Coempt Edu Teck CBSE contract : 2026 में CBSE की आंसर शीट के मूल्यांकन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कम अंकों की शिकायतों से कहीं आगे निकल गया है. सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) की डिजिटल मार्किंग सिस्टम यानी OSM अब बोर्ड के लिए गले की हड्डी साबित होती दिख रही है. सीबीएसई ने जिस नई व्यवस्था को इस साल का 'मील का पत्थर' बताया था, उसके सारे दावे अब धराशायी होते दिख रहे हैं. कॉपियों के आपस में बदल जाने, स्कैन की गई कॉपियों के धुंधले होने, पोर्टल के बार-बार क्रैश होने और पुनर्मूल्यांकन के लिए ज्यादा फीस लिए जाने की खबरों ने परीक्षा प्रक्रिया में ही विश्वास का संकट खड़ा कर दिया है.
हैकिंग का भी दावाइतना ही नहीं बीते दिन तो एक सिक्योरिटी रिसर्चर ने ओएसएम सिस्टम को हैक करने का दावा तक कर दिया. रिसर्चर ने बकायदा वीडियो जारी करके बताया था कि उसने कैसे मार्किंग सिस्टम को हैक किया. हालांकि, सीबीएसई ने दावे को नकार दिया. बोर्ड ने बयान जारी करके कहा सोशल मीडिया का दावा झूठा है.
Clarification Regarding Claim of Compromise of CBSE OSM Portal
— CBSE HQ (@cbseindia29) May 26, 2026
In a post made by a user on social media, it has been claimed that the CBSE On Screen Marking (OSM) bearing URL: https://t.co/cuLrvsxzOH was compromised by him on 26.02.2026. This has also formed the basis for a few…
लगातार सीबीएसई के नए मार्किंग सिस्टम से जुड़े विवाद ने छात्रों और अभिभावकों में आक्रोश पैदा कर दिया है.
सोशल मीडिया पर फूटा छात्रों का गुस्सा
आपको बता दें कि कई छात्रों ने X और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्क्रीनशॉट और वीडियो साझा किए, जिनमें भारी भरकम फीस देने के बाद धुंधली आंसर शीट और अलग-अलग छात्रों की आंसर शीट के आपस में अदला-बदली होने की खामियों को उजागर किया है. इस नए मार्किंग सिस्टम ने रिजल्ट बेहतर करने के बजाय पिछले कई सालों का रिकॉर्ड खराब कर दिया. जिसको लेकर लगातार सीबीएसई की फजीहत हो रही है.
राजनीतिक मोड़: राहुल गांधी ने कंपनी के इतिहास पर उठाए सवाल
इतना ही नहीं सीबीएसई की नई मार्किंग सिस्टम को लेकर सियासत भी तेज हो गई है. विपक्षी दल कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने सीबीएसई के नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाया है. विवाद के केंद्र में Coempt Edu Teck नाम की कंपनी है, जो बोर्ड की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को संभाल रही है.
CBSE परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 27, 2026
और मोदी जी? हमेशा की तरह - न जवाब, न ज़िम्मेदारी, न शर्म।
जिस कंपनी COEMPT को यह ज़िम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कारनामे कर चुकी है।
नाम… pic.twitter.com/iZG8bvUXPJ
राहुल गांधी का आरोप है कि जिस कंपनी COEMPT को यह जिम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कारनामे कर चुकी है. इसके बाद भी इसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई?
ऐसे में आइए जानते हैं डिजिटल मार्किंग सिस्टम की जिम्मेदारी उठा रही इस कंपनी का पूराना इतिहास क्या है, जिसको लेकर सीबीएसई की विश्वनियता पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.
क्या है Coempt Edu Teck का इतिहास?
Coempt Edu Teck, जो अब CBSE विवाद के कारण जांच के दायरे में है, पहले भी परीक्षा से जुड़े एक अन्य विवाद के कारण आलोचना का सामना कर चुकी है. जी हां, यह कंपनी पहले 'Globarena Technologies' के नाम से काम करती थी.
2019 का तेलंगाना इंटरमीडिएट विवाद2019 में, तेलंगाना इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों में गड़बड़ियों की रिपोर्ट सामने आने के बाद, Globarena Technologies का नाम तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा से जुड़े एक विवाद में सामने आया था. इसमें 3 लाख से ज्यादा छात्रों ने नंबर में गड़बड़ी की शिकायत की थी.
