कितना गर्व महसूस हो रहा है. हर्षिता ने बहुत कड़ी मेहनत की है. हम तो बस उसे गाइड कर सकते थे, बाकी सब उसकी अपनी मेहनत है. स्कूल ने भी उसकी बहुत मदद की है."

ओमकार वर्मा ने सीमा क्षेत्र की कठिनाइयों का जिक्र करते हुए बताया, "हमारा घर बॉर्डर से ठीक उस पार है. पहले बहुत दिक्कतें होती थीं. हर रोज गोलीबारी होती थी, कई बार हम कई दिनों तक फंस जाते थे. स्कूल बस नहीं आती थी, इसलिए पढ़ाई में बहुत रुकावट आती थी, लेकिन अब सीजफायर के बाद हालात में काफी सुधार आया है. शांति होने से बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर नहीं पड़ रहा है."

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