- मिजोरम की राजधानी आइजोल में सरकारी सब्सिडी घोटाले में रवि गुलगुलिया समेत कई आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस
- आरोपियों ने Mizo Carbon Products नामक फर्जी कोक उत्पादन यूनिट बनाकर नकली कागजों से करोड़ों की सब्सिडी हासिल की
- फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लगभग तीन करोड़ पैंतालीस लाख रुपये की सरकारी रकम का गबन किया गया है
ED ने मिजोरम की राजधानी आइजोल में सरकारी सब्सिडी घोटाले के एक बड़े मामले में पहली बार चार्जशीट दाखिल की है. इस मामले में मुख्य आरोपी रवि गुलगुलिया और अन्य लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया है. ईडी की यह कार्रवाई मिजोरम में सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत मिजोरम पुलिस की एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी. इस एफआईआर में भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था. बाद में 30 मई 2019 को एसीबी ने इस मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी. इसी आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर जांच शुरू की.
फर्जी यूनिट दिखाकर करोड़ों की सब्सिडी हड़पी
ईडी की जांच में सामने आया कि रवि गुलगुलिया ने डॉ. मार्गरेट एम. वार्टे के साथ मिलकर एक साजिश के तहत आइजोल के पास Mizo Carbon Products (MCP) के नाम से एक कोक उत्पादन यूनिट खड़ी की थी. लेकिन असल में यह यूनिट जिस समय के लिए सब्सिडी का दावा किया गया, उस दौरान चालू ही नहीं थी. इसके बावजूद आरोपियों ने फर्जी दस्तावेज तैयार किए और सरकार से करोड़ों की सब्सिडी हड़प ली. जांच में यह भी पता चला कि आरोपियों ने उत्पादन, माल की ढुलाई, कच्चे माल की खरीद और डीजल खपत से जुड़े नकली रिकॉर्ड तैयार किए.
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3.41 करोड़ रुपये की सरकारी रकम का गबन
इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सेंट्रल ट्रांसपोर्ट सब्सिडी (CTS) के तहत करीब 2.47 करोड़ रुपये और सेंट्रल कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी (CCIS) के तहत करीब 93.90 लाख रुपये का गलत तरीके से फायदा उठाया गया. इस तरह कुल मिलाकर करीब 3.41 करोड़ रुपये की सरकारी रकम का गबन किया गया. ईडी की जांच यहीं नहीं रुकी. आगे पता चला कि जैसे ही सब्सिडी की रकम मिली, उसे तुरंत अलग-अलग कंपनियों और बैंक खातों के जरिए घुमाया गया, ताकि पैसे के असली स्रोत को छुपाया जा सके. यह पूरा पैसा रवि गुलगुलिया के कंट्रोल वाली कई फर्मों जैसे Ravi Gulgulia & Sons (HUF), Shivratri Commodities Pvt. Ltd., Thirdwave Suppliers Pvt. Ltd., Gulgulia Trade Corporation और Yash Marketing India के जरिए ट्रांसफर किया गया.
पैसा घुमाने के लिए कई फर्मों और खातों का इस्तेमाल
इन पैसों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग खातों में भेजा गया और फिर सर्कुलर ट्रांजैक्शन के जरिए घुमाया गया. आखिर में यह रकम आरोपी के निजी खातों और Global Entrade नाम की फर्म में पहुंचाई गई, जहां करीब 45 लाख रुपये की संदिग्ध रकम जमा की गई. इस मामले में ईडी पहले ही 38.40 लाख रुपये की अचल संपत्तियों को अटैच कर चुकी है. यह कार्रवाई PMLA की धारा 5 के तहत की गई थी. ईडी का कहना है कि यह पूरा मामला सरकारी योजनाओं का दुरुपयोग कर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का है.
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ईडी की जांच जारी, और खुलासों की संभावना
फिलहाल ईडी इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले समय में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं. यह मामला दिखाता है कि कैसे कुछ लोग सरकारी योजनाओं का फायदा उठाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों रुपये का गबन कर रहे हैं.














