हजारों करोड़ की ठगी पर ED का बड़ा एक्शन, 641 करोड़ साइबर फ्रॉड और 2,467 करोड़ घोटाले में गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय ने 641 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट को गिरफ्तार किया है, जिसमें निवेशकों को फंसाकर धन की ठगी की गई.

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  • ED ने 641 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को गिरफ्तार किया है
  • ED ने साइबर फ्रॉड रैकेट की जांच में निवेशकों को पार्ट-टाइम जॉब स्कीम और QR कोड स्कैम से ठगने का खुलासा किया
  • साइबर फ्रॉड में ठगी गई रकम म्यूल बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए विदेश भेजी गई
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नई दिल्ली:

देश में आर्थिक अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दो अलग-अलग मामलों में सख्त कदम उठाए हैं. पहले मामले में ED ने 641 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का खुलासा कर दो चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा और भास्कर यादव को गिरफ्तार किया है. वहीं दूसरे मामले में, Dnyanradha Multistate Co-operative Credit Society Ltd (DMCCSL) से जुड़े 2,467 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED ने अर्चना कुटे को गिरफ्तार किया है. दोनों मामलों में एजेंसी अवैध धन के स्रोत, लेयरिंग और उपयोग की पूरी चेन को उजागर करने पर केंद्रित है.

641 करोड़ का साइबर फ्रॉड: 2 CA हिरासत में

ED के अनुसार, यह एक बड़ा साइबर फ्रॉड रैकेट था जो देशभर के आम लोगों को निवेश के नाम पर, पार्ट-टाइम जॉब स्कीम, QR कोड स्कैम और फिशिंग जैसे तरीकों से फंसाता था. बड़े मुनाफे का लालच देकर पीड़ितों से धनराशि ट्रांसफर कराई जाती थी और जांच के मुताबिक लगभग 641 करोड़ रुपये की ठगी की गई. ED की जांच में सामने आया कि ठगी से हासिल रकम सबसे पहले म्यूल बैंक खातों में डाली जाती थी, जिन्हें कुछ टेलीग्राम ग्रुप्स से जुड़े लोग ऑपरेट करते थे. इसके बाद इस पैसे को भारत में बनी कई डमी/शेल कंपनियों के जरिए अलग-अलग ठिकानों पर ट्रांसफर किया जाता था, ताकि असली सोर्स छिपाया जा सके.

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जांच में क्या पता चला

जांच में यह भी सामने आया कि आगे चलकर इन पैसों को भारतीय बैंकों के VISA और MasterCard डेबिट कार्ड के जरिए UAE की फिनटेक कंपनी PYYPL के प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता था, जो अबू धाबी ग्लोबल मार्केट (ADGM) की फाइनेंशियल सर्विसेज रेगुलेटरी अथॉरिटी के तहत रेगुलेट होता है. ED के मुताबिक, PYYPL वॉलेट में रकम पहुंचने के बाद उसे विदेश में, खासकर दुबई में ATM और POS ट्रांजैक्शंस के जरिए निकाला जाता था. कुछ मामलों में धन को Binance क्रिप्टो एक्सचेंज के माध्यम से वर्चुअल डिजिटल एसेट (क्रिप्टोकरेंसी) में बदला गया और फिर अलग-अलग क्रिप्टो वॉलेट्स के जरिए घुमाया गया ताकि स्रोत और ट्रेल धुंधला किया जा सके.

ईडी ने क्या बताया

ED का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क को पढ़े-लिखे प्रोफेशनल्स का एक सिंडिकेट चला रहा था, जिसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट अशोक कुमार शर्मा, भास्कर यादव, अजय और विपिन यादव शामिल थे. दिल्ली के बिजवासन इलाके में एक ही पते से 20 से ज्यादा कंपनियां बनाई गई थीं, जिनमें कई जगह एक ही पार्टनर, साइनिंग अथॉरिटी, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी का इस्तेमाल हुआ. इन कंपनियों को ठगी के पैसों को इधर-उधर घुमाने और विदेश भेजने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.

