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नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल की फीस में कितना अंतर? आखिर एडमिशन क्यों है इतना मुश्किल

नवोदय विद्यालय 1986 में शुरू हुए थे. इनका मकसद ज्यादातर ग्रामीण इलाकों के टैलेंटेड बच्चों को मॉडर्न क्वालिटी की एजुकेशन देना है. केंद्र सरकार नवोदय विद्यालय का सारा खर्च उठाती है. यहां 6 से 12 कक्षा के सभी छात्रों के लिए शिक्षा, रहना और खाना बिल्कुल मुफ्त होता है.

नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल की फीस में कितना अंतर? आखिर एडमिशन क्यों है इतना मुश्किल
सैनिक स्कूल रक्षा मंत्रालय के अधीन आते हैं

बच्चों के लिए जब अच्छा स्कूल चुनने की बारी आती है, तो अधिकतर मां-बाप के मन में नवोदय विद्यालय और सैनिक स्कूल का नाम जरूर आता है. हालांकि इन दोनों स्कूलों में काफी अंतर है. दाखिले से लेकर फीस तक दोनों स्कूलों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिलता है. जहां जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में शिक्षा लगभग पूरी तरह मुफ्त है. वहीं सैनिक स्कूल में फीस देनी पड़ती है. इन स्कूलों में बच्चों का दाखिला करवाना भी आसान नहीं हैं. बच्चों को एडमिशन तभी मिलता है, जब वो यहां का एग्जाम क्रैक कर पाते हैं. 

जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV)

नवोदय विद्यालय 1986 में शुरू हुए थे. इसका मकसद ज्यादातर ग्रामीण इलाकों के टैलेंटेड बच्चों को मॉडर्न क्वालिटी की एजुकेशन देना है. केंद्र सरकार नवोदय विद्यालय का सारा खर्च उठाती है. यहां 6 से 12 कक्षा के सभी छात्रों के लिए शिक्षा, रहना और खाना बिल्कुल मुफ्त होता है. लेकिन दाखिले की प्रक्रिया आसान नहीं होती है. दाखिले के लिए बच्चों को एंट्रेंस एग्जाम देना होता है. दूसरी और सैनिक स्कूल रक्षा मंत्रालय के अधीन आते हैं. इन स्कलों में बच्चों को NDA और सशस्त्र बलों के लिए तैयार करना होता है. यहां की सालाना फीस औसतन 1 लाख से 2 लाख की होती है.

सैनिक स्कूल में कैसे होता है दाखिला

सैनिक स्कूल में दाखिला अखिल भारतीय सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा (AISSEE) के जरिए होता है.  कक्षा 6 और कक्षा 9 में दाखिला के लिए AISSEE प्रवेश परीक्षा देनी होती है. यह परीक्षा भारत भर के शहरों में आयोजित की जाती है. इन स्कूल में CBSE बोर्ड का सिलेबस पढ़ाया जाता है. पढ़ाई के अलावा सैन्य प्रशिक्षण जैसे एनसीसी (NCC), मुक्केबाजी, निशानेबाजी भी सिखाई जाती है. यही वजह है कि अधिकतर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चों का दाखिला इन स्कूलों में हो सके.

UPSC जैसी परीक्षाओं में क्या है सक्सेस रेट 

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत नवोदय विद्यालय समिति जवाहर नवोदय विद्यालय को चलाती है. इन स्कूलों से पास होने वाले छात्रों ने हाल के समय में देश की बड़ी परीक्षाओं जैसे की UPSC, जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन मेन में अच्छा प्रदर्शन करके दिखाया है. साल 2024 में 35 JNV एल्युमनाई ने UPSC CSE सफलतापूर्वक पास किया था. साल 2021 में JNV के 28 एल्युम्नाई ने UPSC सिविल सर्विस एग्जाम-2021 क्रैक किया था. वहीं झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन-2021 के एग्जाम में पहले दो टॉपर, सावित्री और विनोद कुमार जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV), बोकारो और दुमका के एल्युम्नाई थे.

साल 2018 में नवोदय विद्यालय के 4360 ग्रामीण छात्रों ने JEE एडवांस्ड के लिए क्वालीफाई किया था. जबकि साल 2017 में 3563 छात्रों ने क्वालीफाई किया था. बता दें साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स में IIT/NIT जैसे बड़े संस्थानों में एडमिशन के लिए जॉइंट एंट्रेंस एग्जामिनेशन आयोजित किया जाता है.

जैसा की हमने आपको बताया था कि सैनिक स्कूलों का मुख्य मकसद कैडेट्स को नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के लिए तैयार करना होती है. अक्टूबर 2025 में कैप्टन मनोज कुमार पांडे सैनिक स्कूल, लखनऊ के 54 कैडेट्स ने NDA/INA की लिखित परीक्षा पास करके एक रिकॉर्ड बनाया था. इसके अलावा सितंबर 2024 में सैनिक स्कूल घोड़ाखाल  के कुल 60 बच्चे क्वालिफायर हुए थे. सितंबर 2025 में सैनिक स्कूल कोडागु के  23 कैडेट्स ने एग्जाम पास करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की.

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लेखक के बारे में
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रितु शर्मा
सीनियर सब एडिटर
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