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पैसे न होने पर काट दिया गया था स्कूल से नाम, अब इस इंसान के पास हैं 138 डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र

सेना की नौकरी के दौरान भी दशरथ सिंह का पढ़ाई करने का जज्बा कम नहीं हुआ. पंजाब, जम्मू-कश्मीर, असम जैसे ‘कठिन’ इलाकों में वो कई सालों तक तैनात रहे. वहीं सेना की सेवा पूरी करने के बाद उन्होंने अपना सारा ध्यान पढ़ाई में लगा दिया.

पैसे न होने पर काट दिया गया था स्कूल से नाम, अब इस इंसान के पास हैं 138 डिग्री, डिप्लोमा और प्रमाणपत्र
सिंह तीन जुलाई 2004 को सेवानिवृत्ति के बाद, वर्तमान में सेना में बतौर विधि सलाहकार के रूप में सेवाएं दे रहे हैं.

आज हम आपको एक ऐसे इंसान के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके पास कुल 138 डिग्री, डिप्लोमा एवं प्रमाणपत्र हैं.  राजस्थान में झुंझुनूं जिले के डॉ. दशरथ सिंह का नाम ‘इंरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में ‘मोस्ट एजुकेशनली क्वालिफाइड पर्सन ऑफ द वर्ल्ड' यानी विश्व के सबसे ज्यादा शैक्षणिक योग्यता रखने वाले व्यक्ति के रूप में दर्ज है. दशरथ सिंह को हाल ही में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के 39वें दीक्षांत समारोह में 138वीं डिग्री दी गई. उन्होंने ‘वैदिक अध्ययन में परास्नातक' की डिग्री ‘विशिष्ट योग्यता' के साथ हासिल की है.

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55 साल के दशरथ सिंह शिक्षा के क्षेत्र में 11 विश्व रिकॉर्ड बना चुके है और इस समय भारतीय सेना एवं रक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार हैं. दशरथ सिंह ने 3 विषयों में पीएचडी, 7 में स्नातक, 46 में स्नातकोत्तर, 23 में डिप्लोमा, सेना से संबंधित 7 विषयों में डिग्री और 52 विषयों में प्रमाणपत्र हासिल कर रखा है.

"फीस न देने के चलते काट दिया था नाम"

नवलगढ़ तहसील के खिरोड़ गांव में जन्मे दशरथ अपनी इस उपलब्धि पर कहते हैं, “मेरे परिवार में कोई पढ़ा लिखा नहीं था और न ही पढ़ाई-लिखाई का कोई माहौल था. गांव के एक छोटे से स्कूल से प्रारंभिक पढ़ाई की. मैंने 10वीं तक की शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय से पूरी की. घर की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण महाविद्यालय की पढ़ाई करना एक सपने जैसा था. फिर एक दिन कुछ दोस्तों के साथ मैंने घर से 13 किमी दूर स्थित सेठ जीबी पोद्दार महाविद्यालय नवलगढ़ में प्रवेश ले लिया.”

दशरथ के नाम शिक्षा के क्षेत्र में 11 रिकॉर्ड हैं, जिनमें ‘इंडिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', दो ‘हॉवर्ड बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', ‘एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', ‘इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड', ‘यूएसए बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', ‘लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', ‘यूएन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड', ‘ग्लोबल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' और ‘नेशनल बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड' शामिल हैं.

“फीस और किताबों के अभाव में महाविद्यालय से मेरा नाम काट दिया गया था. लेकिन मैंने महाविद्यालय प्राचार्य से निवेदन किया तो मुझे 10 दिन का समय दिया गया. उस समय मैं अपने खेत में उपजी सब्जियां शहर की मंडी में बेचने 13 किमी पैदल गया और उससे मिले पैसे से फीस जमा कराई.  दशरथ सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा' को बताया कि उन्हें पहली तैनाती 1989 में पंजाब में मिली थीं. इसके बाद वह उल्फा आंदोलन के दौरान 1991 में असम में रहे. लगातार फील्ड ड्यूटी के बाद उन्हें कुछ समय के लिए लखनऊ भेजा गया, लेकिन इसी दौरान संसद पर हमला हुआ तो उन्हें वापस जम्मू कश्मीर भेज दिया गया. बाद में वह कारगिल युद्ध में शामिल रहे.

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"हजारों परीक्षाएं दी हैं"

सिंह ने सेवानिवृत्ति के बाद पढ़ाई शुरू की. पहली डिग्री ‘बैचलर ऑफ कॉमर्स' की ली तथा एलएलबी, एलएलएम, बीजेएमसी और बीएड की डिग्री नियमित छात्र के रूप में ली है. उन्होंने बाकी डिग्री और डिप्लोमा इग्नू, जैन विश्व भारती लाडनूं और कुछ निजी विश्वविद्यालयों से प्राप्त की हैं. दशरथ का दावा है कि वे अब तक हजारों परीक्षाएं दे चुके हैं.

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दशरथ ने आगे कहा, “सेना में दो महीने की छुट्टी हर साल मिलती है. मैं यह छुट्टी मई-जून में ही लेता था. नौकरी के दौरान कभी होली-दिवाली या अन्य त्योहारों के लिए छुट्टी नहीं ली. सेवानिवृत्ति के बाद फिर सरकारी नौकरी मिली, लेकिन लगा कि सैनिकों के लिए कुछ करना चाहिए इसलिए मैंने कानून की डिग्री हासिल कर वकालत शुरू कर दी."

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