Bashir Badr Aligarh Muslim University: उर्दू के मशहूर शायर बशीर बद्र इस दुनिया में नहीं रहे, लंबे वक्त तक बीमार चलने के बाद 91 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली. बशीर बद्र को उनकी बेबाक शायरी और गज़लों के लिए जाना जाता था, अपने दौर में वो हर महफिल की रौनक हुआ करते थे. बशीर बद्र सिर्फ शायर ही नहीं, बल्कि प्रोफेसर भी थे और उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी. उनकी ग्रेजुएशन के दौर का एक दिलचस्प किस्सा भी है, जिसे सुनकर आज भी लोग हैरान रह जाते हैं.
यूनिवर्सिटी को बनाना पड़ा था अलग पेपर
डॉ बशीर बद्र की पत्नी राहत बद्र ने उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्सों के बारे में बताया है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि बशीर बद्र जब कॉलेज में पढ़ते थे तो उनकी शायरी और गजलें काफी मशहूर थीं. जब उन्होंने अलीगढ़ विश्वविद्यालय में उर्दू में एमए करने के लिए एडमिशन लिया तो उनकी गज़लें पढ़ाई जाती थीं, तब ये चर्चा होने लगी कि क्या बशीर बद्र अपनी ही गजलों पर पूछे गए सवालों का जवाब देंगे? तब उनके प्रोफेसर ने साफ किया था कि उनके लिए अलग पेपर बनाया जाएगा. बशीर बद्र अपनी गज़लों की परीक्षा नहीं देंगे. इसके बाद उनके लिए अलग पेपर बनाया गया और उन्होंने यूनिवर्सिटी में टॉप भी किया.
46 साल बाद मिली पीएचडी की डिग्री
बशीर बद्र को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से 46 साल बाद पीएचडी की डिग्री मिली, तब वो बीमार चल रहे थे. 'आजादी के बाद की गजल का तनकीदी मुताला' नाम से बशीर बद्र ने AMU में अपनी थीसिस जमा करवाई थी. हालांकि इसके बाद उनका करियर पहले टीचिंग और फिर शायरी में आगे बढ़ता गया और वो इसे भूल गए. बाद में उनकी पत्नी ने यूनिवर्सिटी से संपर्क किया और कई सालों बाद उनकी पीएचडी डिग्री उनके घर पहुंची.
बशीर बद्र शायरी के दुनिया के उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे, जिनका नाम हर महफिल में सम्मान से लिया जाता था. जिस दौरान उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी, तब उनका करियर बुलंदी पर था. बशीर बद्र ने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर प्रोफेसर भी काम किया था.
Bashir Badra: कभी AMU में उर्दू पढ़ाते थे बशीर बद्र, मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग के HOD भी रहे
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