हरियाणा सरकार ने बुधवार को राज्य के सरकारी स्कूलों के करिकुलम में 'श्रमदान' को अनिवार्य हिस्सा बनाने का फैसला किया है. श्रमदान एक महत्वपूर्ण स्वैच्छिक योगदान है, जिसमें छात्र, शिक्षक और यहां तक कि स्थानीय लोग भी अपने स्कूल परिसर और आस-पास के समुदायों की सफाई और रखरखाव में अपनी भागेदारी देंगे. राज्य सरकार ने बुधवार को हुई एक बैठक के दौरान इस संबंध में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के सुझावों को स्वीकार किया है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए हैं. ताकि छात्रों में अनुशासन, भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके.
'श्रमदान' को करिकुलम में शामिल करने का उद्देश्य छात्रों से झाड़ू लगाने या जबरन काम कराने के बजाय उनमें अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक करना है.
टीचर्स के मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक
राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर पर एक रिव्यू मीटिंग की अध्यक्षता की और इस मीटिंग में मंत्री ढांडा भी मौजूद थे. स्कूलों के टीचिंग सिस्टम को और असरदार बनाने के लिए, शिक्षा मंत्री के सुझाव पर मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि टीचर क्लासरूम में मोबाइल फोन नहीं ले जाएंगे. टीचरों के मोबाइल फोन प्रिंसिपल के ऑफिस में जमा रहेंगे और टीचिंग के समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि पढ़ाई पर असर न पड़े और स्टूडेंट्स को बेहतर एकेडमिक माहौल मिले.
इस मौके पर, सैनी ने 'चीफ मिनिस्टर एक्सीलेंस एंड अर्ली इंग्लिश स्कूल्स' लॉन्च किया. बजट अनाउंसमेंट 2026-27 के मुताबिक, पहले फेज में 250 पहचाने गए स्कूलों का उद्घाटन किया गया. ये स्कूल हरियाणा बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन से जुड़े होंगे और हिंदी और इंग्लिश दोनों मीडियम में पढ़ाई देंगे. इन स्कूलों में मॉडर्न रिसोर्स, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब, स्मार्ट क्लासरूम और क्वालिटी टीचिंग सिस्टम डेवलप किए जाएंगे. स्टूडेंट्स के लिए क्वालिटी एजुकेशन पक्का करने के लिए टीचर और प्रिंसिपल को स्क्रीनिंग प्रोसेस के ज़रिए चुना जाएगा.
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