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Government College vs Private College: 12वीं के बाद सरकारी या प्राइवेट? जानें आपके करियर के लिए कौन सा है Best

12वीं के बाद सरकारी कॉलेज चुनें या प्राइवेट? जानिए फीस, प्लेसमेंट, NIRF रैंकिंग और सुविधाओं के मामले में दोनों में से कौन सा ऑप्शन आपके करियर के लिए सबसे बेस्ट रहेगा.12वीं के बाद सरकारी कॉलेज चुनें या प्राइवेट?

Government College vs Private College: 12वीं के बाद सरकारी या प्राइवेट? जानें आपके करियर के लिए कौन सा है Best
प्राइवेट कॉलेज तब चुनें जब आपका बजट अच्छा है या आप एजुकेशन लोन अफोर्ड कर सकते हैं.

Government College vs Private College : हर साल 12वीं का रिजल्ट आते ही लाखों स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स एक बड़े सवाल और दुविधा में फंस जाते हैं एडमिशन सरकारी कॉलेज (Government College) में कराएं या प्राइवेट (Private College) में? अगर आप या आपका बच्चा भी इसी कशमकश में है, तो चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं कि सरकारी और प्राइवेट कॉलेज के बीच का असली अंतर क्या है और आपके लिए कौन सा फैसला सही साबित होगा.

जेब पर कितना पड़ेगा असर?

सरकारी कॉलेज

यहां पढ़ाई का खर्च बहुत कम होता है. इंजीनियरिंग, मेडिकल या सामान्य कोर्सेज की सालाना फीस 10,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक हो सकती है. 

यहां हॉस्टल भी काफी सस्ते होते हैं और स्कॉलरशिप व सरकारी सब्सिडी का फायदा बी मिल जाता है. इसलिए इसका ROI यानी रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट सबसे बेस्ट माना जाता है.

प्राइवेट कॉलेज

यहां फीस का ग्राफ काफी ऊंचा है. कोर्स के मुताबिक सालाना फीस 1 लाख से 5 लाख रुपये या उससे भी अधिक हो सकती है. 

अगर बजट सीमित है, तो सरकारी कॉलेज ही सबसे सुरक्षित और अच्छा ऑप्शन है.

सरकारी और प्राइवेट की कैसी होती है एडमिशन प्रोसेस 

सरकारी कॉलेज

सरकारी स्कूल में एडमिशन पाना आसान नहीं होता है. आपको IIT, NIT या AIIMS जैसे टॉप संस्थानों के लिए JEE, NEET या CUET जैसे बेहद कठिन एंट्रेंस एग्जाम्स से गुजरना पड़ता है. 

हाई कट-ऑफ और तगड़े कॉम्पिटिशन को पार करने वाले चुनिंदा छात्रों को ही यहां सीट मिलती है.

प्राइवेट कॉलेज

जबकि निजी कॉलेज में एडमिशन की प्रोसेस थोड़ी आसान है. एंट्रेंस एग्जाम के अलावा यहां मेरिट, मैनेजमेंट कोटा या डायरेक्ट एडमिशन के जरिए भी दाखिला मिल जाता है.

पढ़ाई की क्वालिटी, फैकल्टी और इंफ्रास्ट्रक्चर में क्या है अंतर

सरकारी कॉलेज

यहां के प्रोफेसर्स बेहद एक्सपीरिएंस और क्वालिफाइड होते हैं. रिसर्च के लिए माहौल अच्छा होता है, लेकिन कई बार पुराना सिस्टम और सरकारी लेट-लतीफी के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर या लैब्स थोड़े पुराने नजर आ सकते हैं.

प्राइवेट कॉलेज

यहां के कोर्सेज इंडस्ट्री की लेटेस्ट डिमांड (जैसे AI, डेटा साइंस) के हिसाब से तुरंत अपडेट होते हैं. फैकल्टी यंग और डायनामिक होती है. स्मार्ट क्लासरूम, हाई-टेक लैब्स, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और शानदार कैंपस लाइफ के मामले में प्राइवेट कॉलेज काफी आगे रहते हैं.

कहां मिलेगा मोटा पैकेज?

  • प्लेसमेंट सिर्फ इस बात पर तय नहीं होता कि कॉलेज सरकारी है या प्राइवेट, बल्कि यह कॉलेज की साख और आपकी स्किल्स पर निर्भर करता है.
  • टॉप सरकारी संस्थान (जैसे IITs, IIMs) प्लेसमेंट के मामले में सबसे आगे हैं, जहां बड़ी-बड़ी MNCs और PSU (सरकारी कंपनियां) सीधे जॉब ऑफर करती हैं.
  • वहीं, देश के टॉप प्राइवेट कॉलेज भी पीछे नहीं हैं. उनका कॉर्पोरेट नेटवर्क बहुत मजबूत होता है, जिससे छात्रों को शानदार एवरेज पैकेज और विदेशी कंपनियों में काम करने का मौका मिलता है.
  • कॉलेज की सही स्थिति जानने के लिए हमेशा सरकार द्वारा जारी की जाने वाली NIRF Ranking (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) जरूर चेक करें.

आपके लिए कौन सा ऑप्शन है बेस्ट?

सरकारी कॉलेज कब चुनें

  • आपका बजट सीमित है और आप लोन के चक्कर में नहीं पड़ना चाहते.
  • एंट्रेंस एग्जाम में आपकी रैंक बेहतरीन है.
  • आपको मजबूत ब्रांड वैल्यू और रिसर्च पर फोकस करना है.
  • प्राइवेट कॉलेज तब चुनें जब आपका बजट अच्छा है या आप एजुकेशन लोन अफोर्ड कर सकते हैं.
  • आप आधुनिक सुविधाएं, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और बेहतरीन कैंपस लाइफ चाहते हैं.
  • आप ऐसे कोर्स चुनना चाहते हैं जो सीधे आज की कॉर्पोरेट इंडस्ट्री की जरूरतों से जुड़े हों.

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