कई ठिकानों पर छापेमारी

इस मामले में 28 नवंबर 2024 को ED ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी. आरोप है कि जब टीम अशोक कुमार शर्मा के घर पहुंची, तो वह वहां से भाग गया और भागते समय ED अधिकारियों पर हमला भी किया. इसके बाद दिल्ली के कापसहेड़ा थाने में अशोक कुमार शर्मा और उसके भाई सुभाष शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज की गई. वहीं भास्कर यादव भी छापेमारी की सूचना मिलते ही अपने घर से फरार हो गया था. छापेमारी के दौरान, ED को अशोक कुमार शर्मा के घर से कई शेल कंपनियों के ATM कार्ड, चेक बुक और कई अहम दस्तावेज मिले.

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गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों आरोपियों ने एंटीसिपेटरी बेल की याचिकाएं दायर कीं, लेकिन 15 जनवरी 2025 को स्पेशल कोर्ट और 2 फरवरी 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें खारिज कर दिया. इसके बाद भास्कर यादव ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की, जिसे 18 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज करते हुए सरेंडर का निर्देश दिया. अंततः कोर्ट के सामने सरेंडर करने के बाद, ED ने दोनों को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया.

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ED के अनुसार, इस केस में अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. एजेंसी ने दो प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर्स जारी करके करीब 8.67 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अटैच की हैं. इसके अलावा, ED दो चार्जशीट भी स्पेशल PMLA कोर्ट में दाखिल कर चुकी है, जिन पर अदालत संज्ञान ले चुकी है. जांच अभी जारी है और आगे भी कार्रवाई की संभावना है.

DMCCSL घोटाला (2,467 करोड़): अर्चना कुटे ED की कस्टडी में

मुंबई में ED ने बड़े वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में अर्चना कुटे को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई PMLA के तहत Dnyanradha Multistate Co-operative Credit Society Ltd (DMCCSL) से जुड़े वित्तीय घोटाले और निवेशकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में की गई. 3 मार्च 2026 को अर्चना कुटे को मुंबई की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए उन्हें 7 मार्च 2026 तक यानी 5 दिन की ED कस्टडी में भेज दिया.

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अलग-अलग थानों में एफआईआर

जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला महाराष्ट्र के अलग-अलग पुलिस थानों में मई से जुलाई 2024 के बीच दर्ज कई FIR के आधार पर शुरू हुआ. आरोप है कि सुरेश कुटे और उनके साथियों ने DMCCSL के जरिए लोगों को 12 से 14 प्रतिशत तक रिटर्न का लालच दिया. बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपनी जमा पूंजी इन स्कीमों में लगाई, लेकिन बाद में या तो पैसा वापस नहीं मिला या बहुत कम भुगतान हुआ, जिससे हजारों लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.

ED की जांच में सामने आया कि सोसाइटी के करीब 2,467 करोड़ रुपये कथित तौर पर लोन के नाम पर कुटे ग्रुप की कई कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए गए. इन कंपनियों का नियंत्रण सुरेश कुटे और अर्चना कुटे के पास बताया गया है. जांच में यह भी पाया गया कि रकम ट्रांसफर करते समय न तो कोई ठोस दस्तावेज, गारंटी या गिरवी ली गई और न ही धन के उपयोग का सही रिकॉर्ड रखा गया. ये भी आरोप है कि इन फंड्स का इस्तेमाल वैध कारोबारी गतिविधियों के बजाय निजी फायदे और दूसरे बिजनेस में निवेश के लिए किया गया.

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इस मामले में ED पहले ही सुरेश कुटे को गिरफ्तार कर चुकी है. एजेंसी ने स्पेशल PMLA कोर्ट, मुंबई में चार्जशीट दाखिल की थी, जिस पर अदालत संज्ञान ले चुकी है. जांच के दौरान कई जगह छापेमारी की गई है और एजेंसी अब तक 1,621.89 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अटैच/जब्त कर चुकी है. ED के मुताबिक, मामले में जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई संभव है.

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