केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएमएस) को लेकर रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और 12वीं क्लास के पेपर चेकिंग के लिए इस्तेमाल हुए ओएमएस सिस्टम को एकदम सही करार दिया था. साथ ही सीबीएसई ने कहा था कि जिन भी छात्रों को ऐसा लगता कि उनके अंक उम्मीद से कम आए हैं, वो री-चेकिंग की मदद से अपनी कॉपी की फिर से जांच करवा सकते हैं. हालांकि री-चेकिंग के दौरान फिर से ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग' के इस्तेमाल को लेकर छात्र चिंतित हो रहे हैं. छात्र चाहते हैं कि री- इवैल्यूएशन के दौरान उनकी कॉपी की जांच फिजिकल की जाए.
एक ने एक्स यूजर ने पोस्ट करते हुए लिखा, CBSE को 12वीं कक्षा के साथ प्रयोग नहीं करना चाहिए. हम कम अंक पाने वाले छात्रों के लिए हाथों से कॉपियों की जांच या ग्रेस मार्क्स की मांग करते हैं.
CBSE should not experiment with Class 12 through varying paper difficulty,digital evaluation as many are losing eligibility for college admission due to low PCM. We want physical re-evaluation or grace marks for low-scoring students
— premalatha (@haieuphorbia) May 17, 2026
+10 marks for below 60%
+5 for above 60-90%
Thousands of CBSE Class 12 PCM students are already distressed over unexpectedly low scores under the OSM evaluation system. Now there is apprehension that marks may decrease further during re-evaluation instead of fair correction. Students need transparency, proper moderation
— Mohd. Estiyak (@md_estiyak) May 17, 2026
CBSE revises rates:
— Mohit Chauhan (@mohitlaws) May 17, 2026
Re-evaluation: ₹25 per question
Verification of marks: ₹100 per subject
Scanned answer sheet: ₹100 per subject
CBSE will offer refund if marks increased. https://t.co/o1FsS96A0p pic.twitter.com/JAN8lkbqSt
क्या है पूरा मामला
छात्रों और अभिभावकों का मानना है कि OSM प्रणाली के कारण ही इस बार एग्जाम में अंक कम आए हैं. मार्किंग पहले से ज्यादा सख्त हो गई है, जिसके चलते कई होनहार छात्रों के अंक उम्मीद से कम आए. CBSE 12वीं क्लास के कई स्टूडेंट्स का कहना है कि डिजिटल स्क्रीन से स्टेप-मार्किंग पर असर पड़ा है. स्क्रीन पर लंबे जवाबों को पढ़ना और समझना मुश्किल होता है. ऐसे में टीचर मूल्यांकन जल्दी-जल्दी करते हैं. सोशल मीडिया पर कई स्टूडेंट्स पोस्ट कर दावा कर रहें हैं कि नए डिजिटल चेकिंग के कारण उनके अंक कम आए हैं.
7/7
— 𝘢𝘳𝘯𝘢𝘣* (@stfu_arnab) May 17, 2026
I request CBSE to urgently review such cases, make the checking process transparent, and stop forcing students to pay heavily just to verify whether their papers were assessed correctly.
CBSE ने छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए री-इवैल्यूएशन और आंसर शीट के वेरिफिकेशन की फीस कम कर दी है. अगर छात्र अपनी आंसर शीट देखना चाहते हैं, तो अब उन्हें 700 रुपे के बजाय अब सिर्फ़ 100 रुपये देने होंगे. वेरिफिकेशन के लिए, 500 के बजाय 100 रुपये की फीस ली जाएगी. किसी खास जवाब की दोबारा जांच के लिए, हर सवाल पर 25 रुपये की फीस लगेगी. इतना ही नहीं अगर री-इवैल्यूएशन के बाद किसी छात्र के नंबर बढ़ते हैं, तो उनके फीस वापस कर दी जाएगी.
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