सोशल मीडिया पर विदेश में नौकरी का झांसा, पासपोर्ट और फर्जी वीजा से ठगी का खेल, बड़े गिरोह का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने रूस और तुर्की में नौकरी का झांसा देकर लोगों से पैसे और पासपोर्ट ठगने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

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पुलिस की गिरफ्त में तीन आरोपी
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  • दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया
  • आरोपियों ने फेसबुक और व्हाट्सएप पर फर्जी विज्ञापन देकर पीड़ितों से पासपोर्ट और पैसे ठगने का काम किया
  • गिरफ्तार आरोपियों के पास से पांच असली पासपोर्ट, सात मोबाइल फोन, नकली वीजा और जॉब लेटर के स्क्रीनशॉट बरामद हुए
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों से ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है. क्राइम ब्रांच के मुताबिक इंस्पेक्टर संजय कौशिक की अगुवाई में की गई कार्रवाई में इस गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. ये आरोपी रूस और तुर्की जैसे देशों में आकर्षक नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों को ठगते थे.

गिरोह में किस आरोपी का क्या काम

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में सिवान, बिहार का रहने वाला सलाउद्दीन मंसूरी उर्फ हैदर खान शामिल है, जो गिरोह में खुद को कोलकाता की फर्जी कंपनी सबा एंटरप्राइजेज का HR मैनेजर बताकर पीड़ितों से संपर्क करता था. दूसरा आरोपी कौशर है, जो कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का रहने वाला है. इसका मुख्य काम बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश से भोले‑भाले लोगों को फंसाना और उनके दस्तावेज इकट्ठा करना था. तीसरा आरोपी मोहम्मद शहजाद है, जो साहिबाबाद, गाजियाबाद का रहने वाला है. यह एजेंट के तौर पर ग्राहकों को लाता था और ठगी की रकम आपस में बांटी जाती थी.

विदेश में नौकरी का झांसा देकर बनाते थे शिकार

क्राइम ब्रांच के मुताबिक जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी फेसबुक और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर विदेशों में नौकरी से जुड़े विज्ञापन डालते थे. जब कोई व्यक्ति संपर्क करता था तो उससे कोरियर के जरिए उसका असली पासपोर्ट मंगवा लिया जाता था. इसके बाद पासपोर्ट को स्कैन कर उस पर रूस, तुर्की और अजरबैजान के फर्जी वीजा स्टैंप लगाए जाते थे. पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए आरोपियों की ओर से फर्जी एयर टिकट और नकली ऑनलाइन वेरिफिकेशन लिंक भी भेजे जाते थे. जैसे ही पीड़ित पैसे जमा करवा देते, आरोपी अपने मोबाइल फोन बंद कर गायब हो जाते थे. ठगी का पता पीड़ितों को तब चलता था, जब वे देखते थे कि उनके असली पासपोर्ट पर कोई वीजा नहीं है और टिकट कैंसिल हो चुके हैं.

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आरोपियों के पास से क्या कुछ बरामद

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि एसीपी अशोक शर्मा की देखरेख में गठित टीम ने पीतमपुरा के पास जाल बिछाकर इन तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस ने इनके पास से 5 असली भारतीय पासपोर्ट (पीड़ितों के), 7 मोबाइल फोन, जिनमें फर्जी वीजा, जॉब लेटर और हवाई टिकटों के स्क्रीनशॉट मिले हैं, बरामद किए हैं. इसके अलावा पुलिस ने नकद राशि, फर्जी नाम हैदर खान से बना एक आधार कार्ड, और 9 डेबिट व प्रीपेड कार्ड भी जब्त किए हैं. डीसीपी क्राइम ब्रांच पंकज कुमार ने जानकारी दी कि इस मामले में क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. कोर्ट ने तीनों आरोपियों को 7 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है.

पकड़े गए आरोपियों की प्रोफाइल

सलाउद्दीन मंसूरी उर्फ हैदर खान गिरोह का मुख्य एजेंट था, उसने 12वीं तक पढ़ाई की है और पहले नोएडा में एक्सपोर्ट और इंश्योरेंस कंपनियों में काम करता था. कम कमाई के चलते जल्द अमीर बनने के लालच में यह मास्टरमाइंड मोहम्मद मुन्ना के गैंग में शामिल हो गया. यह 40 प्रतिशत कमीशन पर काम करता था और कोलकाता की फर्जी कंपनी सबा एंटरप्राइजेज का HR मैनेजर बनकर लोगों को फंसाता था. पुलिस ने इसके पास से पीड़ितों के दो पासपोर्ट और हैदर खान के नाम का फर्जी आधार कार्ड बरामद किया है.

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क्लाइंट खोजता था दूसरा आरोपी

दूसरा आरोपी कौशर क्लाइंट ढूंढने का काम करता था. इसने 10वीं तक पढ़ाई की है और पहले मैकेनिक का काम करता था. 2014 में एक एक्सीडेंट के बाद यह भारी काम करने में असमर्थ हो गया. 2022 से 2024 तक सऊदी अरब में रहने के बाद जब भारत लौटा, तो इस गैंग में शामिल हो गया. इसका काम बिहार, बंगाल और यूपी से विदेश जाने के इच्छुक लोगों को ढूंढना था. यह फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करता था और अब तक करीब 9 लोगों को ठगने की बात कबूल कर चुका है. इसके पास से पीड़ितों के दो पासपोर्ट और अलग‑अलग नामों वाले 9 एटीएम कार्ड मिले हैं.

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तीसरे आरोपी का प्रोफाइल

तीसरा आरोपी मोहम्मद शहजाद है, जिसने सिर्फ 6वीं कक्षा तक पढ़ाई की है. यह पहले दर्जी का काम करता था और सहारा इंडिया जैसी कंपनियों में भी छोटी‑मोटी नौकरी कर चुका है. यह 2020 में भी एक मामले में जेल जा चुका है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक मास्टरमाइंड मुन्ना ने इसे सिखाया था कि पैसे लेने के बाद मोबाइल बंद कर देना है. यह भी ग्राहकों को फंसाकर लाता था और ठगी की रकम आपस में बांटी जाती थी. इसके फोन से मास्टरमाइंड मुन्ना के साथ हुई चैट भी मिली है. इसके पास से भी एक पीड़ित का पासपोर्ट बरामद हुआ है. दिल्ली पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगना मोहम्मद मुन्ना की तलाश कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गैंग ने अब तक और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है.

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