- ई़डी ने अंडमान एंड निकोबार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक फ्रॉड मामले में करीब 200 करोड़ की 51 संपत्तियां अटैच की हैं
- पूर्व सांसद और बैंक के वाइस-चेयरमैन कुलदीप राय शर्मा ने 23 शेल कंपनियां बनाकर बैंक से 301 करोड़ के लोन लिए
- जांच में पाया गया कि बैंक के नियमों और आरबीआई के निर्देशों की अनदेखी करते हुए बिना उचित जांच मंजूर किए गए थे
प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) के कोलकाता जोनल ऑफिस ने बड़ा एक्शन लेते हुए अंडमान एंड निकोबार स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (ANSCBL) फ्रॉड केस में करीब 200.02 करोड़ रुपये की 51 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं. इनमें होटल, रिसॉर्ट और जमीन के कई टुकड़े शामिल हैं, जो अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित हैं.
ईडी (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच उस एफआईआर (FIR) के आधार पर शुरू की, जो क्राइम एंड इकोनॉमिक ऑफेंस पुलिस स्टेशन, अंडमान एंड निकोबार पुलिस ने दर्ज की थी. इस मामले में पूर्व सांसद कुलदीप राय शर्मा और अन्य लोगों पर आईपीसी (IPC) की कई धाराओं में केस दर्ज हुआ था.
जांच में यह भी सामने आया कि एक करोड़ रुपये से ज्यादा के 100 से अधिक हाई-वैल्यू लोन नियमों की अनदेखी करते हुए मंजूर किए गए. NABARD की गाइडलाइन, RBI के निर्देश और बैंक के अपने नियमों की खुलेआम अवहेलना की गई. इन बड़े खातों में ही 420 करोड़ रुपये से ज्यादा NPA हो चुका है, जो बैंक के कुल NPA का बड़ा हिस्सा है. मौजूदा स्थिति में कुल NPA 500 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया जा रहा है.
ED ने 51 संपत्तियों की पहचान की है, जिनमें 25 जमीन के टुकड़े ऐसे हैं, जिन्हें पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए डमी डायरेक्टर और शेल कंपनियों के नाम पर खरीदा गया. इन जमीनों की कीमत करीब 123 करोड़ रुपये आंकी गई है. बाद में इन संपत्तियों की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाकर बैंक से बड़े लोन लिए गए. यह सब बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया.
लोन लेकर पैसा किया डायवर्ट
जांच में पता चला कि बिना सही वैल्यूएशन, बिना असली बिजनेस गतिविधि और बिना उचित जांच-पड़ताल के लोन मंजूर किए गए. लोन का पैसा अलग-अलग शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया और कैश निकालकर हड़प लिया गया. इसी पैसे से आरोपियों और उनके करीबियों के नाम पर जमीन, होटल और रिसॉर्ट खरीदे गए. कोई वास्तविक बिजनेस नहीं चलाया गया, जिससे लोन चुकाया जा सके. नतीजा यह हुआ कि लोन NPA बनते गए.
ED के मुताबिक, बैंक के तत्कालीन वाइस-चेयरमैन कुलदीप राय शर्मा ने बैंक के अधिकारियों के. मुरुगन और के. कलैवाणन की मदद से यह पूरा खेल रचा. इन दोनों अधिकारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
जांच में यह भी सामने आया कि होटल व्यवसायी संजय लाल और संजीव लाल ने डमी डायरेक्टर उपलब्ध कराए और शेल कंपनियों के जरिए एंट्री दिलाई. बदले में उन्हें भी फर्जी लोन की रकम में हिस्सा मिला. आरोप है कि लोन की रकम में से भारी नकदी निकालकर मुख्य आरोपी कुलदीप राय शर्मा तक पहुंचाई गई.
इस मामले में ED पहले ही कुलदीप राय शर्मा (पूर्व सांसद और वाइस-चेयरमैन), संजय लाल (होटल व्यवसायी), के. मुरुगन (MD) और के. कलैवाणन (लोन ऑफिसर) को गिरफ्तार कर चुकी है.
- 14 नवंबर 2025 को ED ने 39 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ स्पेशल PMLA कोर्ट, पोर्ट ब्लेयर में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की थी.
- 12 दिसंबर 2025 को स्पेशल कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी.
- 10 फरवरी 2026 को कलकत्ता हाई कोर्ट की सर्किट बेंच (पोर्ट ब्लेयर) ने भी कुलदीप राय शर्मा और संजय लाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी.
ED का कहना है कि यह एक बड़ा और सुनियोजित बैंक घोटाला है, जिसमें शेल कंपनियों और बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से सैकड़ों करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई. फिलहाल मामले की जांच जारी है और ED आगे भी और संपत्तियों और शामिल लोगों की पहचान कर सकती है.
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