फर्जी ITC घोटाले पर ईडी का बड़ा एक्शन, 14.85 करोड़ की संपत्तियां अटैच

ED ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 14.85 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है. जांच में कई राज्यों में फैले शेल कंपनियों के नेटवर्क और फर्जी बिलिंग के जरिए टैक्स चोरी का खुलासा हुआ है.

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  • प्रवर्तन निदेशालय ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले में १४.८५ करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं
  • जांच में सामने आया कि कई शेल कंपनियां बिना वास्तविक कारोबार के ९९.३१ करोड़ रुपये का फर्जी ITC तैयार कर रही थीं
  • ईडी ने १५ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर विभिन्न राज्यों में १० ठिकानों पर छापेमारी कर अहम सबूत बरामद किए
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ईडी ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े एक बड़े घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 14.85 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच कर लिया है. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत 30 मार्च 2026 को की गई. इस केस की जांच ईडी के ईटानगर सब-जोनल ऑफिस द्वारा की जा रही है, जिसमें देश के अलग-अलग राज्यों में फैले फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है. ईडी के मुताबिक, जिन संपत्तियों को अटैच किया गया है, उनमें चल और अचल दोनों तरह की संपत्तियां शामिल हैं.

14.85 करोड़ की चल‑अचल संपत्तियां अटैच

इसमें Ganesh International के पार्टनर की करीब 11.88 करोड़ रुपये की शेयर होल्डिंग शामिल है, जो एक लिस्टेड कंपनी में निवेश के रूप में पाई गई इसके अलावा तीन अन्य लोगों की अचल संपत्तियां भी अटैच की गई हैं, जो पश्चिम बंगाल के हावड़ा और हुगली जिलों के साथ-साथ गुवाहाटी में स्थित हैं. इस मामले में ईडी ने 15 आरोपियों के खिलाफ 30 मार्च 2026 को चार्जशीट भी दाखिल कर दी है. जांच की शुरुआत एक एफआईआर के आधार पर हुई थी. इसके बाद 20 जनवरी 2026 को ईडी ने अरुणाचल प्रदेश, कोलकाता, झारखंड और मणिपुर में 10 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की थी, जहां से कई अहम सबूत बरामद किए गए और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए.

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शेल कंपनियों के नेटवर्क का खुलासा

जांच में सामने आया कि  Siddhi Vinayak Trade Merchant नाम की कंपनी असल में एक फर्जी शेल कंपनी थी, जिसने बिना किसी असली सामान की सप्लाई के करीब 99.31 करोड़ रुपये का फर्जी ITC तैयार किया. यह पूरा खेल सिर्फ कागजों पर चल रहा था, जिसमें फर्जी बिल बनाकर टैक्स क्रेडिट लिया जा रहा था. ईडी की जांच में यह भी पता चला कि इस फर्जी ITC को कई शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया, ताकि असली स्रोत को छुपाया जा सके. इनमें  AC Enterprise,  Riya Rishita Enterprise, Prince Enterprise, P Enterprise और Rangoli Enterprise जैसी कई कंपनियां शामिल थीं.

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99.31 करोड़ का फर्जी ITC कागजों पर

जांच में यह सामने आया कि ये कंपनियां अपने बताए गए पते पर मौजूद ही नहीं थीं और न ही कोई वास्तविक कारोबार कर रही थीं, जब इन्हें समन भेजे गए तो वे भी सर्व नहीं हो पाए. जांच के दौरान कुछ लोगों ने यह भी कबूल किया कि उन्होंने सिर्फ कागजी लेन-देन दिखाया और असल में कोई खरीद-फरोख्त नहीं हुई. फर्जी बिलों में सीमेंट, लेदर प्रोडक्ट्स, इलेक्ट्रिकल सामान और लोहे-स्टील जैसे सामान दिखाए गए, लेकिन असल में इनका कोई लेन-देन नहीं हुआ था. ईडी ने पाया कि  Riya Rishita Enterprise जैसी कंपनियां इस पूरे घोटाले में बीच की कड़ी के तौर पर काम कर रही थीं, जो फर्जी ITC को एक कंपनी से दूसरी कंपनी तक पहुंचाने का काम करती थीं.

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असली कंपनियों तक पहुंचा फर्जी टैक्स क्रेडिट

इसके बाद यह पैसा असली कंपनियों तक पहुंचता था, जो इसका इस्तेमाल अपने GST भुगतान में करती थीं. जांच में यह भी सामने आया कि  Ganesh International (जो अब Ganesh Infraworld Limited बन चुकी है), Phoenix Hydraulics, Fama Marketing और Anjani Impex जैसी कंपनियों ने इस फर्जी ITC का फायदा उठाया. इन कंपनियों ने करीब 14.85 करोड़ रुपये का फर्जी ITC इस्तेमाल किया, जबकि इनके पास इसके पीछे कोई असली कारोबार या सप्लाई नहीं थी. इन कंपनियों ने फर्जी बिल और ई-वे बिल के आधार पर अपना GST भर दिया और अपने कारोबार को कागजों में काफी बड़ा दिखाया. जबकि हकीकत में इनके पास उतना कारोबार था ही नहीं. इससे साफ होता है कि यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी का है. ईडी के अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए अपराध की कमाई को छुपाने और उसे वैध दिखाने की कोशिश की गई.

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