DU Admission Despite Low CUET Scores: CUET UG का रिजल्ट आते ही लाखों छात्रों की धड़कनें बढ़ जाती हैं. हर साल बड़ी संख्या में ऐसे स्टूडेंट्स होते हैं, जिन्हें लगता है कि अगर उनके नंबर 90 परसेंटाइल से कम आए तो दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन का सपना लगभग खत्म हो जाएगा. लेकिन हकीकत पूरी तरह ऐसी नहीं है. डीयू में सिर्फ हिंदू कॉलेज, SRCC और हंसराज जैसे हाई कटऑफ वाले कॉलेज ही नहीं हैं, बल्कि कई ऐसे कॉलेज भी हैं जहां पिछले सालों में कंपेरिटिवली कम स्कोर पर छात्रों को एडमिशन मिला है. यही वजह है कि कम नंबरों के बावजूद कई स्टूडेंट्स DU में सीट हासिल कर लेते हैं. सही कॉलेज, सही कोर्स और स्मार्ट प्रेफरेंस फिलिंग कई बार कम स्कोर वाले छात्रों के लिए भी रास्ता खोल देती है.
पिछले साल किन कॉलेजों में रही कम कटऑफ?
पिछले एडमिशन राउंड के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ कॉलेजों में कम स्कोर पर भी एडमिशन मिला था. खासकर आरक्षित श्रेणियों के छात्रों को कई कोर्सों में कम नंबर पर सीट अलॉट हुई. साल 2024 की बात करें तो भगिनी निवेदिता कॉलेज में BA (Hons) History कोर्स में SC कैटेगरी के छात्रों को करीब 336 स्कोर पर एडमिशन मिला था. वहीं भारती कॉलेज में B.Sc (Hons) बॉटनी में SC वर्ग के कुछ छात्रों को लगभग 374 अंक पर सीट मिली थी.
जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स के लिए भी है मौका
ऐसा नहीं है कि कम स्कोर पर सिर्फ आरक्षित वर्ग के छात्रों को ही मौका मिलता है. पिछले सालों में देशबंधु कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और शिवाजी कॉलेज और कुछ ऑफ-कैंपस कॉलेजों में BA प्रोग्राम और कुछ B.Sc कोर्सों की कटऑफ कम देखी गई. कुछ कॉलेजो में 78-85 परसेंटाइल वाले छात्रों को भी एडमिशन मिल गया था.
हालांकि यह पूरी तरह सीट, कोर्स, कैटेगरी और एडमिशन राउंड पर निर्भर करता है. लेकिन, अगर किसी छात्र का लक्ष्य श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, हिंदू कॉलेज या हंसराज कॉलेज जैसे टॉप कॉलेज हैं, तो वहां आमतौर पर काफी हाई स्कोर की जरूरत पड़ती है. पिछले एडमिशन ट्रेंड में कई लोकप्रिय कोर्सों की कटऑफ 700 से लेकर 900 के आसपास नॉर्मलाइज्ड स्कोर तक जाती देखी गई है. हालांकि पिछले सालों के आंकड़ों को सिर्फ ट्रेंड के तौर पर देखना चाहिए. असली कटऑफ एडमिशन राउंड शुरू होने के बाद ही साफ होगी.
CSAS पोर्टल का क्या है रोल?
दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन CUET स्कोर के आधार पर CSAS पोर्टल के जरिए होता है. यहां छात्रों को कॉलेज और कोर्स की प्रेफरेंस भरनी होती है. कई छात्र सिर्फ बड़े नाम वाले कॉलेज चुनते हैं और ज्यादा विकल्प नहीं भरते, जिससे सीट मिलने की संभावना कम हो जाती है. ऐसे में ज्यादा कॉलेज और ज्यादा कोर्स चुनना फायदेमंद माना जाता है.
कुल मिलाकर CUET में कम स्कोर आने का मतलब यह नहीं है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी का सपना खत्म हो गया. ऐसी स्थिति में निराश होने या घबराने के बजाय छात्रों को कॉलेज और कोर्स चुनते समय स्मार्ट रणनीति अपनानी चाहिए. सही प्रेफरेंस फिलिंग, ज्यादा विकल्प और एडमिशन राउंड्स पर नजर रखने से कम स्कोर वाले छात्रों के लिए भी DU का रास्ता खुल सकता है.
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