उस वक्त जब जांच हुई तो कहा गया कि बिना टेस्ट किए ही इस सिस्टम को लागू कर दिया गया है. जिससे ये समस्या सामने आई, फिर globarena कंपनी का कंट्रैक्ट रद्द कर दिया गया.
उस समय, तेलंगाना में विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि कंपनी को यह ठेका इसलिए मिला, क्योंकि राज्य सरकार में शामिल वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ उसके करीबी संबंध थे.
Coempt Edu Teck पर नाम बदलने का भी आरोपअब आरोप लग रहा है कि इसी कंपनी ने नाम बदलकर फिर से बिड किया. यह विवाद तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया गया कि आईआईटी मद्रास के एक पूर्व प्रोफेसर कंपनी में डायरेक्टर हैं और इसी IIT मद्रास के प्रोफेसर OSM की तकनीकी गड़बड़ी की जांच की थी.
CEO की सफाईहालांकि, Coempt के मुख्य कार्यकारी (CEO) वीएसएन राजू (VSN Raju) ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कंपनी ने तकनीकी और वित्तीय, दोनों मापदंडों पर खरा उतरने के बाद ही टेंडर हासिल किया था.
उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन करने के साथ-साथ कम कीमत पर अपनी सेवाएं देने का प्रस्ताव भी रखा था. कंपनी स्वयं को परीक्षा संबंधी समाधान प्रदान करने वाली एक अनुभवी संस्था के रूप में प्रस्तुत करती है.
25 साल का अनुभव और बड़ा दावा- बता दें कि कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, Coempt का दावा है कि उसे सर्टिफिकेट देने वाली संस्थाओं के लिए परीक्षा प्रणालियों को ऑटोमेट करने में 25 साल से ज्यादा का एक्सपीरिएंस है.
- कंपनी का कहना है कि वह परीक्षा से पहले का मैनेजमेंट, प्रश्न पत्रों को संभालना, AI-बेस्ड ऑनलाइन एग्जाम्स, आंसर शीट का डिजिटलीकरण, डिजिटल इवैल्यूशन और परीक्षा के बाद की सेवाओं सहित कई सेवाएं प्रदान करती है.
आपको बता दें कंपनी ने जाने-माने शिक्षाविद सदगोपन (Sadagopan ) को अपना चेयरमैन भी नियुक्त किया है.
बोर्ड ने राहुल गांधी के आरोपों का किया खंडन
CBSE rejects the allegations regarding the award of contract to Coempt Edutech. It is erroneous, misleading and not based on facts.
— CBSE HQ (@cbseindia29) May 27, 2026
CBSE has followed the General Financial Rules protocols scrupulously in the awarding of the contract to the agency. CBSE floated the RFP for…
हालांकि सीबीएसई ने राहुल गांधी के Coempt edustech को कंन्ट्रैक्ट दिए जाने से संबंधित आरोपों को खारिज किया है. बोर्ड ने कहा है विपक्षी दल के नेता के आरोप भ्रामक हैं.
क्या है यह OSM प्रणाली, जिससे मचा है बवाल?
OSM प्रणाली को CBSE ने हाल ही में समाप्त हुए शैक्षणिक सत्र के दौरान पहली बार शुरू किया था.
कैसे काम करता है सिस्टमइस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत, उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड किया जाता है, ताकि टीचर्स कागज की कॉपियों को हाथ से जांचने के बजाय उन्हें स्क्रीन पर देखकर जांच सकें.
मूल्यांकन के बाद, अगर छात्र अपनी उत्तर पुस्तिकाओं का सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन करवाना चाहते हैं, तो वे एक निर्धारित शुल्क का भुगतान करके अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां देख सकते हैं.
98 लाख कॉपियों का बोझइस साल कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 18 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए थे, जिनकी लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन और डिजिटाइज किया जाना था. इतने बड़े पैमाने पर की गई स्कैनिंग और डेटा मैनेजमेंट में आई तकनीकी खामियों ने ही अब इस बड़े विवाद को जन्म दे दिया है.
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