AYUSH Scholarship 2026: भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों आयुर्वेद, योग और यूनानी का डंका अब पूरी दुनिया में बज रहा है. इसी कड़ी में आयुष मंत्रालय ने एकेडेमिक सेशन 2026-27 के लिए 'AYUSH Scholarship Scheme' के तहत 104 छात्रवृत्तियों की घोषणा की है. यह उन विदेशी छात्रों के लिए एक सुनहरा मौका है जो भारत में रहकर अंडरग्रेजुएट (UG), पोस्टग्रेजुएट (PG) और पीएचडी (PhD) करना चाहते हैं. तो चलिए जानते हैं इस स्कॉलरशिप में आपको क्या-क्या मिलेगा.
AYUSH Scholarship 2026: कितना मिलेगा पैसा?
भारत सरकार न केवल शिक्षा का खर्च उठाएगी, बल्कि छात्रों के रहने और खाने के लिए मासिक वजीफा (Stipend) भी देगी:
UG (अंडरग्रेजुएट)18,000 रुपये मासिक वजीफा + 6,500 रुपये तक का घर किराया भत्ता (HRA) + 5,000 रुपये वार्षिक अनुदान.
PG (पोस्टग्रेजुएट)20,000 रुपये मासिक वजीफा + 7,000 रुपये HRA.
PhD (पीएचडी)22,000 रुपये मासिक वजीफा + 12,500 रुपये तक का HRA.
अतिरिक्त लाभप्रोजेक्ट रिपोर्ट वाले कोर्स के लिए 7,000 रुपये का एकमुश्त थिसिस ग्रांट भी दिया जाएगा.
AYUSH Scholarship 2026: स्कॉलरशिप के लिए क्या योग्यता है
इस स्कॉलरशिप का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी नियमों का पालन करना होगा:
आयु सीमाछात्र की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए. UG/PG के लिए अधिकतम उम्र 35 वर्ष और PhD के लिए 40 वर्ष तय की गई है.
पासपोर्ट1 जुलाई 2026 तक कम से कम 2 साल की वैधता वाला पासपोर्ट अनिवार्य है.
अंग्रेजी भाषाछात्रों को अंग्रेजी में निपुण होना चाहिए. इसके लिए 500 शब्दों का एक निबंध या IELTS/TOEFL का स्कोर जमा करना होगा.
सब्जेक्ट सेलेक्शनअगर आप साइंस या इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं, तो 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ/बायोलॉजी होना जरूरी है.
आवेदन कैसे करें?
छात्रों को केवल ICCR के आधिकारिक पोर्टल a2ascholarships.iccr.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना होगा. किसी भी अन्य माध्यम (जैसे मिशन या यूनिवर्सिटी) से सीधे आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
खास बातछात्र अपनी पसंद के 5 संस्थानों का चयन कर सकते हैं, लेकिन एक बार कॉलेज या कोर्स मिलने के बाद उसे बदला नहीं जा सकेगा.
AYUSH Scholarship 2026: किन कोर्सेज में मिलेगा दाखिला?
यह स्कॉलरशिप आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी के लिए है. ध्यान दें कि यह MBBS, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी या लॉ (Law) जैसे कोर्सेज के लिए उपलब्ध नहीं है. साथ ही, IIT के B.Tech प्रोग्राम इसमें शामिल नहीं हैं.
भारत की इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देना और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना है.
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