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दिल्ली के छात्र का रॉकेट साइंस बदलने का आइडिया, 2026 में प्रोटोटाइप लॉन्च की तैयारी

Rocket Launch Science: श्रेयांस बताते हैं कि उनके लिए फंडिंग एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट में उनके परिवार और दोस्तों ने उनका खूब साथ दिया. अब उन्होंने एक छोटी कंपनी बनाई है और आइडिया के पेंटेंट के लिए एप्लीकेशन भी फाइल कर दी है.

दिल्ली के छात्र का रॉकेट साइंस बदलने का आइडिया, 2026 में प्रोटोटाइप लॉन्च की तैयारी
रॉकेट लॉन्च को लेकर छात्र का आइडिया

Rocket Launch Science: टेक्नोलॉजी के इस दौर में स्कूली बच्चों को अपनी इनोवेशन और टैलेंट दिखाने का भरपूर मौका मिल रहा है. कई बच्चे स्कूल में ही ऐसा काम कर रहे हैं, जो पहले आईआईटी जाकर हुआ करते थे. ऐसा ही एक कारनामा दिल्ली के वसंत विहार के श्रीराम स्कूल में पढ़ने वाले श्रेयांस जैन ने भी किया है. श्रेयांस ने इनोवेटर गुब्बारे की मदद से रॉकेट लॉन्च करने का नया तरीका इजात किया है, जो किसी साइंस फिक्शन से कम नहीं है. आइए जानते हैं कि क्या है ये अनोखी चीज और कैसे स्कूली बच्चे ने इसे तैयार किया. 

कैसे काम करता है ये आइडिया?

श्रेयांस की अपनी एक कंपनी भी है, जिसने ये खास सिस्टम बनाया है. इसमें बड़ा गुब्बारा रॉकेट को ऊपरी वायुमंडल तक ले जाता है, जहां हवा बहुत पतली होती है, फिर वहां से रॉकेट अपना इंजन शुरू करता है. जमीन से लॉन्च करने में रॉकेट को घनी हवा और गुरुत्वाकर्षण से बहुत लड़ना पड़ता है, जिससे ढेर सारा ईंधन बर्बाद होता है. इस नए तरीके से ईंधन की बचत होती है और रॉकेट 2-3 गुना ज्यादा सामान अंतरिक्ष में ले जा सकता है. 

इसे टेक्नोलॉजी को लेकर श्रेयांस कहते हैं कि ऊंचाई पर हवा का विरोध कम होता है, इसलिए रॉकेट ज्यादा कुशलता से काम करता है. अगर न्यूक्लियर प्रोपल्शन जैसे एडवांस्ड सिस्टम जोड़े जाएं, तो ग्रहों के बीच यात्रा भी बहुत तेज हो सकती है. 

बचपन का शौक बन गया सपना

श्रेयांस को छोटी उम्र से ही स्पेस और रॉकेट साइंस को लेकर काफी दिलचस्पी थी. वो सालों से मॉडल रॉकेट बनाते और लॉन्च करते आए हैं. आइडिया तब आया जब वे सोच रहे थे कि रॉकेट लिफ्टऑफ में इतना ईंधन क्यों खर्च करता है? आज जब स्पेसएक्स जैसी कंपनियां ऑर्बिट में रिफ्यूलिंग कर रही हैं, तो लॉन्च का पुराना तरीका क्यों नहीं बदलता? 

क्या हैं आगे की चुनौतियां?

स्कूली छात्र श्रेयांस ने पहले अकेले ही इस पर काम किया, लेकिन बाद में टीम की जरूरत महसूस हुई, जिसमें आईआईटी ग्रेजुएट्स भी शामिल हुए. अब ये टीम विंड टनल टेस्ट और छोटे एक्सपेरिमेंट कर रही है. 2026 के आखिर तक प्रोटोटाइप लॉन्च करने का प्लान है, जिसके बाद इसे सार्वजनिक तौर पर मार्केट में लॉन्च किया जा सकता है, हालांकि इससे पहले इसके लिए मंजूरी मिलना जरूरी है. 

पेटेंट भी किया फाइल 

श्रेयांस बताते हैं कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग थी, एक छात्र होने के नाते उन्हें इनवेस्टर आसानी से नहीं मिल पाए, लेकिन परिवार और दोस्तों का पूरा साथ मिला. फिलहाल वो इस आइडिया का पेटेंट भी फाइल कर चुके हैं और अब कमर्शियल लॉन्च का सपना देख रहे हैं. उनका कहना है कि आउट ऑफ द बॉक्स सोचने और चीजों को गहराई से समझने पर ये सब मुमकिन होता है. फिलहाल श्रेयांस युवाओं के लिए एक बड़ी इंस्पिरेशन के तौर पर सामने आए हैं. 

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