
District Formation Power in India: देश में अक्सर प्रशासनिक सुविधा और बेहतर गवर्नेंस के लिए नए जिलों का गठन किया जाता है. आए दिन किसी न किसी राज्य में नया जिला बनने की खबर सुनने को मिलती रहती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक नया जिला बनाने का पॉवर किसके पास होता है, इसका फैसला राज्य सरकार लेती है या केंद्र सरकार, जिला बनाने से पहले किसकी मंजूरी लेनी पड़ती है, नए जिले को कैसे बनाया जाता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब...
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भारत में कुल कितने जिले हैं?
1961 में भारत में सिर्फ 339 जिले थे, जो अब इसका दोगुना हो चुके हैं. साल 2025 तक 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेशों में कुल 813 जिले हैं. सबसे बड़ा जिला गुजरात का कच्छ है, जो 45,674 वर्ग किमी में है. इसमें 10 तालुका, 939 गांव और 6 नगर निगम हैं.
नया जिला बनाने की पॉवर किसके पास है?
भारतीय संविधान और प्रशासनिक ढांचे के अनुसार, नए जिले का गठन पूरी तरह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र (State Power) में आता है. इसमें केंद्र सरकार का कोई सीधा रोल नहीं होता है. राज्य सरकार तय करती है कि कहां और कितने नए जिले बनाने हैं. इसके लिए बस विधानसभा से प्रस्ताव पारित करके, एक आधिकारिक नोटिफिकेशन गैजेट में जारी करना पड़ता है. इसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति या मंजूरी की जरूरत भी नहीं होती है. हालांकि, नए जिले के बनने के बाद उसका डेटा, सीमा और नाम भारत के जनगणना और केंद्र के रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है.
नया जिला कैसे बनता है?
एक नया जिला बनाने में पूरी प्रक्रिया फॉलो की जाती है. सबसे पहले राज्य का राजस्व विभाग (Revenue Department) एक कमेटी गठित करता है. यह कमेटी क्षेत्रफल, जनसंख्या, भूगोल और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर अपनी सिफारिश करती है. इसके बाद सरकार मुख्यमंत्री के कार्यकारी आदेश से या फिर विधानसभा में नया कानून पारित करके नए जिले की घोषणा करती है. आखिरी में नोटिफिकेशन जारी होते ही नया जिला बन जाता है.
नया जिला क्यों बनाया जाता है?
- प्रशासनिक कामकाज को आसान और तेजी से करना.
- दूरदराज इलाकों तक सरकारी योजनाएं पहुंचाना.
- जनसंख्या और क्षेत्रफल के हिसाब से संतुलन बनाना.
- विकास योजनाओं को सही तरह से सभी तक पहुंचाना.
- सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखना.
नया जिला बनने पर क्या होता है
जैसे ही नया जिला बनता है, कई प्रशासनिक बदलाव किए जाते हैं. सबसे पहले वहां जिला अधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) की नियुक्ति होती है. इसके बाद अन्य विभागों के अधिकारियों की पोस्टिंग की जाती है. जरूरत पड़ने पर नए डिवीजन का गठन भी किया जाता है. हाईकोर्ट के आदेशों के मुताबिक, उस जिले की न्यायिक व्यवस्था, कोर्ट और भूमि से जुड़े फैसले लिए जाते हैं.
क्या नया जिला बनाने में केंद्र सरकार का कोई रोल नहीं?
किसी भी नए जिले को बनाने में केंद्र यानी सेंटर का सीधा अधिकार नहीं होता है, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से वह कुछ अहम काम करता है. जैसे नए जिले को जनगणना (Census) के रिकॉर्ड में जोड़ना, प्रशासनिक नक्शों को अपडेट करना और केंद्रीय योजनाओं और फंड का जिला-वाइज डिस्ट्रीब्यूशन करना.
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