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CBSE के अलावा किन परीक्षाओं में होता है ऑन स्क्रीन मार्किंग का इस्तेमाल, इससे छात्रों का फायदा या नुकसान?

CBSE On-Screen Marking System: सीबीएसई 12वीं के रिजल्ट के बाद ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, कुछ छात्रों का दावा है कि इस डिजिटल तरीके से उनका रिजल्ट खराब हुआ है और नंबर कम दिए गए हैं.

CBSE के अलावा किन परीक्षाओं में होता है ऑन स्क्रीन मार्किंग का इस्तेमाल, इससे छात्रों का फायदा या नुकसान?
CBSE On-Screen Marking: इन परीक्षाओं में होता है ऑन स्क्रीन मार्किंग का इस्तेमाल

CBSE On-Screen Marking System: CBSE 12वीं परीक्षा का रिजल्ट हाल ही में जारी किया गया था, हालांकि इस रिजल्ट के बाद सोशल मीडिया पर नई बहस छिड़ गई है. कई छात्र ऐसे हैं, जो जेईई मेन में तो पास हो चुके हैं, लेकिन 12वीं में उनके 75 फीसदी नंबर नहीं आए. इसके लिए छात्र ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) को जिम्मेदार बता रहे हैं, उनका आरोप है कि इस डिजिटल सिस्टम के चलते उन्हें नंबर ठीक से नहीं मिले और रिजल्ट खराब हो गया. इस पूरे मामले पर सीबीएसई की तरफ से सफाई सामने आई और बताया गया कि ये सिस्टम कितना सेफ है और बाकी कौन से संस्थान पहले से ही इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. 

CBSE ने क्या कहा?

ऑन स्क्रीन मार्किंग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बोर्ड की तरफ से छात्रों को बताया गया कि ये एक डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली (कंप्यूटर पर कॉपी जांचने का सिस्टम) है. इसे कॉपियों की जांच को ज्यादा सटीक, पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. बोर्ड ने बताया कि इसके तहत स्कैन की गई कॉपियों की जांच टीचर्स ऑनलाइन करते हैं. इससे यह सुनिश्चित होता है कि कॉपियां मार्किंग स्कीम के अनुसार ही चेक हों. साथ ही, नंबरों को जोड़ने और उनकी लिस्ट बनाने में इंसानी गलतियों की गुंजाइश भी कम हो जाती है.

बोर्ड की तरफ से ये भी बताया गया कि इस डिजिटल तरीके में सवाल का जवाब कैसे चेक किया जाता है. बोर्ड ने कहा कि OSM मूल्यांकन को निष्पक्ष बनाता है, क्योंकि इसमें सिर्फ आखिरी आंसर देखने के बजाय इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि छात्र को कॉन्सेप्टकी कितनी समझ है. 

कहां इस्तेमाल हो रहा है ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम?

CBSE की तरफ से ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) का बचाव करते हुए बताया गया कि पहले से ही कई बड़े संस्थान इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. बोर्ड ने बताया कि मुंबई यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी, इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और IB बोर्ड भी पहले से OSM का इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके अलावा दुनिया के कई देशों में भी ऐसे ही कॉपियों को चेक किया जाता है. इस बार करीब 90 लाख कॉपियों की डिजिटल रूप से चेकिंग हुई है. 

छात्रों के लिए फायदा या नुकसान?

सोशल मीडिया पर कई छात्र भले ही इस डिजिटल सिस्टम पर सवाल उठा रहे हों, लेकिन इतना तो साफ है कि इस सिस्टम में गलती की गुंजाइश काफी कम हो जाती है. जिन्हें फिर भी इस सिस्टम को लेकर शक है, वो अपनी डिजिटल कॉपी 100 रुपये की फीस देकर मंगवा सकते हैं. ये वही डिजिटल कॉपी होगी, जिसे ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए स्कैन किया गया था. अगर वाकई किसी सवाल में कम नंबर दिए गए हैं तो इसे चैलेंज किया जा सकता है, सही पाए जाने पर 100 रुपये की फीस भी रिफंड कर दी जाएगी. 

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